कोयंबटूर कंज्यूमर कॉज (CCC) ने अविनाशी रोड पर बस शेल्टर के लिए आवंटित ₹2.64 करोड़ के कथित दुरुपयोग की जांच के लिए DVAC से गुहार लगाई है। आरोप है कि सरकारी फंड लेने के बावजूद शेल्टर का उपयोग निजी विज्ञापनों के लिए किया गया।
- अविनाशी रोड पर 32 बस बे और शेल्टर के लिए ₹2.64 करोड़ आवंटित किए गए थे।
- आरोप है कि सरकारी धन के उपयोग के बावजूद शेल्टर पर निजी विज्ञापन लगाए गए।
- कोयंबटूर कंज्यूमर कॉज ने DVAC से फंड के उपयोग और अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग की है।
तमिलनाडु के कोयंबटूर शहर में सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के निर्माण में वित्तीय अनियमितताओं का एक गंभीर मामला सामने आया है। कोयंबटूर कंज्यूमर कॉज (CCC) ने सतर्कता और भ्रष्टाचार विरोधी निदेशालय (DVAC) को एक याचिका सौंपी है, जिसमें अविनाशी रोड के दोनों ओर बनाए गए 32 बस बे और शेल्टर के निर्माण में हुए कथित भ्रष्टाचार की जांच की मांग की गई है।
मामले के विवरण के अनुसार, राजमार्ग विभाग ने अविनाशी रोड फ्लाईओवर परियोजना के हिस्से के रूप में इन शेल्टरों के लिए धन स्वीकृत किया था। 24 मार्च, 2025 को, विभाग ने निर्माण कार्य के लिए कोयंबटूर कॉर्पोरेशन को ₹2.64 करोड़ की राशि जारी की। हालांकि, CCC के सचिव के. कतिरमथियोन ने इस फंड के हस्तांतरण और इसके वास्तविक उपयोग पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि यह मामला केवल वित्तीय हेराफेरी का नहीं है, बल्कि सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) के नियमों के उल्लंघन का भी है। यदि सरकारी धन से निर्मित संपत्तियों का उपयोग निजी विज्ञापन एजेंसियों द्वारा लाभ कमाने के लिए किया जा रहा है, तो यह सीधे तौर पर राजस्व की चोरी और सरकारी नियमों का उल्लंघन है।
याचिका में यह आरोप लगाया गया है कि ये बस शेल्टर लगभग एक वर्ष तक वाणिज्यिक विज्ञापनों से ढके रहे। आमतौर पर, जब विज्ञापन एजेंसियां शेल्टर का खर्च उठाती हैं, तभी उन्हें विज्ञापन लगाने का अधिकार मिलता है। CCC ने सवाल किया है कि क्या यह संभव है कि सरकार से ₹2.64 करोड़ लेने के बाद भी इन शेल्टरों को निजी एजेंसियों द्वारा वित्तपोषित दिखाया गया या उनके व्यावसायिक उपयोग की अनुमति दी गई।
"सरकारी फंड का उपयोग सार्वजनिक सेवा के लिए होना चाहिए; यदि उसी संपत्ति से निजी लाभ कमाया जा रहा है, तो यह गंभीर प्रशासनिक विफलता और भ्रष्टाचार का संकेत है।"
CCC ने मांग की है कि DVAC इस बात की जांच करे कि क्या यह खर्च भारतीय सड़क कांग्रेस (IRC) के मानदंडों के अनुरूप था। साथ ही, यह भी पता लगाया जाए कि क्या राजमार्ग विभाग ने इन शेल्टरों के व्यावसायिक उपयोग के लिए अपनी सहमति दी थी या यह अधिकारियों की मिलीभगत का परिणाम है।
ऐतिहासिक रूप से, शहरी बुनियादी ढांचे के निर्माण में फंड का डायवर्जन एक बड़ी समस्या रही है। याचिकाकर्ता ने मांग की है कि यदि यह पाया जाता है कि राशि का उपयोग स्वीकृत उद्देश्य के लिए नहीं किया गया, तो पूरी राशि को सरकारी खाते में वापस जमा कराया जाए और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
Frequently Asked Questions
1. DVAC क्या है और इसकी भूमिका क्या है?
DVAC (निदेशालय सतर्कता और भ्रष्टाचार विरोधी) तमिलनाडु सरकार की एक एजेंसी है जो सरकारी कर्मचारियों द्वारा किए गए भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं की जांच करती है।
2. इस मामले में मुख्य विवाद क्या है?
मुख्य विवाद यह है कि सरकार ने बस शेल्टर के लिए ₹2.64 करोड़ दिए, लेकिन उन शेल्टरों पर निजी विज्ञापन लगे थे, जो आमतौर पर तब होता है जब निर्माण का खर्च निजी कंपनियां उठाती हैं।