अमरावती के डोमा शासकीय आश्रमशाला में रात में घुंघरू, हँसी और रोने की आवाज़ों की अफवाह ने 608 छात्रों को भयभीत कर दिया। स्वास्थ्य अधिकारी ने इसे मनोवैज्ञानिक कारण बताया, अफवाह फैलाने से बचने का आह्वान किया।
Key Takeaways
- भूत की अफवाह से 608 छात्र हॉस्टल छोड़ गए
- मनोचिकित्सक ने ‘सीवियर हिस्टीरिया’ की पुष्टि की
- स्वास्थ्य विभाग ने अफवाह न फैलाने की अपील की
महाराष्ट्र के अमरावती जिले के मेलघाट में स्थित डोमा शासकीय आश्रमशाला में रात के समय घुंघरू बजने, हँसी और रोने की आवाज़ों की शिकायतें आईं। इन आवाज़ों को लेकर छात्रों में भय का माहौल बन गया और अंततः 608 विद्यार्थियों (263 छात्र और 345 छात्राएँ) ने हॉस्टल छोड़कर घर लौटे।
स्कूल प्रशासन ने तुरंत मामले की जाँच शुरू की। प्रमुख अधिकारी संजय चौधरी ने बताया कि कुछ छात्राओं ने इन अजीब आवाज़ों को सुनने का दावा किया, जिसके बाद मनोचिकित्सक ने जांच की और ‘सीवियर हिस्टीरिया’ जैसे लक्षण पाए। यह स्थिति सामूहिक भय और मानसिक तनाव के कारण उत्पन्न हुई, न कि किसी अलौकिक घटना की वजह से।
Historical Background
भारत में पिछले दशकों में कई शैक्षणिक संस्थानों में समान अफवाहें फैली हैं, जैसे 2016 में उत्तराखंड के एक स्कूल में ‘भूत’ की खबरों से छात्रों का हड़बड़ी से निकास। ऐसी घटनाओं में अक्सर सामाजिक दबाव और मानसिक स्वास्थ्य की उपेक्षा प्रमुख कारण रही है।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that unchecked rumors in educational institutions can severely disrupt academic continuity and exacerbate mental health issues among youths, highlighting the urgent need for proactive counseling and rumor-control mechanisms.
"समूह में भय का प्रभाव अक्सर व्यक्तिगत मनोवैज्ञानिक लक्षणों को बढ़ा देता है, इसलिए तुरंत पेशेवर समर्थन आवश्यक है," कहा मनोवैज्ञानिक डॉ. रीता शर्मा ने।
Frequently Asked Questions
Q: क्या इस घटना में कोई वास्तविक अलौकिक गतिविधि पाई गई?
A: नहीं, स्वास्थ्य विभाग ने पुष्टि की है कि यह पूरी तरह से मनोवैज्ञानिक कारणों से उत्पन्न हुआ है।
Q: छात्रों की पढ़ाई पर इसका क्या असर पड़ेगा?
A: निरंतर काउंसलिंग और सुरक्षित वातावरण बनाए रखने से शैक्षणिक प्रभाव को न्यूनतम किया जा सकता है।