राज्यसभा की स्वीकृति के साथ जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 अब कानून बन गया है। यह विधेयक विलंबित पंजीकरण को सख्त करता है और डिजिटल रिकॉर्ड‑कीपिंग को तेज़ करता है, जिससे भारत 99% पंजीकरण लक्ष्य के करीब पहुँच रहा है।

Key Takeaways

  • विधेयक ने विलंबित पंजीकरण के दंड को सख्त किया।
  • दो वर्ष से अधिक देर से पंजीकरण केवल प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट की अनुमति से।
  • भारत में जन्म व मृत्यु पंजीकरण दर 99% से अधिक पहुंची।

विधेयक की पारिती और पृष्ठभूमि

राज्यसभा की स्वीकृति के साथ ही संसद ने जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 को मंजूरी दे दी। यह विधेयक पहले ही लोकसभा में पारित हो चुका था और गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय द्वारा पेश किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य 1969 के मूल अधिनियम में आवश्यक संशोधन करना और समय पर पंजीकरण को प्रोत्साहित करना है।

मुख्य प्रावधान

नया विधेयक यह निर्धारित करता है कि यदि जन्म या मृत्यु की सूचना एक वर्ष से अधिक लेकिन दो वर्ष के भीतर दी जाती है, तो जिला मजिस्ट्रेट या उप‑विभागीय मजिस्ट्रेट की स्वीकृति से पंजीकरण किया जा सकता है। दो वर्ष से अधिक देर से पंजीकरण केवल प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश पर ही वैध माना जाएगा। यह प्रावधान संभावित दुरुपयोग को रोकने के लिए तैयार किया गया है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

जन्म पंजीकरण का कवरेज 2014 में 86.6% से बढ़कर 2024 में 99% से अधिक हो गया, जबकि मृत्यु पंजीकरण 72.5% से बढ़कर 99.4% तक पहुंच गया। 1969 के अधिनियम के बाद से पंजीकरण प्रणाली में कई सुधार हुए हैं, लेकिन इस नवीनतम संशोधन से डिजिटल रिकॉर्ड‑कीपिंग और समयबद्धता को और अधिक सुदृढ़ किया जाएगा।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that accurate vital statistics are crucial for effective governance, policy planning, and resource allocation. By tightening delayed registration rules, the government aims to eliminate data gaps and curb fraudulent manipulations.

"सटीक जन्म‑मृत्यु आँकड़े सार्वजनिक नीति की रीढ़ हैं," एक प्रमुख जनसंख्या विशेषज्ञ ने कहा।
Did You Know?: भारत ने 2024 में 99% जन्म पंजीकरण हासिल किया, जो विश्व स्तर पर सबसे अधिक दरों में से एक है।

Frequently Asked Questions

Q: यदि जन्म या मृत्यु की सूचना दो वर्ष से अधिक देर से दी जाए तो क्या होगा?
A: पंजीकरण केवल प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश पर ही संभव होगा, जिससे प्रक्रिया में अतिरिक्त जाँच होगी।

Q: डिजिटल पंजीकरण से रिकॉर्ड की सटीकता कैसे बढ़ेगी?
A: इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफ़ॉर्म डेटा को केंद्रीकृत और सुरक्षित बनाते हैं, जिससे त्रुटियों और दुरुपयोग की संभावना घटती है।