कई प्रमुख कंपनियां अब मूल्य नहीं, बल्कि पैक की मात्रा घटाकर लागत बढ़ा रही हैं। यह कदम उपभोक्ताओं के ग्रोसरी बिल पर फिर से असर डालेगा।

मुख्य बिंदु

  • कंपनियों ने कीमतों में 2‑5% की वृद्धि की।
  • अब पैक आकार घटाकर अतिरिक्त लागत जोड़ने की योजना।
  • उपभोक्ताओं को भविष्य में अधिक भुगतान करना पड़ेगा।

जून तिमाही में उद्योग ने औसतन 2‑5% कीमत बढ़ाई, जिससे उपभोक्ता पहले ही दबाव में थे। अब कई बड़े ब्रांड यह संकेत दे रहे हैं कि आगे की वृद्धि सिर्फ कीमतों से नहीं, बल्कि पैक की मात्रा घटाकर होगी।

श्रींकफ्लेशन (Shrinkflation) के रूप में जानी जाने वाली यह रणनीति, पैक में सामग्री कम कर कीमत स्थिर रखती है, जिससे उपभोक्ता अनजाने में अधिक खर्च करते हैं। बिस्किट, चाय, और अन्य दैनिक वस्तुओं के पैक आकार में छोटे‑छोटे बदलाव दिखे हैं।

इस परिवर्तन का सीधा असर ग्रोसरी बिल पर पड़ेगा; उपभोक्ताओं को समान उत्पाद के लिए अब अधिक भुगतान करना पड़ेगा, चाहे वह बिस्किट का छोटा पैक हो या चाय की कम मात्रा वाली बोतल।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

श्रींकफ्लेशन की प्रवृत्ति पिछले दो दशकों में वैश्विक स्तर पर तेज़ी से बढ़ी है। 1990 के दशक में भी सुपरमार्केट ने समान पैकेज में उत्पाद की मात्रा घटाकर कीमत स्थिर रखी थी, जिससे यह रणनीति अब नया नहीं रही।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows कि पैक आकार में कमी, उपभोक्ता भरोसे को कम करती है और दीर्घकालिक ब्रांड वफादारी को प्रभावित करती है।

"Shrinkflation से उपभोक्ता भरोसा कमजोर होता है," कहती हैं अर्थशास्त्री डॉ. आयशा खान।
Did You Know?: 1990 के दशक में भी सुपरमार्केट ने समान पैकेज में उत्पाद की मात्रा घटाकर कीमत स्थिर रखी थी।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: क्या पैक की मात्रा घटाने से कीमत कम नहीं होगी?

उत्तर: नहीं, कुल लागत वही रहती है; केवल मात्रा कम होती है, जिससे प्रति इकाई कीमत बढ़ती है।

प्रश्न 2: उपभोक्ता इस बदलाव से कैसे बच सकते हैं?

उत्तर: पैक आकार की तुलना करके बेहतर वैल्यू वाले ब्रांड चुनें या बड़े पैक खरीदने पर विचार करें।