पूर्वोत्तर मानसून से पहले चेन्नई को जलभराव से बचाने के लिए जल संसाधन विभाग (WRD) ने ₹400 करोड़ के 20 महत्वपूर्ण परियोजनाओं का प्रस्ताव दिया है। इन कार्यों का उद्देश्य जलमार्गों से बाधाओं को हटाना और जल निकायों का पुनरुद्धार करना है।

मुख्य बातें

  • चेन्नई बेसिन में 20 बाढ़ शमन परियोजनाओं का प्रस्ताव।
  • ₹400 करोड़ की अनुमानित लागत के साथ विशेष अभियान।
  • कूव और अडयार जैसी नदियों में जल प्रवाह की बाधाओं को हटाया जाएगा।
  • दो महीने के भीतर अल्पकालिक कार्यों को पूरा करने का लक्ष्य।

चेन्नई को आगामी पूर्वोत्तर मानसून के दौरान संभावित बाढ़ के खतरों से बचाने के लिए, जल संसाधन विभाग (WRD) ने एक व्यापक रणनीति तैयार की है। विभाग ने इस वित्तीय वर्ष के दौरान कार्यान्वयन के लिए चेन्नई बेसिन में लगभग 20 बाढ़ शमन परियोजनाओं का प्रस्ताव दिया है। इन परियोजनाओं का मुख्य उद्देश्य जल निकायों का पुनरुद्धार करना और जलमार्गों में आने वाली बाधाओं को दूर करना है ताकि पानी का प्रवाह निर्बाध बना रहे।

रणनीति और बजट

WRD के सूत्रों के अनुसार, इन परियोजनाओं की अनुमानित लागत लगभग ₹400 करोड़ है। हालांकि बड़ी योजनाओं को राज्य विधानसभा द्वारा बजट की मंजूरी का इंतजार है, लेकिन विभाग 'राज्य आपदा शमन कोष' (State Disaster Mitigation Fund) के तहत प्राथमिकता के आधार पर विशेष अभियान चलाकर काम शुरू करने की योजना बना रहा है। विभाग का लक्ष्य इन अल्पकालिक कार्यों को अगले दो महीनों के भीतर पूरा करना है।

इन कार्यों में कूव नदी सहित प्रमुख जलमार्गों में पानी के मुक्त प्रवाह को रोकने वाले अवरोधों को हटाना शामिल है। इसके अलावा, अरनियार और दक्षिण बकिंघम नहर जैसे जलमार्गों के किनारे बाढ़ सुरक्षा दीवारें बनाई जाएंगी ताकि आसपास के इलाकों में पानी न भरे। उदाहरण के तौर पर, अडयालमपट्टू और अवधी-पूनमल्ली रोड पर कूव नदी के पुराने पुलों और कॉजवे को हटाया जाएगा।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि चेन्नई के लिए मानसून के दौरान शहरी बाढ़ एक आवर्ती समस्या रही है। जलमार्गों में अतिक्रमण और पुराने बुनियादी ढांचे के कारण पानी की निकासी धीमी हो जाती है, जिससे जान-माल का नुकसान होता है। समय रहते इन बाधाओं को हटाना और 'फ्लड रेगुलेटर' का निर्माण करना शहर की आपदा लचीलापन (resilience) को बढ़ाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

जलमार्गों की सफाई और सुरक्षा दीवारों का निर्माण चेन्नई की शहरी बाढ़ प्रबंधन प्रणाली में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।

विभाग ने श्रीपेरंबुदूर तालुक में पिलाइपक्कम और पोंदुर पेरिया एरी सहित कई जल निकायों की पहचान की है, जहां बाढ़ नियंत्रण के लिए रेगुलेटर स्थापित किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त, चेम्बरामबक्कम और रेड हिल्स जलाशयों में सुधार भी प्रस्तावित है।

क्या आप जानते हैं?: चेन्नई के कई जलमार्ग ऐतिहासिक रूप से शहर के प्राकृतिक ड्रेनेज सिस्टम का हिस्सा रहे हैं, लेकिन शहरीकरण ने इनके प्रवाह को गंभीर रूप से बाधित कर दिया है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. WRD इन परियोजनाओं को कितने समय में पूरा करना चाहता है?
विभाग का लक्ष्य इन अल्पकालिक बाढ़ शमन कार्यों को अगले दो महीनों के भीतर पूरा करना है।

2. इन परियोजनाओं का मुख्य उद्देश्य क्या है?
मुख्य उद्देश्य जलमार्गों से बाधाओं को हटाना, बाढ़ सुरक्षा दीवारें बनाना और जल निकायों का पुनरुद्धार करना है ताकि मानसून के दौरान बाढ़ का खतरा कम हो सके।