कोच्चि में रो-रो फेरी के प्रोपेलर में फंसे पुराने मछली पकड़ने के जाल और रस्सियों से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए नगर निगम ने एक नई 'बायबैक' योजना का प्रस्ताव रखा है। हाल ही में एक बड़ी दुर्घटना के बाद यह कदम उठाया गया है।
मुख्य बातें
- कोच्चि नगर निगम पुराने मछली पकड़ने के उपकरणों के लिए बायबैक योजना शुरू कर सकता है।
- हाल ही में एक रो-रो फेरी का प्रोपेलर फेंकी गई रस्सियों के कारण जाम हो गया था।
- नगर निगम का लक्ष्य समुद्र में कचरा फेंकने की प्रवृत्ति को रोकना है।
- मईयर वी.के. मिनिमोल ने सुरक्षा के मद्देनजर कड़े कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।
कोच्चि में रो-रो (Roll-on Roll-off) सेवाओं के लिए समुद्री सुरक्षा एक गंभीर मुद्दा बन गई है। कोच्चि नगर निगम ने अब एक अनूठी योजना का प्रस्ताव दिया है, जिसके तहत पुराने मछली पकड़ने के जाल और अन्य संबंधित उपकरणों को वापस खरीदा जाएगा। इस कदम का उद्देश्य समुद्र में फेंके जाने वाले कचरे को कम करना है, जो फेरी के प्रोपेलर में फंसकर जानलेवा दुर्घटनाओं का कारण बन सकता है।
हालिया दुर्घटना और जोखिम
यह प्रस्ताव हाल ही में हुई एक डरावनी घटना के बाद आया है। मंगलवार, 4 अगस्त, 2026 की शाम को, विपेन से फोर्ट कोच्चि जा रही एक रो-रो फेरी का एक प्रोपेलर अचानक रुक गया। जांच में पता चला कि प्रोपेलर में फेंकी गई रस्सियों का एक बड़ा गुच्छा फंस गया था। इस वजह से नाव का नियंत्रण खो गया और वह समुद्र की लहरों के साथ बहने लगी। सौभाग्य से, मत्स्य पालन गश्ती दल और समुद्री प्रवर्तन टीम ने समय रहते नाव को खींचकर किनारे तक पहुँचाया।
BozokMedia विश्लेषण: क्यों है यह महत्वपूर्ण?
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह समस्या केवल कचरा प्रबंधन की नहीं, बल्कि सार्वजनिक परिवहन की सुरक्षा की है। समुद्र में फेंकी गई रस्सियाँ और जाल 'घोस्ट गियर' (Ghost Gear) का रूप ले लेते हैं, जो न केवल समुद्री जीवन को नुकसान पहुँचाते हैं, बल्कि इंजन और प्रोपेलर को पूरी तरह से ठप कर सकते हैं। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई, तो ऐसी दुर्घटनाएं यात्रियों की जान ले सकती हैं।
"हमें ऐसी योजना लाने के लिए मजबूर होना पड़ा है ताकि मछली पकड़ने के उपकरणों को लापरवाही से फेंकने के खिलाफ एक निवारक के रूप में काम किया जा सके। यह एक गंभीर मुद्दा है।" - मेयर वी.के. मिनिमोल
स्थानीय स्तर पर विवाद भी बढ़ रहे हैं। जहाँ एक ओर मत्स्य श्रमिक संघ का कहना है कि मछुआरे जाल नहीं फेंकते, वहीं विपेन-फोर्ट कोच्चि यात्री संघ ने नाव मरम्मत यार्डों पर कचरा पानी में फेंकने का आरोप लगाया है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
कोच्चि के जलमार्गों में रो-रो सेवाओं का उपयोग दशकों से यात्रियों और वाहनों के आवागमन के लिए किया जा रहा है। जैसे-जैसे यातायात बढ़ा है, समुद्र में मानवीय गतिविधियों और कचरे की मात्रा में भी वृद्धि हुई है, जिससे इंजन की खराबी और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. कोच्चि नगर निगम की बायबैक योजना क्या है?
यह योजना पुराने मछली पकड़ने के जाल और रस्सियों को वापस खरीदने की है ताकि उन्हें समुद्र में फेंकने के बजाय सुरक्षित रूप से निपटाया जा सके।
2. रो-रो फेरी के लिए मुख्य खतरा क्या है?
समुद्र में फेंकी गई रस्सियाँ और जाल प्रोपेलर में फंस जाते हैं, जिससे नाव का इंजन बंद हो सकता है और नाव समुद्र में बह सकती है।