दिल्ली के तीन प्रमुख लैंडफिल साइटों पर मानसून की बारिश ने बायोमाइनिंग कार्यों को बुरी तरह प्रभावित किया है, जिससे दशकों पुराने कचरे को साफ करने का लक्ष्य खतरे में पड़ गया है। ओखला और भलस्वा में कचरा प्रसंस्करण की गति में भारी कमी देखी गई है।
मुख्य बातें
- मानसून की बारिश के कारण ओखला, भलस्वा और गाजीपुर लैंडफिल में बायोमाइनिंग का काम धीमा हो गया है।
- ओखला में दैनिक उत्पादन 9,000 टन से घटकर मात्र 650 टन रह गया है।
- गीले कचरे के कारण मशीनें (ट्रोमेल) बार-बार खराब हो रही हैं, जिससे प्रक्रिया बाधित हो रही है।
- MCD ने दिसंबर तक लैंडफिल को पूरी तरह खत्म करने का लक्ष्य रखा है।
दिल्ली में मानसून की मूसलाधार बारिश ने नगर निगम (MCD) के कचरा प्रबंधन प्रयासों को एक बड़ी चुनौती दे दी है। शहर के तीन सबसे बड़े लैंडफिल साइटों—ओखला, भलस्वा और गाजीपुर—पर चल रही बायोमाइनिंग प्रक्रिया में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे दशकों पुराने 'लेगेसी वेस्ट' (पुराने कचरे) को साफ करने की समयसीमा आगे खिसकने की आशंका है।
MCD के डैशबोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, सबसे बुरा असर ओखला लैंडफिल पर पड़ा है। यहाँ बायोमाइनिंग का दैनिक उत्पादन, जो पहले 6,000 से 9,000 मीट्रिक टन प्रतिदिन के बीच रहता था, 3 से 11 अगस्त के बीच गिरकर मात्र 650 टन रह गया। इसी बीच, रोजाना लगभग 2,800 टन नया कचरा भी साइट पर पहुँच रहा है, जिससे सफाई की प्रगति शून्य के करीब पहुँच गई है।
क्यों पड़ी समस्या?
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, समस्या का मुख्य कारण बारिश से कचरे का गीला होना है। जब कचरा गीला हो जाता है, तो वह मशीनों (ट्रोमेल) में फंस जाता है और कचरे को अलग करने की प्रक्रिया को बाधित करता है। अधिकारियों का कहना है कि मशीनों को बार-बार साफ करना पड़ता है, जिससे उत्पादन का लक्ष्य हासिल करना लगभग असंभव हो जाता है।
भारी बारिश के कारण कचरा गीला होकर मशीनों में जमा हो जाता है, जिससे बायोमाइनिंग की दक्षता और गति दोनों ही नाटकीय रूप से कम हो जाती हैं।
भलस्वा और गाजीपुर की स्थिति भी चिंताजनक है। भलस्वा में प्रसंस्करण क्षमता 11,500 टन से घटकर 1,700 टन रह गई है, जबकि गाजीपुर में लक्ष्य 7,000 टन का था, लेकिन केवल 1,400 टन ही निकाला जा सका।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
दिल्ली के ये लैंडफिल 1980 के दशक से सक्रिय हैं। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के निर्देशों के बाद, MCD ने 2019 में वैज्ञानिक तरीके से कचरे को हटाने के लिए बायोमाइनिंग शुरू की थी। गाजीपुर का कचरे का पहाड़ लगभग 65 मीटर ऊंचा हो चुका है, जो शहर की एक बड़ी पर्यावरणीय समस्या बन गया है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. बायोमाइनिंग क्या है?
यह पुराने कचरे को वैज्ञानिक रूप से संसाधित करने की प्रक्रिया है जिसमें कचरे को अलग-अलग श्रेणियों (जैसे पुनर्चक्रण योग्य सामग्री और ईंधन) में विभाजित किया जाता है।
2. बारिश से काम क्यों रुकता है?
बारिश से कचरा गीला होकर भारी और चिपचिपा हो जाता है, जिससे मशीनें जाम हो जाती हैं।