ग्रेटर कैलाश के एम-ब्लॉक में 400 कारों की क्षमता वाली अत्याधुनिक ऑटोमेटेड पार्किंग सुविधा होने के बावजूद, लोग सड़क किनारे पार्किंग को ही प्राथमिकता दे रहे हैं। जानें क्या है इसके पीछे की असली वजह।

मुख्य बातें

  • जीके एम-ब्लॉक में 400 कारों की क्षमता वाला 8-मंजिला ऑटोमेटेड पार्किंग स्ट्रक्चर है।
  • लोग समय की बर्बादी और असुविधा के डर से सड़क किनारे पार्किंग करना पसंद करते हैं।
  • भारी बारिश और बिजली कटने जैसी समस्याओं ने भी जनता का भरोसा कम किया है।
  • विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर मार्केटिंग और साइनबोर्ड की कमी एक बड़ी समस्या है।

दक्षिण दिल्ली के पॉश इलाके ग्रेटर कैलाश (GK) 1 के एम-ब्लॉक में एक बड़ी विडंबना देखने को मिल रही है। यहाँ एक अत्याधुनिक, आठ-मंजिला ऑटोमेटेड पार्किंग सुविधा मौजूद है जिसमें लगभग 400 कारों को खड़ा करने की क्षमता है, लेकिन इसके बावजूद बाजार की सड़कें कारों से पटी रहती हैं।

शनिवार की शाम को जब आप एम-ब्लॉक बाजार पहुँचते हैं, तो आपको सड़कों पर गाड़ियों की लंबी कतारें दिखेंगी, जिससे यातायात बाधित होता है। ठीक इसी के पास करोड़ों की लागत से बनी पार्किंग सुविधा है, लेकिन ग्राहक इसे अपनाने के बजाय सड़क किनारे 'सरफेस पार्किंग' को ही चुन रहे हैं।

क्यों लोग इस सुविधा से कतरा रहे हैं?

स्थानीय खरीदारों का कहना है कि यह प्रक्रिया काफी थकाऊ है। एक नियमित ग्राहक के अनुसार, "अगर हमें जल्दी में कुछ सामान लेना है, तो ऑटोमेटेड पार्किंग में 5-10 मिनट गाड़ी खड़ी करने में और वापस लेने में बहुत समय लग जाता है। यह काफी मेहनत का काम है।"

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि सुविधा का उपयोग न होने के पीछे केवल समय ही नहीं, बल्कि तकनीकी विश्वसनीयता की कमी भी है। हाल ही में भारी बारिश के दौरान बिजली कटने और बेसमेंट में पानी भरने के कारण यह सुविधा कुछ दिनों के लिए बंद भी रही थी, जिससे लोगों का भरोसा डगमगा गया है।

"मल्टी-लेवल पार्किंग का उपयोग बढ़ाने के लिए प्रशासन को सुरक्षा और सुविधा का ठोस आश्वासन देना होगा, न कि केवल शुल्क वसूलना।"

क्या प्रशासन कर रहा है समाधान?

पूर्व परिवहन अधिकारी अनिल चिक्कारा का सुझाव है कि एमसीडी (MCD) को इस सुविधा की मार्केटिंग बेहतर करनी चाहिए और सुरक्षा (जैसे चोरी या डैमेज से बचाव) पर जोर देना चाहिए। साथ ही, बाजार में उचित साइनबोर्ड की कमी भी एक बड़ी बाधा है।

वार्ड पार्षद अंजुम मंडल ने एमसीडी से सड़क किनारे की पार्किंग को खत्म करने का आग्रह किया है ताकि इस आधुनिक ढांचे का सही उपयोग हो सके। हालांकि, एमसीडी का कहना है कि वे केवल प्रवेश और निकास द्वारों के पास की पार्किंग को सीमित करने पर विचार कर रहे हैं, क्योंकि सड़क किनारे की पार्किंग राजस्व का एक बड़ा स्रोत है।

क्या आप जानते हैं?: ऑटोमेटेड पार्किंग सिस्टम में ड्राइवर को केवल कार एक निश्चित स्थान पर छोड़नी होती है, और मशीन खुद उसे सुरक्षित स्लॉट में पहुंचा देती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. एम-ब्लॉक पार्किंग का शुल्क क्या है?
वर्तमान में, सड़क किनारे और ऑटोमेटेड पार्किंग दोनों के लिए शुल्क समान है: ₹20 प्रति घंटा और ₹100 पूरे दिन के लिए।

2. क्या बारिश में यह पार्किंग सुरक्षित है?
संचालक का दावा है कि उन्होंने जलभराव रोकने के लिए पंप और बैरियर लगाए हैं, लेकिन पिछले अनुभवों ने ग्राहकों को आशंकित किया है।