केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने राज्य में भविष्य की आपदाओं से निपटने के लिए एक व्यापक 'केरल आपदा लचीलापन कार्यक्रम' की शुरुआत करने की घोषणा की है। इस योजना में एआई-आधारित प्रबंधन और नदी सफाई जैसे महत्वपूर्ण कदम शामिल हैं।
मुख्य बातें
- केरल सरकार ने दीर्घकालिक आपदा लचीलापन कार्यक्रम (Kerala Disaster Resilience Programme) शुरू किया।
- योजना में एआई-संचालित बांध प्रबंधन और उन्नत चेतावनी प्रणाली शामिल होगी।
- नदियों से गाद और मलबे को हटाने के लिए विशेष योजना बनाई जाएगी।
- इस कार्यक्रम के लिए संशोधित बजट में ₹15 करोड़ आवंटित किए गए हैं।
केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने बुधवार को घोषणा की कि राज्य सरकार एक प्रभावी और दीर्घकालिक आपदा लचीलापन कार्यक्रम बनाने की दिशा में काम शुरू कर चुकी है। जून में पेश किए गए यूडीएफ (UDF) सरकार के 2026-27 के संशोधित बजट में इस महत्वाकांक्षी योजना की घोषणा की गई थी। मुख्यमंत्री का लक्ष्य इस कार्यक्रम को पूरे देश के लिए एक 'मॉडल' के रूप में स्थापित करना है।
हाल ही में राज्य में भारी बारिश के कारण आई बाढ़ और भूस्खलन की घटनाओं को देखते हुए, सरकार ने सुरक्षा उपायों को तेज कर दिया है। वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, बारिश के कहर ने राज्य में 26 लोगों की जान ले ली है और चार लोग लापता हैं। इस संकट के बीच, सरकार अब वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाकर भविष्य की चुनौतियों का सामना करने की तैयारी कर रही है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, केरल की भौगोलिक स्थिति इसे प्राकृतिक आपदाओं के प्रति संवेदनशील बनाती है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि एआई-संचालित बांध प्रबंधन, सटीक मौसम पूर्वानुमान और प्रभावी प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली इस कार्यक्रम के मुख्य स्तंभ होंगे। नदियों की गहराई बहाल करना इस रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, क्योंकि गाद जमने से बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है।
"हर आपदा ने वैज्ञानिक आपदा तैयारी और रोकथाम की आवश्यकता को स्पष्ट रूप से उजागर किया है।" - मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन
मुख्यमंत्री सतीशन, जो वित्त पोर्टफोलियो भी संभाल रहे हैं, ने बताया कि लैंड राजस्व और जल संसाधन विभागों को 2018 और 2019 की बाढ़ के बाद नदियों में जमा हुए गाद, रेत और मलबे को हटाने के लिए एक विस्तृत योजना तैयार करने का निर्देश दिया गया है। उनका मानना है कि केवल इस एक उपाय से फ्लैश फ्लड और जलभराव की 50% से 60% समस्याओं का समाधान किया जा सकता है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
पिछले एक दशक में, केरल ने वायनाड के मुंडक्कई-चूरालमला जैसी हृदयविदारक त्रासदियों, गंभीर तटीय कटाव और बार-बार आने वाली बाढ़ सहित कई विनाशकारी प्राकृतिक आपदाओं का सामना किया है। इन घटनाओं ने राज्य की आपदा प्रबंधन प्रणाली में बड़े बदलावों की आवश्यकता को जन्म दिया है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. केरल आपदा लचीलापन कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका उद्देश्य एआई और उन्नत तकनीक का उपयोग करके भविष्य की बाढ़ और भूस्खलन जैसी आपदाओं के प्रभाव को कम करना है।
2. इस कार्यक्रम के लिए कितना बजट आवंटित किया गया है?
संशोधित बजट 2026-27 में इस कार्यक्रम के लिए ₹15 करोड़ का प्रावधान किया गया है।