गुंटूर के पुराने क्षेत्र में मोंडिगेट ड्रेनेज सिस्टम के आधुनिकीकरण कार्य का शिलान्यास किया गया है। ₹6.23 करोड़ की इस परियोजना से 40-50 वर्षों से चली आ रही जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान होगा।

मुख्य बिंदु

  • मोंडिगेट ड्रेनेज सिस्टम के आधुनिकीकरण के लिए ₹6.23 करोड़ की राशि स्वीकृत।
  • क्षमता 30,000 लीटर से बढ़ाकर 50,000 लीटर की जाएगी।
  • पुराने गुंटूर के लगभग 50,000 परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा।
  • रेलवे फंड के माध्यम से इस महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे का विकास किया जा रहा है।

आंध्र प्रदेश के गुंटूर में एक ऐतिहासिक बुनियादी ढांचे के विकास की शुरुआत हुई है। केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री पेम्मासानी चंद्र शेखर और गुंटूर पूर्व के विधायक नसीर अहमद ने शुक्रवार को मोंडिगेट ड्रेनेज सिस्टम के आधुनिकीकरण के लिए आधारशिला रखी। रेलवे फंड से संचालित होने वाली इस ₹6.23 करोड़ की परियोजना का उद्देश्य शहर के पुराने हिस्सों में जल निकासी व्यवस्था को सुदृढ़ करना है।

वर्तमान में, यह ड्रेनेज आउटलेट लगभग 30,000 लीटर सीवेज संभालता है, लेकिन भारी बारिश के दौरान यह क्षमता कम पड़ जाती है, जिससे सीवेज और बारिश का पानी रिहायशी इलाकों में घुस जाता है। नए अपग्रेड के बाद, इसकी डिस्चार्ज क्षमता बढ़कर 50,000 लीटर हो जाएगी, जो पिछले 40 से 50 वर्षों से चली आ रही समस्या का अंत करेगी।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि शहरी क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे का अभाव न केवल स्वास्थ्य जोखिम पैदा करता है, बल्कि आर्थिक विकास में भी बाधा डालता है। गुंटूर जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में, जल निकासी का प्रभावी प्रबंधन स्वच्छता और नागरिक सुरक्षा के लिए अनिवार्य है। यह परियोजना न केवल शहरी निवासियों बल्कि आसपास के किसानों के लिए भी राहत लेकर आएगी।

ड्रेनेज सिस्टम का आधुनिकीकरण केवल इंजीनियरिंग का कार्य नहीं है, बल्कि यह सार्वजनिक स्वास्थ्य और शहरी जीवन की गुणवत्ता में सुधार का एक महत्वपूर्ण निवेश है।

परियोजना के तहत राजीव गृहकल्प, गोटला रोड, वेंकटरमा थिएटर और जियाउद्दीन नगर जैसे प्रमुख क्षेत्रों में कार्य किया जा रहा है। रेलवे के अतिरिक्त मंडल रेल प्रबंधक रमेश ने बताया कि यह बुनियादी ढांचा 25 घन मीटर से अधिक अतिरिक्त प्रवाह को संभालने के लिए अपग्रेड किया जाएगा। मानसून के बाद शेष कार्यों को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

पुराने गुंटूर में जल निकासी की समस्या दशकों पुरानी है। शहर के विस्तार के साथ, पुराने ड्रेनेज सिस्टम की क्षमता आधुनिक आबादी के बोझ को सहने में असमर्थ रही है, जिससे हर मानसून में बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती थी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. इस परियोजना की कुल लागत क्या है?
इस परियोजना की कुल लागत ₹6.23 करोड़ है, जो रेलवे फंड से प्रदान की जा रही है।

2. इस सुधार से कितने लोगों को लाभ होगा?
इस परियोजना से पुराने गुंटूर के लगभग 50,000 परिवारों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।

क्या आप जानते हैं?: गुंटूर में ड्रेनेज क्षमता को बढ़ाने से न केवल जलभराव रुकेगा, बल्कि इससे स्थानीय कृषि भूमि को भी दूषित पानी से सुरक्षा मिलेगी।