कोर्ट्स एंड जस्टिस प्रोजेक्ट (CJP) के अभिजीत डिपके ने बॉम्बे हाई कोर्ट की भर्ती परीक्षा के प्रबंधन की कड़ी आलोचना करते हुए इसे 'पूर्ण अराजकता' करार दिया है और निष्पक्षता के लिए पुनः परीक्षा की मांग की है।

  • अभिजीत डिपके (CJP) ने बॉम्बे हाई कोर्ट की परीक्षा को 'पूर्ण अराजकता' बताया है।
  • प्रबंधन में गंभीर खामियों और प्रक्रियात्मक त्रुटियों के आरोप लगे हैं।
  • न्यायिक अखंडता बनाए रखने के लिए दोबारा परीक्षा कराने की औपचारिक मांग की गई है।

बॉम्बे हाई कोर्ट की भर्ती प्रक्रिया कोर्ट्स एंड जस्टिस प्रोजेक्ट (CJP) के प्रमुख सदस्य अभिजीत डिपके की तीखी टिप्पणियों के बाद जांच के घेरे में आ गई है। डिपके ने सार्वजनिक रूप से परीक्षा के संचालन को "पूर्ण अराजकता" बताया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि प्रशासनिक विफलताएं इतनी गहरी थीं कि परिणामों को विश्वसनीय या निष्पक्ष नहीं माना जा सकता।

रिपोर्ट्स के अनुसार, उम्मीदवारों को परीक्षा प्रक्रिया के दौरान कई बाधाओं का सामना करना पड़ा, जिसमें लॉजिस्टिक कुप्रबंधन से लेकर प्रश्नपत्र और मूल्यांकन चरणों में संभावित अनियमितताएं शामिल हैं। CJP, जो न्यायिक जवाबदेही और पारदर्शिता पर ध्यान केंद्रित करता है, का तर्क है कि अदालत द्वारा आयोजित परीक्षा में इस तरह की चूक न्यायपालिका में जनता के विश्वास को गंभीर रूप से चोट पहुँचाती है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि जब कानून को बनाए रखने वाली संस्था ही अपनी भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी रूप से चलाने में विफल रहती है, तो यह वैधता का संकट पैदा करता है। यह घटना न्यायिक कर्मचारियों की भर्ती में एक प्रणालीगत कमी को उजागर करती है, जिससे पता चलता है कि भाई-भतीजावाद या प्रशासनिक अक्षमता को रोकने के लिए बाहरी निरीक्षण आवश्यक हो सकता है।

"न्यायिक प्रणाली की अखंडता उसकी भर्ती की अखंडता से शुरू होती है; परीक्षा पर संदेह की कोई भी छाया पूर्ण रीसेट की आवश्यकता पैदा करती है।"

पुनः परीक्षा की मांग केवल उम्मीदवारों की सुविधा के बारे में नहीं है, बल्कि समान अवसर के कानूनी सिद्धांत के बारे में है। यदि उम्मीदवारों का एक वर्ग डिपके द्वारा वर्णित 'अराजकता' के कारण वंचित रहा, तो पूरी प्रक्रिया उच्च न्यायालयों में कानूनी चुनौती के प्रति संवेदनशील हो जाती है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

बॉम्बे हाई कोर्ट, भारत की सबसे पुरानी और प्रतिष्ठित अदालतों में से एक है, जिसका कठोर मानकों का एक लंबा इतिहास रहा है। हालांकि, हाल के वर्षों में, भारत भर के विभिन्न राज्य भर्ती बोर्डों को पेपर लीक और कुप्रबंधन के समान आरोपों का सामना करना पड़ा है, जिससे प्रतियोगी परीक्षाओं के डिजिटलीकरण और सुरक्षा पर देशव्यापी बहस छिड़ गई है।

क्या आप जानते हैं?: बॉम्बे हाई कोर्ट का अधिकार क्षेत्र महाराष्ट्र और गोवा राज्यों पर है, जिससे इसकी भर्ती प्रक्रियाएं दो प्रमुख क्षेत्रों के कानूनी प्रशासन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: अभिजीत डिपके कौन हैं?
अभिजीत डिपके कोर्ट्स एंड जस्टिस प्रोजेक्ट (CJP) से जुड़े एक कानूनी कार्यकर्ता हैं, जो न्यायिक पारदर्शिता के लिए समर्पित संगठन है।

प्रश्न 2: परीक्षा के संबंध में मुख्य मांग क्या है?
मुख्य मांग यह है कि बॉम्बे हाई कोर्ट वर्तमान परीक्षा को रद्द करे और सभी पात्र उम्मीदवारों के लिए निष्पक्ष रूप से दोबारा परीक्षा आयोजित करे।