दिग्गज अभिनेता मुकेश खन्ना ने 'जन गण मन' को राष्ट्रगान के पद से हटाने और 'वंदे मातरम' को राष्ट्रगान बनाने की मांग कर एक नई बहस छेड़ दी है।
- मुकेश खन्ना ने 'जन गण मन' को हटाने और 'वंदे मातरम' को राष्ट्रगान बनाने की मांग की।
- दावा किया कि 'जन गण मन' ब्रिटिश राजशाही/क्वीन एलिजाबेथ के सम्मान में लिखा गया था।
- इस बयान के बाद ऐतिहासिक तथ्यों और राष्ट्रीय पहचान को लेकर विवाद शुरू हो गया है।
दिग्गज अभिनेता मुकेश खन्ना ने एक विवादास्पद बयान देकर देश के राष्ट्रीय प्रतीकों पर बहस छेड़ दी है। खन्ना का तर्क है कि 'जन गण मन', जो वर्तमान में भारत का राष्ट्रगान है, उसे हटाया जाना चाहिए और 'वंदे मातरम' को राष्ट्रगान का दर्जा दिया जाना चाहिए।
खन्ना का यह दावा है कि 'जन गण मन' भारत के लिए नहीं, बल्कि ब्रिटिश राजशाही, विशेषकर क्वीन एलिजाबेथ के सम्मान में लिखा गया था। उनका कहना है कि एक स्वतंत्र और लोकतांत्रिक देश में किसी विदेशी शासक की प्रशंसा में लिखा गया गीत राष्ट्रगान नहीं होना चाहिए।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, यह मांग भारत के औपनिवेशिक प्रतीकों से जुड़ी एक पुरानी वैचारिक बहस को फिर से जीवित करती है। खन्ना राष्ट्रीय पहचान को एक अधिक स्वदेशी और क्रांतिकारी प्रतीक—वंदे मातरम—की ओर मोड़ने का प्रयास कर रहे हैं, जिसने स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत के बीच का अंतर कानूनी है, लेकिन इन प्रतीकों का भावनात्मक महत्व अक्सर संवैधानिक कानूनों से ऊपर होता है।
ऐतिहासिक रूप से, 'जन गण मन' की रचना रवींद्रनाथ टैगोर ने की थी और इसे 24 जनवरी, 1950 को संविधान सभा द्वारा राष्ट्रगान के रूप में अपनाया गया था। वहीं, बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा रचित 'वंदे मातरम' को राष्ट्रगीत के रूप में अपनाया गया।
खन्ना के दावों की आलोचना करते हुए कई विशेषज्ञों का कहना है कि टैगोर की रचना भारत की भौगोलिक और सांस्कृतिक विविधता का उत्सव है, और इसे ब्रिटिश रानी के लिए लिखे जाने का दावा एक ऐतिहासिक गलतफहमी है जिसे बार-बार दोहराया जाता है।
| विशेषता | जन गण मन | वंदे मातरम |
|---|---|---|
| वर्तमान स्थिति | राष्ट्रगान | राष्ट्रगीत |
| रचयिता | रवींद्रनाथ टैगोर | बंकिम चंद्र चटर्जी |
| स्वीकृति वर्ष | 1950 | 1950 (गीत के रूप में) |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या 'जन गण मन' कानूनी रूप से राष्ट्रगान है?
हाँ, इसे 24 जनवरी, 1950 को भारत की संविधान सभा द्वारा आधिकारिक तौर पर अपनाया गया था।
क्या 'वंदे मातरम' को समान दर्जा प्राप्त है?
हाँ, भारत सरकार ने 'वंदे मातरम' को राष्ट्रगान के समान दर्जा प्रदान किया है।