सुप्रीम कोर्ट ने खुद को घोषित धर्मगुरु आसाराम की अंतरिम जमानत याचिका को फिलहाल खारिज कर दिया है, हालांकि उन्हें अपनी पसंद का प्रशिक्षित देखभाल करने वाला नियुक्त करने की अनुमति दी गई है।
मुख्य बातें
- सुप्रीम कोर्ट ने स्वास्थ्य आधार पर आसाराम की अंतरिम जमानत याचिका को फिलहाल लंबित रखा है।
- अदालत ने आसाराम को 24 घंटे सहायता के लिए अपनी पसंद का प्रशिक्षित देखभाल करने वाला (caretaker) नियुक्त करने की अनुमति दी है।
- सॉलिसिटर जनरल ने आरोप लगाया कि आसाराम की ओर से तथ्यों को छुपाया गया।
- AIIMS के मेडिकल बोर्ड को आसाराम के स्वास्थ्य का आकलन करने का निर्देश दिया गया है।
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को 2013 के नाबालिग से यौन शोषण मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे स्वयंभू धर्मगुरु आसाराम की अंतरिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए फिलहाल राहत देने से इनकार कर दिया। हालांकि, अदालत ने मानवीय आधार पर उन्हें अपनी पसंद का एक प्रशिक्षित देखभाल करने वाला (caretaker) नियुक्त करने की अनुमति दे दी है, जो उनकी चौबीसों घंटे सहायता कर सके।
न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति पी.बी. वराले की पीठ ने आसाराम की स्वास्थ्य संबंधी आधार पर दायर याचिका को लंबित रखा है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि उनके स्वास्थ्य में अचानक गिरावट आती है, तो उनके वकील मामले का उल्लेख कर सकते हैं। सुनवाई के दौरान, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने तर्क दिया कि आसाराम की ओर से अदालत से यह महत्वपूर्ण तथ्य छुपाया गया कि उनके वकील ने पहले ही पैरोल के लिए आवेदन किया था।
यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह मामला कानूनी प्रक्रियाओं और कैदियों के स्वास्थ्य अधिकारों के बीच के संतुलन को दर्शाता है। जहाँ एक ओर सजा काट रहे अपराधी को मिलने वाली सुविधाओं पर सवाल उठते हैं, वहीं दूसरी ओर मानवाधिकारों और चिकित्सा सहायता की आवश्यकता भी सर्वोपरि है।
न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता और स्वास्थ्य संबंधी दावों की सत्यता सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है।
गौरतलब है कि राजस्थान उच्च न्यायालय ने 27 मई को आसाराम की सजा को बरकरार रखा था। उच्च न्यायालय ने 2013 के दुष्कर्म मामले में उनकी उम्रकैद की सजा को सही ठहराया था, हालांकि कुछ अन्य धाराओं से उन्हें बरी कर दिया गया था। वर्तमान में 85 वर्षीय आसाराम जोधपुर सेंट्रल जेल में बंद हैं।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
आसाराम को 25 अप्रैल, 2018 को उनके आश्रम में एक नाबालिग छात्रा के यौन शोषण के मामले में दोषी ठहराया गया था। उन्हें आईपीसी की विभिन्न धाराओं, पोक्सो (POCSO) अधिनियम और किशोर न्याय अधिनियम के तहत उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. क्या आसाराम को जमानत मिल गई है?
नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल उनकी अंतरिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया है।
2. अदालत ने उन्हें क्या विशेष अनुमति दी है?
अदालत ने उन्हें उनकी पसंद का एक प्रशिक्षित देखभाल करने वाला नियुक्त करने की अनुमति दी है।