अमेरिकी आव्रजन और सीमा शुल्क प्रवर्तन (ICE) एजेंटों को अत्याधुनिक इलेक्ट्रिक शॉक दस्ताने देने की योजना बनाई जा रही है। इस तकनीक पर $10 मिलियन से $20 मिलियन खर्च होने की उम्मीद है, लेकिन इसके दुरुपयोग को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं।

मुख्य बातें

  • ICE एजेंटों के लिए 'GLOVE' तकनीक का उपयोग किया जाएगा।
  • इस परियोजना का अनुमानित बजट $10 मिलियन से $20 मिलियन के बीच है।
  • डिवाइस को सामान्य दस्ताने के रूप में पहना जा सकता है, जिसे बटन दबाकर सक्रिय किया जा सकता है।

अमेरिकी आव्रजन और सीमा शुल्क प्रवर्तन (ICE) ने अपने अधिकारियों को नई और विवादास्पद तकनीक से लैस करने की योजना बनाई है। ये उपकरण, जिन्हें GLOVE (जेनरेटेड लो आउटपुट वोल्टेज एमीटर) कहा जाता है, दिखने में सामान्य पेट्रोल दस्ताने जैसे हैं, लेकिन एक बटन दबाते ही ये बिजली का झटका देने में सक्षम हो जाते हैं।

तकनीकी विवरण और कार्यप्रणाली

इन दस्तानों की सबसे बड़ी विशेषता इनकी छिपी हुई क्षमता है। जब तक कोई अधिकारी सक्रिय रूप से विद्युत मोड को चालू नहीं करता, तब तक ये दस्ताने सामान्य सुरक्षात्मक दस्तानों की तरह कार्य करते हैं। हालांकि, संकट की स्थिति में, एक बटन दबाकर इन्हें 'इलेक्ट्रिक शॉक' डिवाइस में बदला जा सकता है, जिससे संदिग्धों को नियंत्रित करना आसान हो जाएगा।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह कदम कानून प्रवर्तन में तकनीक के बढ़ते दखल को दर्शाता है। जहां एक ओर यह अधिकारियों की सुरक्षा और संदिग्धों को कम घातक तरीके से काबू करने में मदद कर सकता है, वहीं दूसरी ओर, अत्यधिक बल प्रयोग और मानवाधिकारों के उल्लंघन की संभावनाओं ने बहस छेड़ दी है।

कानून प्रवर्तन में इस तरह के उपकरणों का उपयोग अत्यधिक सावधानी और सख्त प्रोटोकॉल की मांग करता है ताकि शक्ति का दुरुपयोग न हो।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा गैर-घातक हथियारों (Non-lethal weapons) का उपयोग दशकों से किया जा रहा है, लेकिन पहनने योग्य तकनीक (Wearable technology) का यह स्तर पहले कभी नहीं देखा गया है।

क्या आप जानते हैं?: 'GLOVE' तकनीक का उद्देश्य बल प्रयोग की तीव्रता को कम करना है, लेकिन यह शारीरिक संपर्क के दौरान अत्यधिक जोखिम भी पैदा कर सकती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. क्या ये दस्ताने घातक हैं? नहीं, इन्हें 'लो आउटपुट वोल्टेज' के लिए डिज़ाइन किया गया है, जिसका अर्थ है कि इनका उद्देश्य घातक नहीं बल्कि नियंत्रित करना है।

2. इस तकनीक पर कितना खर्च होगा? अनुमान है कि सरकार इस पर $10 मिलियन से $20 मिलियन के बीच खर्च करेगी।