दिल्ली उच्च न्यायालय ने राजीव गांधी फाउंडेशन (RGF) को RTI अधिनियम के तहत 'सार्वजनिक प्राधिकरण' घोषित करने वाली 2011 की याचिका को खारिज कर दिया है।

  • दिल्ली हाईकोर्ट ने RGF को RTI के दायरे में लाने वाली 2011 की याचिका खारिज की।
  • जस्टिस स्वर्ण कांत ने याचिकाकर्ता की कई तारीखों पर अनुपस्थिति को आधार बनाया।
  • RGF ने तर्क दिया कि सरकारी फंडिंग कुल बजट का केवल 4% है।
  • केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) के 2010 के आदेश को बरकरार रखा गया।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए 2011 में दायर उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें राजीव गांधी फाउंडेशन (RGF) को सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत 'सार्वजनिक प्राधिकरण' (Public Authority) घोषित करने की मांग की गई थी। यह फैसला एक ऐसे कानूनी संघर्ष का अंत है जो एक दशक से अधिक समय से चल रहा था।

यह याचिका दिल्ली के वकील षणमुगा पाट्रो द्वारा दायर की गई थी, जिन्होंने केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) के 15 अक्टूबर 2010 के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें कहा गया था कि फाउंडेशन RTI अधिनियम के तहत 'सार्वजनिक प्राधिकरण' की श्रेणी में नहीं आता है। जस्टिस स्वर्ण कांत ने याचिका खारिज करते हुए टिप्पणी की कि याचिकाकर्ता कई तारीखों पर अदालत के समक्ष उपस्थित होने में विफल रहे।

कानूनी विवाद का मुख्य बिंदु

विवाद की शुरुआत 2009 में हुई थी जब श्री पाट्रो ने RTI अधिनियम के तहत RGF के संविधान, संशोधित उप-नियमों और संगठनात्मक ढांचे से संबंधित दस्तावेज मांगे थे। फाउंडेशन ने यह कहते हुए जानकारी देने से इनकार कर दिया कि वह एक निजी संस्था है। याचिकाकर्ता का तर्क था कि चूंकि फाउंडेशन को सरकारी फंडिंग मिलती है और वह व्यापक सार्वजनिक गतिविधियों में शामिल है, इसलिए इसे RTI के दायरे में लाया जाना चाहिए।

यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, यह निर्णय RTI अधिनियम की धारा 2(h) की सख्त व्याख्या को पुष्ट करता है। सरकारी फंडिंग के प्रतिशत और स्थापना के तरीके पर ध्यान केंद्रित करके, अदालत ने यह मिसाल कायम की है कि केवल सार्वजनिक गतिविधियों में शामिल होना या मामूली सरकारी अनुदान प्राप्त करना किसी निजी ट्रस्ट को स्वचालित रूप से सार्वजनिक प्राधिकरण नहीं बनाता।

भारत में RTI कार्यकर्ताओं के लिए 'सरकारी वित्त पोषित' और 'सरकारी नियंत्रित' संस्थाओं के बीच का अंतर सबसे बड़ी कानूनी चुनौती बना हुआ है।

कार्यवाही के दौरान, अदालत ने RGF को उसकी स्थापना से 2010-11 तक के वार्षिक ऑडिट खाते रिकॉर्ड पर रखने का निर्देश दिया था। हालांकि, फाउंडेशन के वकील ने तर्क दिया कि कुल फंडिंग में सरकारी योगदान केवल चार प्रतिशत है, जो RTI अधिनियम की धारा 2(h) के उद्देश्यों के लिए नगण्य है।

क्या आप जानते हैं?: RTI अधिनियम, 2005 भारतीय नागरिकों को किसी भी 'सार्वजनिक प्राधिकरण' से जानकारी मांगने की शक्ति देता है, जिससे शासन में पारदर्शिता बढ़ती है।
मानदंड याचिकाकर्ता का तर्क RGF का बचाव
फंडिंग सरकारी धन प्राप्त हुआ सरकारी फंडिंग केवल ~4% है
प्रकृति सार्वजनिक गतिविधियों में संलग्न सरकारी अधिसूचना द्वारा स्थापित नहीं
दर्जा 'सार्वजनिक प्राधिकरण' होना चाहिए निजी फाउंडेशन

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. RTI अधिनियम के तहत 'सार्वजनिक प्राधिकरण' क्या है? सार्वजनिक प्राधिकरण वह निकाय है जो संविधान, कानून या सरकारी अधिसूचना द्वारा स्थापित किया गया हो, या सरकार द्वारा स्वामित्व, नियंत्रित या पर्याप्त रूप से वित्त पोषित हो।

2. इस मामले में याचिका क्यों खारिज की गई? फंडिंग के तर्कों के अलावा, न्यायाधीश ने विशेष रूप से उल्लेख किया कि याचिकाकर्ता कई सुनवाई की तारीखों पर अदालत में उपस्थित नहीं हुए थे।