संयुक्त राष्ट्र विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) ने चेतावनी दी है कि इस साल का सबसे तीव्र एल नीनो 49 मिलियन अतिरिक्त लोगों को तीव्र दुर्भिक्ष में धकेल सकता है। मौसमी बारिश में कमी और युद्ध‑प्रभावित क्षेत्रों की नाजुक स्थिति इस संकट को और बढ़ा रही है।
मुख्य बिंदु
- रिकॉर्ड एल नीनो 49 मिलियन लोगों को गंभीर भूख के जोखिम में डाल रहा है
- भारत सहित एशिया‑प्रशांत क्षेत्र में मानसून की कमी के कारण फसल उत्पादन घटेगा
- संयुक्त राष्ट्र की चेतावनी के बाद अंतर्राष्ट्रीय सहायता को तेज करने की मांग बढ़ी
संयुक्त राष्ट्र विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) ने एक अत्यंत गंभीर चेतावनी जारी की है, जिसमें बताया गया है कि इस साल का सबसे तीव्र एल नीनो 49 मिलियन अतिरिक्त लोगों को तीव्र दुर्भिक्ष में धकेल सकता है। यह चेतावनी विश्वभर में मौसमी बदलावों और जलवायु आपदाओं के बढ़ते प्रभाव को उजागर करती है।
एल नीनो, जो प्रशांत महासागर में गर्म जल प्रवाह के कारण उत्पन्न होता है, इस वर्ष ऐतिहासिक रूप से सबसे मजबूत दर्ज किया गया है। इससे दक्षिण एशिया, विशेषकर भारत में मानसून के समय में भारी कमी की आशंका है, जिससे फसल उत्पादन और जल संसाधनों पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: पिछले दशकों में एल नीनो के तीव्र चरणों ने कई बार वैश्विक खाद्य सुरक्षा को प्रभावित किया है। 1997‑98 के एल नीनो ने एशिया में व्यापक सूखा लाया, जिससे लाखों लोगों को भूख का सामना करना पड़ा। इस बार, जलवायु परिवर्तन के कारण एल नीनो की आवृत्ति और तीव्रता दोनों में वृद्धि देखी जा रही है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि यदि तत्काल अंतर्राष्ट्रीय सहायता नहीं की गई तो आर्थिक अस्थिरता, सामाजिक अशांति और शरणार्थी प्रवाह बढ़ सकता है। विशेषकर युद्ध‑प्रभावित क्षेत्रों में जहाँ खाद्य आपूर्ति पहले से ही बाधित है, एल नीनो का प्रभाव अत्यधिक विनाशकारी हो सकता है।
"एल नीनो के कारण उत्पन्न जलवायु जोखिम को कम करने के लिए वैश्विक स्तर पर समन्वित कार्रवाई आवश्यक है," कहा विशेषज्ञ डॉ. अनीता शर्मा, जलवायु नीति विश्लेषक।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: एल नीनो से भारत में किस प्रकार की फसल क्षति की संभावना है?
उत्तर: तेज़ी से घटती बरसात के कारण धान, गेंहू और मक्का की पैदावार में 20‑30% तक कमी आ सकती है।
प्रश्न 2: अंतर्राष्ट्रीय समुदाय इस संकट को कैसे संबोधित कर रहा है?
उत्तर: कई देशों ने WFP को अतिरिक्त फंडिंग और आपूर्ति प्रदान करने की वचनबद्धता की है, जबकि NGOs स्थानीय स्तर पर राहत कार्य तेज कर रहे हैं।