दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश पर किए गए ऑडिट में खुलासा हुआ है कि राजधानी के सरकारी अस्पतालों में करोड़ों रुपये के आधुनिक चिकित्सा उपकरण बिना उपयोग के पड़े हैं, जिससे सार्वजनिक धन की भारी बर्बादी हुई है।
मुख्य बिंदु
- दिल्ली स्टेट कैंसर संस्थान में 15.42 करोड़ रुपये का मेडिकल साइक्लोट्रॉन अप्रयुक्त पड़ा है।
- 26 सरकारी अस्पतालों के ऑडिट में जनसंसाधनों की भारी बर्बादी का पता चला है।
- मैनपावर की कमी और जगह का अभाव उपकरणों के उपयोग न होने के मुख्य कारण बताए गए हैं।
दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा आदेशित एक हालिया ऑडिट ने राजधानी के सरकारी स्वास्थ्य ढांचे में एक गंभीर खामी को उजागर किया है। अदालत को बताया गया है कि करोड़ों रुपये की लागत से खरीदे गए अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरण अस्पतालों में बिना किसी उपयोग के धूल फांक रहे हैं। यह मामला तब सामने आया जब जस्टिस प्रतिभा सिंह और जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की बेंच ने 3 जुलाई को सभी सरकारी अस्पतालों को अपने अप्रयुक्त उपकरणों की रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया था।
कैंसर संस्थान में करोड़ों का नुकसान
सबसे चौंकाने वाला मामला दिल्ली स्टेट कैंसर संस्थान का है। यहाँ 2017 में लगभग 15.42 करोड़ रुपये (2.5 मिलियन डॉलर) की लागत से एक मेडिकल साइक्लोट्रॉन खरीदा गया था, जिसका उपयोग इमेजिंग और शोध के लिए किया जाता है। यह मशीन अप्रैल 2022 से बेकार पड़ी है। इसके अलावा, 1.3 मिलियन डॉलर का एक उन्नत इमेजिंग डिवाइस भी 'मूल्यांकन के अधीन' होने के कारण उपयोग में नहीं लाया जा रहा है। यहाँ तक कि जर्मनी से मुफ्त में मिला एक ग्रॉसिंग स्टेशन भी केवल इसलिए बेकार पड़ा है क्योंकि उसे लगाने के लिए अस्पताल में जगह नहीं है।
Why This Matters (यह क्यों महत्वपूर्ण है)
BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि एक प्रणालीगत विफलता है। जब एक तरफ दिल्ली की स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव है, वहीं दूसरी ओर करोड़ों के उपकरण केवल कागजों पर मौजूद हैं। यह दर्शाता है कि सरकारी खरीद प्रक्रिया में 'उपयोगिता योजना' (Utility Planning) का पूरी तरह अभाव है।
"सार्वजनिक धन का इस तरह दुरुपयोग करना न केवल वित्तीय अपराध है, बल्कि उन मरीजों के साथ अन्याय है जिन्हें इन आधुनिक सुविधाओं की सख्त जरूरत है।"
अन्य अस्पतालों की स्थिति
ऑडिट में शामिल 26 अस्पतालों में दीन दयाल उपाध्याय (DDU) अस्पताल और लोक नायक अस्पताल की स्थिति भी चिंताजनक है। DDU अस्पताल में सेव लाइफ फाउंडेशन द्वारा दान किया गया 94.82 लाख रुपये का ऑक्सीजन बफर टैंक कभी पाइपलाइन से जोड़ा ही नहीं गया। वहीं, कई नेत्र रोग उपकरण विशेषज्ञों की कमी के कारण बेकार पड़े हैं। लोक नायक अस्पताल में कोविड-19 के दौरान खरीदे गए सैकड़ों ऑक्सीजन कंसंट्रेटर और बीपप मशीनें अब केवल आवश्यकता पड़ने पर ही निकाली जाती हैं।
| अस्पताल | उपकरण | लागत (लगभग) | कारण |
|---|---|---|---|
| कैंसर संस्थान | मेडिकल साइक्लोट्रॉन | ₹15.42 करोड़ | मैनपावर की कमी |
| DDU अस्पताल | ऑक्सीजन बफर टैंक | ₹94.82 लाख | पाइपलाइन से न जुड़ना |
| होम्योपैथिक कॉलेज | अल्ट्रासाउंड मशीन | ₹19.08 लाख | रेडियोलॉजिस्ट का अभाव |
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: इन उपकरणों के उपयोग न होने का मुख्य कारण क्या है?
उत्तर: अधिकांश अस्पतालों ने मैनपावर (विशेषज्ञ डॉक्टरों और तकनीशियनों) की कमी, जगह का अभाव और रसायनों (reagents) की अनुपलब्धता को मुख्य कारण बताया है।
प्रश्न 2: हाई कोर्ट ने इस मामले में क्या रुख अपनाया है?
उत्तर: कोर्ट ने इसे 'सार्वजनिक संसाधनों की घोर बर्बादी' करार दिया है और सभी अस्पतालों से विस्तृत ऑडिट रिपोर्ट मांगी है।