प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पंजाब के मार्कफेड टेंडरिंग और अधिकारियों के तबादलों में कथित हेरफेर का खुलासा किया है। एजेंसी ने पंजाब DGP को पत्र लिखकर एक आईएएस अधिकारी और निजी बिचौलिए की भूमिका की जांच के लिए FIR दर्ज करने की मांग की है।

  • ED ने पंजाब DGP से मार्कफेड टेंडर और अधिकारियों के तबादलों में 'व्हीलिंग-डीलिंग' के लिए FIR की मांग की है।
  • निजी व्यक्ति नितिन गोहल पर सरकारी अधिकारियों के तबादलों और गोपनीय दस्तावेजों को लीक करने का आरोप है।
  • जांच में एक महिला आईएएस अधिकारी और एक आईपीएस अधिकारी के नाम भी सामने आए हैं।

चंडीगढ़: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पंजाब सरकार के विभिन्न विभागों में चल रहे कथित भ्रष्टाचार और प्रभाव के खेल का पर्दाफाश किया है। एक आधिकारिक पत्र के माध्यम से, ED ने पंजाब के पुलिस महानिदेशक (DGP) गौरव यादव को सूचित किया है कि एक आईएएस (IAS) अधिकारी पंजाब राज्य सहकारी आपूर्ति और विपणन संघ लिमिटेड (MARKFED) की निविदा (टेंडर) प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा था।

यह मामला तब सामने आया जब ED ने मोहाली स्थित 'फोर्टेक वेब सॉल्यूशंस' और 'टेकलाइव सॉल्यूशंस' के संस्थापक नितिन गोहल के उपकरणों पर छापेमारी की। 7 से 10 मई, 2026 के बीच हुई इन छापेमारी में व्हाट्सएप चैट, कॉल रिकॉर्ड और गोपनीय दस्तावेज बरामद हुए, जिनसे पता चला कि गोहल एक बिचौलिए के रूप में काम कर रहा था। वह मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के एक अधिकारी और इच्छुक सरकारी अधिकारियों के बीच कड़ी का काम कर रहा था।

भ्रष्टाचार का जाल: तबादले और लाइसेंस

ED द्वारा साझा किए गए चैट ट्रांसक्रिप्ट के अनुसार, नितिन गोहल ने न केवल टेंडरों को प्रभावित किया, बल्कि अधिकारियों के तबादलों और पोस्टिंग में भी अपनी पहुंच का इस्तेमाल किया। पत्र में उल्लेख है कि एक महिला आईएएस अधिकारी को महिला एवं बाल विकास विभाग में विशेष पोस्टिंग दिलाने के लिए प्रयास किए गए थे। इसके अलावा, एक आईपीएस (IPS) अधिकारी, जो वर्तमान में एसएसपी के पद पर तैनात हैं, के माध्यम से हथियारों के लाइसेंस को फास्ट-ट्रैक कराने का मामला भी सामने आया है।

यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह मामला केवल व्यक्तिगत भ्रष्टाचार का नहीं, बल्कि प्रशासनिक ढांचे में गहरी पैठ बना चुके 'नेक्सस' का है। जब निजी व्यक्ति सरकारी नीतियों और गोपनीय फाइलों तक पहुंच बना लेते हैं, तो यह लोकतांत्रिक शासन और योग्यता (Meritocracy) पर सीधा प्रहार है। मार्कफेड जैसे महत्वपूर्ण संस्थान में टेंडरिंग प्रक्रिया के साथ छेड़छाड़ सीधे तौर पर सार्वजनिक धन के दुरुपयोग की ओर इशारा करती है।

“प्रशासनिक तंत्र में बिचौलियों की मौजूदगी सरकारी पारदर्शिता को पूरी तरह खत्म कर देती है, जिससे केवल वे ही लाभ उठाते हैं जिनके पास सत्ता के गलियारों में पहुंच है।”

ED की जांच में यह भी पाया गया कि पंजाब लोक सेवा आयोग (PPSC) के इंटरव्यूज को प्रभावित करने की कोशिश की गई थी। एक विशिष्ट मामला असिस्टेंट टाउन प्लानर के चयन से जुड़ा है, जहां उम्मीदवार के चयन के लिए बाहरी दबाव डाला गया था। इसके अतिरिक्त, फोर्टिफाइड राइस कर्नल्स (FRKS) की आपूर्ति के लिए टेंडर शर्तों को बदलने के प्रयास भी किए गए ताकि कुछ खास पार्टियों को लाभ पहुंचाया जा सके।

प्रभावित क्षेत्र कथित गतिविधि शामिल पक्ष
मार्कफेड (Markfed) टेंडर प्रक्रिया में हेरफेर IAS अधिकारी और बिचौलिया
प्रशासनिक पोस्टिंग तबादलों की गोपनीय सूची लीक CMO संपर्क और निजी एजेंट
PPSC इंटरव्यू चयन प्रक्रिया को प्रभावित करना उम्मीदवार और बिचौलिया

नितिन गोहल ने इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा है कि किसी की मदद करना या सिफारिश करना अपराध नहीं है, जब तक कि उसके लिए पैसे न लिए गए हों। हालांकि, ED का दावा है कि यह एक संगठित सिंडिकेट था जो नीति निर्धारण और प्रशासनिक निर्णयों को नियंत्रित कर रहा था।

क्या आप जानते हैं?: मार्कफेड पंजाब के सबसे महत्वपूर्ण सहकारी संगठनों में से एक है, जो राज्य में कृषि इनपुट और विपणन का प्रबंधन करता है, जिससे इसकी टेंडरिंग प्रक्रिया अत्यंत संवेदनशील होती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

प्रश्न 1: ED ने पंजाब DGP से क्या मांग की है?
ED ने जांच के आधार पर उन अधिकारियों और बिचौलियों के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की है जिन्होंने सरकारी कामकाज और टेंडरों को प्रभावित किया।

प्रश्न 2: इस मामले में नितिन गोहल की क्या भूमिका थी?
नितिन गोहल पर आरोप है कि वह मुख्यमंत्री कार्यालय और अधिकारियों के बीच बिचौलिए के रूप में काम कर रहा था और गोपनीय जानकारी लीक कर रहा था।