दिल्ली सरकार पीडब्ल्यूडी (PWD) के तहत आने वाली पुरानी सरकारी कॉलोनियों को हाई-राइज इमारतों में बदलने जा रही है। इस सेल्फ-फाइनेंसिंग मॉडल के तहत रेजिडेंशियल के साथ-साथ कमर्शियल स्पेस भी विकसित किए जाएंगे।

  • ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) नीति के तहत सरकारी आवासों का पुनर्विकास।
  • पहले चरण में गुलाबी बाग, कल्याणवास (मयूर विहार) और बहापुर (डिफेंस कॉलोनी) को शामिल किया गया है।
  • सेल्फ-फाइनेंसिंग मॉडल: निजी बिक्री और कमर्शियल स्पेस से निर्माण लागत की वसूली होगी।
  • प्राप्त राजस्व का उपयोग आईटीओ (ITO) में नए दिल्ली सचिवालय परिसर के निर्माण के लिए किया जाएगा।

दिल्ली की सरकारी आवास कॉलोनियों का जल्द ही कायाकल्प होने वाला है। PWD मंत्री परवेश साहिब सिंह ने घोषणा की है कि सरकार पुराने फ्लैटों को ध्वस्त कर उनके स्थान पर बहुमंजिला इमारतों का निर्माण करेगी। यह कदम उन अधिकारियों की समस्या को दूर करने के लिए उठाया गया है जो खराब आवास सुविधाओं के कारण अक्सर स्थानांतरण (transfer) की मांग करते हैं।

यह पूरी योजना ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) नीति पर आधारित है। इस नीति के अनुसार, गुलाबी बाग और कल्याणवास जैसे क्षेत्रों में कुल क्षेत्रफल का लगभग 10% हिस्सा व्यावसायिक (commercial) उपयोग के लिए रखा जाएगा। सरकार अधिकतम फ्लोर एरिया रेशियो (FAR) का उपयोग करके ऊंची इमारतें बनाएगी, जिससे जमीन का अधिकतम लाभ मिल सके।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, यह केवल आवास परियोजना नहीं बल्कि एक रणनीतिक वित्तीय कदम है। केंद्र सरकार के GPRA मॉडल की तर्ज पर, दिल्ली सरकार बुनियादी ढांचे की लागत को करदाताओं के बजाय निजी बाजार पर स्थानांतरित कर रही है। इससे सरकार को अपनी संपत्तियों को आधुनिक बनाने और साथ ही आईटीओ स्थित नए दिल्ली सचिवालय के निर्माण के लिए धन जुटाने में मदद मिलेगी।

डिफेंस कॉलोनी के पास बहापुर में स्थित फ्लैटों की स्थिति अत्यंत जर्जर है, इसलिए यहाँ तत्काल पुनर्विकास की आवश्यकता है। लगभग 400 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना में 160 टाइप V और टाइप VI फ्लैट बनाए जाएंगे, जो पूरी तरह से आवासीय होंगे।

दिल्ली में सरकारी आवासों का वर्टिकल विकास मेगा-सिटी में जमीन की कमी को दूर करने और शहरी घनत्व को प्रबंधित करने की दिशा में एक वैश्विक दृष्टिकोण है।

निजी खिलाड़ियों के लिए निर्धारित फ्लैटों और कमर्शियल स्पेस को नीलामी के माध्यम से बेचा जाएगा। इसमें सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (PSUs), केंद्र सरकार या खुले बाजार से कोई भी उच्चतम बोली लगाने वाला व्यक्ति हिस्सा ले सकेगा।

स्थान नियोजित क्षेत्र विकास का प्रकार
गुलाबी बाग 2.25 करोड़ वर्ग फुट मिश्रित (आवासीय और व्यावसायिक)
कल्याणवास 70 लाख वर्ग फुट मिश्रित (आवासीय और व्यावसायिक)
बहापुर 4 लाख वर्ग फुट पूर्णतः आवासीय

इन तीन स्थानों के अलावा, सरकार ने प्रोबाइन रोड, तिमरपुर और विकास भवन सहित सात अन्य साइटों की पहचान की है। उत्तर दिल्ली की गुलाबी बाग और सिंदोरा कलां जैसी कॉलोनियों में लगभग 1,200 टाइप I, II और III क्वार्टर हैं, जिन्हें भविष्य में इसी मॉडल के तहत विकसित किया जाएगा।

क्या आप जानते हैं?: ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) का मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक परिवहन के आसपास सघन बस्तियां बसाना है ताकि निजी वाहनों पर निर्भरता कम हो और प्रदूषण घटे।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: सरकार इन महंगी इमारतों का खर्च कैसे उठाएगी?
यह एक सेल्फ-फाइनेंसिंग मॉडल है। निर्माण की लागत निजी डेवलपर्स को फ्लैट और व्यावसायिक स्थान बेचकर वसूल की जाएगी।

प्रश्न 2: पहले चरण में किन कॉलोनियों का विकास होगा?
पहले चरण में उत्तर दिल्ली का गुलाबी बाग, मयूर विहार का कल्याणवास और डिफेंस कॉलोनी के पास स्थित बहापुर शामिल हैं।