बॉम्बे हाई कोर्ट के एक न्यायाधीश ने महाराष्ट्र विशेष सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम, 2025 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है। कांग्रेस और सीपीआई ने इस कानून को अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला बताया है।

मुख्य बिंदु

  • जस्टिस गौतम ए. अंखाड ने महाराष्ट्र विशेष सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम, 2025 से जुड़ी याचिकाओं की सुनवाई से खुद को अलग किया।
  • भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और सीपीआई ने कानून को 'मनमाना' और 'दमनकारी' बताते हुए चुनौती दी है।
  • याचिकाकर्ताओं का दावा है कि यह कानून UAPA और MCOCA जैसे मौजूदा कानूनों का अतिक्रमण करता है।

बॉम्बे हाई कोर्ट में सोमवार को एक महत्वपूर्ण कानूनी मोड़ आया जब जस्टिस गौतम ए. अंखाड ने महाराष्ट्र विशेष सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम, 2025 की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं की सुनवाई से खुद को अलग (Recuse) कर लिया। यह मामला एक्टिंग मुख्य न्यायाधीश रवींद्र घुगे की पीठ के समक्ष आया था, लेकिन जस्टिस अंखाड ने बिना कारण बताए इस मामले से हटने का निर्णय लिया।

यह विवाद उस कानून को लेकर है जो राज्य सरकार को कुछ संगठनों को 'गैरकानूनी' घोषित करने और उनकी संपत्तियों को जब्त करने की व्यापक शक्तियां देता है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (CPI) ने तर्क दिया है कि यह कानून सरकार को बिना किसी उचित नोटिस या सुनवाई के किसी भी संगठन को निशाना बनाने की अनुमति देता है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह कानून न केवल राज्य की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने का दावा करता है, बल्कि यह लोकतांत्रिक असहमति (Dissent) के लिए एक गंभीर खतरा भी पैदा कर सकता है। यदि यह कानून लागू रहता है, तो नागरिक समाज संगठनों और ट्रेड यूनियनों की आवाज को दबाया जा सकता है।

"जब सुरक्षा कानून न्यायिक समीक्षा की सीमा को पार कर जाते हैं, तो वे सुरक्षा के बजाय राज्य के नियंत्रण का साधन बन जाते हैं।"

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और कानूनी टकराव

महाराष्ट्र विधानसभा ने इस विधेयक को 10 जुलाई, 2025 को पारित किया था, जिसे बाद में विधान परिषद की मंजूरी मिली और 15 दिसंबर, 2025 को राष्ट्रपति की सहमति प्राप्त हुई। याचिकाकर्ताओं का मुख्य विरोध इस बात पर है कि यह कानून UAPA और MCOCA जैसे सख्त कानूनों के साथ ओवरलैप करता है, जिससे दुरुपयोग की संभावना बढ़ जाती है।

विशेषता महाराष्ट्र सुरक्षा अधिनियम 2025 UAPA/MCOCA
शक्तियां संगठनों को गैरकानूनी घोषित करना आतंकवाद और संगठित अपराध रोकना
प्रक्रिया तेजी से कार्रवाई, सीमित नोटिस स्थापित कानूनी प्रक्रिया
क्या आप जानते हैं?: न्यायिक प्रक्रिया में 'Recusal' का अर्थ है जब कोई न्यायाधीश किसी मामले की सुनवाई से खुद को इसलिए अलग कर लेता है क्योंकि उन्हें लगता है कि उनके निर्णय में निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है या कोई हितों का टकराव हो सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. महाराष्ट्र विशेष सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम, 2025 क्या है?
यह एक कानून है जो राज्य सरकार को वामपंथी चरमपंथी संगठनों और अन्य समूहों की 'गैरकानूनी गतिविधियों' को रोकने के लिए व्यापक अधिकार देता है।

2. कांग्रेस और सीपीआई ने इस कानून का विरोध क्यों किया है?
उनका तर्क है कि यह कानून बिना किसी उचित कानूनी प्रक्रिया के संगठनों को प्रतिबंधित करने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को दबाने की अनुमति देता है।