आंध्र प्रदेश ने सतत शहरी विकास में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है, जिसमें राज्य में 638 IGBC-पंजीकृत हरित भवन परियोजनाएं शामिल हैं। ये परियोजनाएं 627.58 मिलियन वर्ग फुट क्षेत्र को कवर करती हैं और राज्य के कम-कार्बन भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं।

मुख्य बातें

  • आंध्र प्रदेश में कुल 638 IGBC-पंजीकृत ग्रीन बिल्डिंग प्रोजेक्ट्स हैं।
  • इन परियोजनाओं का कुल क्षेत्रफल लगभग 627.58 मिलियन वर्ग फुट है।
  • सरकार डेवलपर्स को प्रभाव शुल्क (Impact Fee) और पंजीकरण शुल्क में 20% तक की छूट दे रही है।
  • अमरावती को एक मॉडल ग्रीन कैपिटल सिटी के रूप में विकसित किया जा रहा है।

आंध्र प्रदेश ने शहरी विकास, औद्योगिक विकास और सार्वजनिक बुनियादी ढांचे में स्थिरता (sustainability) को एकीकृत करने में भारत के सबसे प्रगतिशील राज्यों में से एक बनकर उभरा है। इंडियन ग्रीन बिल्डिंग काउंसिल (IGBC) के अनुसार, राज्य में 638 से अधिक IGBC-पंजीकृत हरित भवन परियोजनाएं हैं, जो लगभग 627.58 मिलियन वर्ग फुट क्षेत्र में फैली हुई हैं।

परियोजनाओं का वर्गीकरण

IGBC अमरावती चैप्टर के अध्यक्ष विजय साई मेका ने बताया कि इन परियोजनाओं में विविधता है। इनमें 438 वाणिज्यिक (commercial), 83 पारगमन बुनियादी ढांचा (transit infrastructure), 57 आवासीय, 37 औद्योगिक और लॉजिस्टिक, और 18 निर्मित पर्यावरण परियोजनाएं शामिल हैं। इसके अलावा, पांच 'नेट जीरो' परियोजनाएं भी इस सूची में शामिल हैं जो पर्यावरण के प्रति राज्य की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं।

सरकार द्वारा दिए जाने वाले प्रोत्साहन

आंध्र प्रदेश सरकार ने हरित भवनों को बढ़ावा देने के लिए भारत के सबसे आकर्षक प्रोत्साहन पैकेजों में से एक पेश किया है। डेवलपर्स को मिलने वाले लाभों का विवरण नीचे दिया गया है:

प्रकार का लाभविवरण
इम्पैक्ट फीस छूटबहुमंजिला इमारतों के लिए 20% तक की छूट
APRERA रिफंडअंतिम IGBC प्रमाणन पर पंजीकरण शुल्क का 20% रिफंड
आवासीय रियायतेंट्रांसफर शुल्क में विशेष छूट
औद्योगिक सब्सिडीहरित प्रथाओं को अपनाने वाले उद्योगों के लिए पूंजीगत सब्सिडी

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि ये वित्तीय प्रोत्साहन न केवल पर्यावरण के अनुकूल निर्माण को बढ़ावा दे रहे हैं, बल्कि रियल एस्टेट क्षेत्र में निवेश के नए द्वार भी खोल रहे हैं।

Why This Matters

यह विकास महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दर्शाता है कि कैसे आर्थिक विकास और पर्यावरणीय संरक्षण एक साथ चल सकते हैं। अमरावती का मास्टर प्लान 'स्वर्ण आंध्र 2047' के सिद्धांतों पर आधारित है, जो पर्यावरण स्थिरता और डिजिटल गवर्नेंस को जोड़ता है।

आंध्र प्रदेश का मॉडल यह सिद्ध करता है कि नीतिगत समर्थन और तकनीकी विशेषज्ञता के माध्यम से एक कम-कार्बन भविष्य का निर्माण संभव है।
क्या आप जानते हैं?: 'नेट जीरो' इमारतें वे होती हैं जो साल भर में जितनी ऊर्जा का उपयोग करती हैं, उतनी ही ऊर्जा स्वयं उत्पन्न कर लेती हैं।

Frequently Asked Questions

1. IGBC क्या है?
IGBC यानी इंडियन ग्रीन बिल्डिंग काउंसिल, जो इमारतों को पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए रेटिंग और मानक प्रदान करती है।

2. आंध्र प्रदेश सरकार क्या छूट दे रही है?
सरकार डेवलपर्स को इम्पैक्ट फीस और APRERA पंजीकरण शुल्क में 20% तक की छूट दे रही है।