गुड़गांव की एक अदालत ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के कथित 'आपत्तिजनक' वीडियो की फॉरेंसिक रिपोर्ट में हेरफेर के मामले में तीसरे आरोपी पंकज यादव को जमानत दे दी है। कोर्ट ने पुलिस द्वारा संगठित अपराध की धाराओं के दुरुपयोग पर कड़ी टिप्पणी की है।
- गुड़गांव कोर्ट ने साइबर यान के मालिक पंकज यादव को नियमित जमानत प्रदान की।
- अदालत ने कहा कि पुलिस ने बिना ठोस सबूतों के भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 111 (संगठित अपराध) का इस्तेमाल किया।
- मामले के तीनों आरोपी अब जमानत पर बाहर हैं।
- पंजाब पुलिस के दो वरिष्ठ अधिकारियों पर दबाव बनाने और रिश्वत देने के आरोप हैं, लेकिन उनसे पूछताछ नहीं हुई है।
गुड़गांव की एक अदालत ने सोमवार को पंकज यादव को नियमित जमानत दे दी, जो पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के एक कथित आपत्तिजनक वीडियो की फॉरेंसिक रिपोर्ट में हेरफेर करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। यादव दिल्ली के तिलक नगर स्थित 'साइबर यान' प्रशिक्षण केंद्र का मालिक है, जिसका उपयोग कथित तौर पर यह रिपोर्ट तैयार करने के लिए किया गया था कि वीडियो AI-जनरेटेड था।
इस पूरे विवाद की शुरुआत जून में हुई जब सिरसा के एक डिजिटल फॉरेंसिक कर्मचारी जसप्रीत सिंह ने शिकायत दर्ज कराई। सिंह का आरोप था कि पंजाब पुलिस के दो वरिष्ठ अधिकारियों ने उसे गुड़गांव के एक होटल में बुलाकर 10 लाख रुपये दिए और दबाव डाला कि वह ऐसी रिपोर्ट तैयार करे जिससे यह साबित हो कि वीडियो में दिख रहा व्यक्ति मुख्यमंत्री भगवंत मान नहीं है और वह वीडियो छेड़छाड़ किया हुआ (Manipulated) है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह मामला न केवल राजनीतिक छवि प्रबंधन (Image Management) से जुड़ा है, बल्कि यह जांच एजेंसियों द्वारा नए कानूनों (BNS) के उपयोग के तरीके पर भी सवाल उठाता है। जब पुलिस बिना प्राथमिक साक्ष्यों के 'संगठित अपराध' जैसी गंभीर धाराओं का उपयोग करती है, तो यह न्यायिक प्रक्रिया के प्रति अविश्वास पैदा करता है।
"बिना कानूनी रूप से स्वीकार्य साक्ष्यों के, राज्य किसी संदिग्ध को केवल सबूत खोजने के लिए हिरासत में नहीं ले सकता; यह कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है।"
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुदीप गोयल ने मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस की कार्यप्रणाली की कड़ी आलोचना की। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पुलिस ने बिना किसी आधार के भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 111 लागू की है। न्यायाधीश ने कहा कि राज्य किसी संदिग्ध को 'चारा' (Bait) बनाकर या बिना सबूत के गिरफ्तार करके उससे जानकारी नहीं निकलवा सकता।
जांच में यह बात सामने आई है कि होटल के सीसीटीवी फुटेज, गेस्ट लॉग और बिलों के माध्यम से पंजाब पुलिस के एक डीआईजी और एक एसपी की संलिप्तता के संकेत मिले हैं, जिन्हें शिकायत में 'बड़े साहब' कहा गया है। हालांकि, हरियाणा पुलिस ने अभी तक इन वरिष्ठ अधिकारियों को पूछताछ के लिए नहीं बुलाया है।
इससे पहले, पुलिस ने साइबर विशेषज्ञों अंकित और अरुण महेंद्रू को गिरफ्तार किया था, जिन्हें पहले ही जमानत मिल चुकी है। कोर्ट ने पाया कि पंकज यादव का पिछला कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और जब तक फॉरेंसिक लैब (FSL) की रिपोर्ट नहीं आती, तब तक रिपोर्ट को जाली नहीं माना जा सकता।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: पंकज यादव कौन है और उसे क्यों गिरफ्तार किया गया था?
पंकज यादव दिल्ली के 'साइबर यान' केंद्र का मालिक है। उस पर आरोप था कि उसने मुख्यमंत्री भगवंत मान के वीडियो को AI-जनरेटेड बताने वाली एक फर्जी फॉरेंसिक रिपोर्ट तैयार करने में मदद की।
प्रश्न 2: कोर्ट ने पुलिस की किस बात पर आपत्ति जताई?
कोर्ट ने इस बात पर आपत्ति जताई कि पुलिस ने बिना किसी ठोस सबूत के इस मामले में 'संगठित अपराध' (Section 111 BNS) की गंभीर धाराएं जोड़ी थीं।