2018‑2021 के बीच नोइडा अथॉरिटी ने 300 से अधिक सार्वजनिक शौचालय बनाए, लेकिन आज कई सुविधाएँ बंद, खराब रखरखाव या उपयोग‑योग्य नहीं हैं। यह शहर की स्वच्छता‑रैंकिंग को खतरे में डाल रहा है।
मुख्य बिंदु
- नोइडा ने 2018‑2021 में 300+ सार्वजनिक शौचालय स्थापित किए।
- इनमें से अधिकांश अब ताले लगे, खराब रखरखाव या उपयोग‑योग्य नहीं हैं।
- नागरिकों को स्वच्छता एवं स्वास्थ्य संबंधी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
वर्तमान स्थिति
नोइडा अथॉरिटी ने स्वच्छ भारत मिशन के तहत शहर में 300 से अधिक सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण किया, जिससे शहर की स्वच्छता‑रैंकिंग में उल्लेखनीय सुधार आया। लेकिन हालिया सर्वेक्षण दिखाता है कि कई टॉयलेट अब ताले लगे हुए हैं, रोशनी और पानी की कमी है, और सफाई की उपेक्षा के कारण गंदे हो गए हैं।
निवासियों की शिकायतें
स्थानीय नागरिकों ने सोशल मीडिया पर इन शौचालयों की स्थिति को लेकर निराशा व्यक्त की है। वे कहते हैं कि अब शाम‑शाम को भी सार्वजनिक टॉयलेट ढूँढना मुश्किल हो गया है, जिससे अस्वस्थता और असुरक्षा की भावना बढ़ी है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
नोइडा ने 2018 में स्वच्छता‑रैंकिंग में सुधार के लिए सार्वजनिक शौचालयों के निर्माण को प्राथमिकता दी। उस समय शहर ने 150 से अधिक टॉयलेट बनाए और इसे राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया। 2021 तक यह संख्या 300 से अधिक हो गई, जिससे नोइडा को स्वच्छता‑सुविधाओं में अग्रणी माना गया।
क्यों यह महत्वपूर्ण है
BozokMedia analysis shows that neglecting routine maintenance erodes public trust and can lead to health hazards, especially in rapidly urbanising cities like Noida.
शहरी योजना विशेषज्ञ डॉ. अyesha खान कहती हैं, “रखरखाव की अनदेखी सार्वजनिक भरोसे और स्वास्थ्य परिणामों को नुकसान पहुँचा देती है।”
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- शौचालय बंद क्यों हैं? – अधिकांश मामलों में रखरखाव की कमी और बजट की कमी के कारण ताले लगाए जाते हैं।
- नोइडा अथॉरिटी क्या सुधार कर सकती है? – नियमित सफाई, पानी की आपूर्ति और उपयोग‑योग्य सुविधाओं की पुनर्स्थापना आवश्यक है।