कर्नाटक उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (GBA) के अंतर्गत आने वाले नगर निगम बिल्डिंग प्लान की मंजूरी के बाद ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (OC) जारी करने के लिए नई शर्तें नहीं लगा सकते। कोर्ट ने इसे संपत्ति के अधिकार का उल्लंघन माना है।
- नगर निगम बिल्डिंग प्लान मंजूरी के बाद OC के लिए नई शर्तें नहीं लगा सकते।
- सड़क चौड़ीकरण के लिए जमीन छोड़ने की शर्त को 'पोस्ट फैक्टो' (बाद की) शर्त मानकर खारिज किया गया।
- कोर्ट ने अनुच्छेद 300A के तहत संपत्ति के अधिकार पर जोर दिया।
कर्नाटक उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में यह व्यवस्था दी है कि ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (GBA) के अधीन नगर निगम उन शर्तों को लागू नहीं कर सकते जो निर्माण योजना (बिल्डिंग प्लान) की मंजूरी के समय नहीं दी गई थीं। यह मामला विशेष रूप से ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (OC) जारी करने के दौरान सड़क चौड़ीकरण के लिए जमीन छोड़ने (relinquishing land) की मांग से जुड़ा था।
मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस बी.एम. श्याम प्रसाद ने कहा कि 'पोस्ट फैक्टो' यानी बाद में लगाई गई शर्तों पर जोर नहीं दिया जा सकता। यदि ऐसी शर्तें लागू करनी हैं, तो कानून में इसके लिए एक विशिष्ट प्रावधान होना चाहिए। कोर्ट ने पाया कि न तो पुराने BBMP अधिनियम में और न ही वर्तमान ग्रेटर बेंगलुरु गवर्नेंस (GBG) अधिनियम में ऐसी किसी शर्त का प्रावधान है जो OC जारी करते समय जमीन छोड़ने की अनिवार्यता तय करे।
यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, यह फैसला उन हजारों संपत्ति मालिकों के लिए एक मिसाल बनेगा जो प्रशासनिक मनमानी का सामना करते हैं। अक्सर देखा गया है कि नगर निगम शुरुआती मंजूरी दे देते हैं, लेकिन जब मालिक OC के लिए आवेदन करता है, तो अधिकारी नई शर्तें जोड़ देते हैं, जिससे निर्माण कार्य कानूनी रूप से अधूरा रह जाता है।
"बिना कानूनी प्रक्रिया के किसी व्यक्ति को उसकी संपत्ति के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता, यह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 300A का मूल सिद्धांत है।"
इस विशिष्ट मामले में, याचिकाकर्ताओं से 765.46 वर्ग मीटर जमीन मुफ्त में छोड़ने को कहा गया था ताकि सड़क की चौड़ाई 24 मीटर से बढ़ाकर 45 मीटर की जा सके। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि प्रशासन कानून के तहत जमीन अधिग्रहित करना चाहता है, तो वह उचित प्रक्रिया अपनाए, लेकिन उसे OC रोकने का हथियार नहीं बनाना चाहिए।
अदालत ने निगम को निर्देश दिया है कि यदि निर्माण स्वीकृत योजना के अनुसार पूरा किया गया है, तो आठ सप्ताह के भीतर बिना किसी नई शर्त के OC जारी किया जाए। हालांकि, कोर्ट ने यह भी जोड़ा कि यह फैसला सरकार को भविष्य में कानूनी तरीके से जमीन अधिग्रहित करने से नहीं रोकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: क्या नगर निगम अभी भी सड़क चौड़ीकरण के लिए जमीन ले सकता है?
हाँ, लेकिन वे इसे OC जारी करने की शर्त नहीं बना सकते। उन्हें कानून के तहत उचित अधिग्रहण प्रक्रिया का पालन करना होगा।
प्रश्न 2: यह फैसला किन लोगों पर लागू होता है?
यह मुख्य रूप से ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (GBA) के अधिकार क्षेत्र में आने वाली संपत्तियों और समान कानूनी परिस्थितियों वाले मामलों के लिए एक मिसाल है।