निजी मौसम पूर्वानुमान एजेंसी स्काईमेट ने 2026 के मानसून अनुमान को घटाकर 'सूखा' श्रेणी में डाल दिया है, जिससे कृषि क्षेत्र और खाद्य सुरक्षा पर गंभीर संकट मंडराने की आशंका है। एल नीनो के प्रभाव के कारण वर्षा में भारी गिरावट की उम्मीद है।
- स्काईमेट ने मानसून 2026 के लिए -15% LPA (Long Period Average) का पूर्वानुमान लगाया है।
- सूखे की संभावना 70% तक बढ़ गई है, जिसका मुख्य कारण गहराता एल नीनो प्रभाव है।
- खरीफ बुवाई पिछले वर्ष की तुलना में 2% कम रही है, विशेषकर चावल की खेती प्रभावित हुई है।
- कर्नाटक, झारखंड और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में धान की बुवाई में 3.65% की गिरावट दर्ज की गई है।
भारत की प्रमुख मौसम पूर्वानुमान एजेंसी स्काईमेट (Skymet) ने वर्ष 2026 के मानसून सत्र के लिए एक चिंताजनक चेतावनी जारी की है। एजेंसी ने अपने पिछले अनुमानों को संशोधित करते हुए अब इसे 'सूखा' श्रेणी में रखा है। स्काईमेट के अनुसार, इस वर्ष औसत वर्षा (LPA) से 15% कम बारिश होने की संभावना है, जो भारतीय कृषि अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा झटका हो सकता है।
इस वर्षा की कमी का मुख्य कारण प्रशांत महासागर में सक्रिय एल नीनो (El Nino) घटना को माना जा रहा है। मौसम वैज्ञानिकों का विश्लेषण है कि एल नीनो का प्रभाव सितंबर तक बना रहेगा, जिससे मानसून की वापसी में देरी हो सकती है या बारिश के पैटर्न में भारी अनियमितता देखी जा सकती है। यह स्थिति न केवल सिंचाई प्रणालियों को प्रभावित करेगी बल्कि भूजल स्तर को भी गंभीर रूप से नीचे गिरा सकती है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारत की जीडीपी का एक बड़ा हिस्सा कृषि पर निर्भर है। जब मानसून विफल होता है, तो इसका सीधा असर ग्रामीण मांग और मुद्रास्फीति (Inflation) पर पड़ता है। चावल और अन्य खरीफ फसलों की बुवाई में गिरावट यह संकेत देती है कि आने वाले समय में खाद्य कीमतों में उछाल आ सकता है, जिससे आम उपभोक्ता की जेब पर असर पड़ेगा।
"मानसून में 15% की गिरावट केवल एक संख्या नहीं है, बल्कि यह करोड़ों किसानों की आजीविका और देश की खाद्य सुरक्षा के लिए एक गंभीर चेतावनी है।"
वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, खरीफ की कुल बुवाई पिछले साल के मुकाबले 2% कम रही है। विशेष रूप से धान (Paddy) की खेती में भारी गिरावट देखी गई है। कर्नाटक, झारखंड और महाराष्ट्र जैसे प्रमुख कृषि राज्यों में बारिश की कमी के कारण धान की बुवाई में 3.65% की कमी आई है। यह गिरावट मुख्य रूप से उन क्षेत्रों में देखी गई है जहाँ सिंचाई की सुविधाएँ सीमित हैं और किसान पूरी तरह मानसून पर निर्भर हैं।
| पैरामीटर | पिछले वर्ष का स्तर | 2026 का अनुमान/स्थिति |
|---|---|---|
| वर्षा अनुमान (LPA) | सामान्य/उपरोक्त | -15% (सूखा) |
| खरीफ बुवाई | 100% (आधार) | 2% की कमी |
| धान बुवाई (प्रमुख राज्य) | स्थिर | 3.65% की गिरावट |
ऐतिहासिक रूप से, भारत में जब भी एल नीनो प्रभावी रहा है, मानसून कमजोर रहा है। 2002 और 2009 जैसे वर्षों में भी इसी तरह की स्थिति देखी गई थी, जिसके परिणामस्वरूप देश को गंभीर सूखे और खाद्य संकट का सामना करना पड़ा था। सरकार को अब जल प्रबंधन और वैकल्पिक सिंचाई स्रोतों पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है।
Frequently Asked Questions
1. एल नीनो का भारतीय मानसून पर क्या प्रभाव पड़ता है?
एल नीनो आमतौर पर भारतीय उपमहाद्वीप में कम वर्षा का कारण बनता है, जिससे सूखे की स्थिति पैदा होती है।
2. किन राज्यों में धान की बुवाई सबसे अधिक प्रभावित हुई है?
कर्नाटक, झारखंड और महाराष्ट्र में बारिश की कमी के कारण धान की बुवाई में सबसे अधिक गिरावट आई है।