भारत के सुप्रीम कोर्ट ने सुरक्षित फुटपाथों पर चलने को एक मौलिक अधिकार घोषित किया है। यह फैसला उन करोड़ों भारतीयों के लिए एक बड़ी जीत है जो हर दिन असुरक्षित सड़कों पर संघर्ष करते हैं।
मुख्य बातें
- सुप्रीम कोर्ट ने सुरक्षित फुटपाथों पर चलने को 'मौलिक अधिकार' माना है।
- भारत में लगभग 4.5 करोड़ लोग रोजाना काम पर पैदल जाते हैं।
- शहरी क्षेत्रों में 63% यात्राएं पैदल की जाती हैं, फिर भी बुनियादी ढांचा बेहद खराब है।
- पैदल चलने वाले सड़क दुर्घटनाओं में सबसे बड़े शिकार हैं।
भारत में शहरों का विकास अक्सर चौड़ी सड़कों और फ्लाईओवर के माध्यम से मापा जाता है, लेकिन इस दौड़ में सबसे महत्वपूर्ण नागरिक—पैदल यात्री—पीछे छूट गए हैं। कोलकाता के व्यस्त बाजारों से लेकर गुरुग्राम की टूटी हुई सड़कों तक, पैदल चलना एक अधिकार नहीं बल्कि एक बाधा दौड़ जैसा महसूस होता है।
सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक हस्तक्षेप
जून में, भारत के सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक निर्णय देते हुए स्पष्ट किया कि निर्धारित फुटपाथों पर सुरक्षित रूप से चलने का अधिकार एक मौलिक अधिकार है। जस्टिस पीएस नरसिम्हा ने लिखा कि पैदल चलना जीवन से जुड़ी सबसे सरल मानवीय गतिविधि है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि फुटपाथ पर चलने का अधिकार किसी भी मोटर चालित वाहन के विशेषाधिकार से ऊपर है।
क्यों यह महत्वपूर्ण है?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारत की शहरी गतिशीलता का आधार पैदल यात्री ही हैं। आंकड़ों के अनुसार, लगभग 4.5 करोड़ लोग हर दिन काम पर पैदल जाते हैं, जबकि निजी कारों का उपयोग करने वालों की संख्या केवल 54 लाख है। पैदल चलना सबसे लोकतांत्रिक परिवहन का रूप है, लेकिन भारतीय शहरों ने इसे सबसे अधिक उपेक्षित किया है।
"पैदल चलना जीवन से अभिन्न रूप से जुड़ा हुआ है, और सड़कों पर सुरक्षित फुटपाथ प्रदान करना राज्य का कर्तव्य है।" - जस्टिस पीएस नरसिम्हा
वर्तमान स्थिति भयावह है। जहाँ फुटपाथ मौजूद हैं, वे या तो अतिक्रमण (encroachments) का शिकार हैं, या कचरे और निर्माण सामग्री से भरे हुए हैं। कई जगहों पर तो फुटपाथ इतने ऊंचे हैं कि वे सड़क से अलग-थलग महसूस होते हैं।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और सांख्यिकी
2011 के एक अध्ययन में पाया गया था कि भारतीय शहरों का बुनियादी ढांचा पैदल यात्रियों के लिए असुरक्षित है। CAI-Asia की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय शहरों का औसत 'वॉकबिलिटी स्कोर' 100 में से मात्र 47 है।
| विशेषता | पैदल यात्री (Pedestrians) | मोटर वाहन (Motor Vehicles) |
|---|---|---|
| दैनिक उपयोगकर्ता संख्या | ~4.5 करोड़ | ~54 लाख |
| शहरी यात्राओं में हिस्सा | 63% | न्यूनतम |
| सड़क सुरक्षा जोखिम | अत्यधिक उच्च | मध्यम |
पैदल यात्रियों की अनदेखी की भारी कीमत जान देकर चुकानी पड़ती है। स्वतंत्र अध्ययनों के अनुसार, सड़क दुर्घटनाओं में मरने वालों में पैदल यात्रियों की हिस्सेदारी 30-40% तक हो सकती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. क्या फुटपाथ पर चलना अब कानूनी अधिकार है?
हाँ, सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के अनुसार, सुरक्षित फुटपाथों पर चलने का अधिकार एक मौलिक अधिकार है।
2. भारत में पैदल यात्री कितने महत्वपूर्ण हैं?
भारत में लगभग 63% शहरी यात्राएं पैदल की जाती हैं, जो इन्हें सड़क उपयोगकर्ताओं का सबसे बड़ा समूह बनाती हैं।