केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को एक विस्तृत पत्र लिखकर बेंगलुरु-मैसूर इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर (NICE) परियोजना में भारी अनियमितताओं का आरोप लगाया है और इसे सरकारी नियंत्रण में लेने की मांग की है।
- निस (NICE) रोड पर अवैध टोल संग्रह को तुरंत रोकने की मांग।
- परियोजना में फ्रेमवर्क एग्रीमेंट (FWA) और तकनीकी शर्तों का गंभीर उल्लंघन।
- हजारों किसानों को उचित मुआवजा न मिलने और भूमि अधिग्रहण में अनियमितता का आरोप।
- हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों के आधार पर परियोजना को सरकार द्वारा अधिग्रहित करने का सुझाव।
केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार को सात पृष्ठों का एक विस्तृत पत्र लिखकर बेंगलुरु-मैसूर इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर प्रोजेक्ट (BMICP), जिसे आमतौर पर निस (NICE) परियोजना के रूप में जाना जाता है, के प्रबंधन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कुमारस्वामी ने मांग की है कि राज्य सरकार को इस पूरी परियोजना को अपने नियंत्रण में ले लेना चाहिए और अवैध रूप से वसूले जा रहे टोल पर तत्काल रोक लगानी चाहिए।
पत्र में यह उल्लेख किया गया है कि निस कंपनी ने फ्रेमवर्क एग्रीमेंट (FWA) और प्रोजेक्ट टेक्निकल एग्रीमेंट (PTA) की शर्तों का खुलेआम उल्लंघन किया है। कुमारस्वामी ने तर्क दिया कि जब उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय ने पहले ही इस परियोजना में अनियमितताओं पर कड़ी टिप्पणी की है, तो सरकार को अब और देरी नहीं करनी चाहिए और एक नए कानून के माध्यम से इस परियोजना का अधिग्रहण कर लेना चाहिए।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows कि यह मामला केवल सड़क निर्माण का नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर भूमि घोटाले और प्रशासनिक विफलता का है। यदि सरकार इस परियोजना को अधिग्रहित करती है, तो यह न केवल टोल दरों में कमी ला सकता है, बल्कि उन हजारों किसानों को न्याय दिला सकता है जिन्होंने दशकों पहले अपनी जमीन खोई थी लेकिन उन्हें उचित मुआवजा नहीं मिला।
कुमारस्वामी ने पत्र में विस्तार से बताया कि 2003 और 2009 में किसानों से भूमि अधिग्रहित की गई थी, लेकिन आज तक मुआवजे का निर्धारण नहीं किया गया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जिस भूमि का उपयोग विशिष्ट उद्देश्यों के लिए किया जाना था, उसे कंपनी ने अन्य व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया है।
"निस परियोजना में पारदर्शिता का अभाव और कानूनी शर्तों का उल्लंघन राज्य के बुनियादी ढांचे के विकास में एक गंभीर बाधा बन गया है।"
भूमि आवंटन के आंकड़ों पर चर्चा करते हुए, पत्र में बताया गया कि मूल रूप से 20,193 एकड़ भूमि आवंटित की जानी थी, लेकिन कंपनी ने कानूनी दांव-पेच के जरिए इस आवंटन में हेरफेर किया। इसके अलावा, कमघट्टा में विस्थापितों के लिए प्रस्तावित आवास परियोजना को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है, जिससे कई परिवार बेघर हैं।
इसके अतिरिक्त, पत्र में पर्यावरण संबंधी चिंताओं को भी उठाया गया है। कर्नाटक उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की है कि झीलों और नालों जैसी सार्वजनिक संपत्तियों को निस कंपनी को सौंप दिया गया, जिससे बेंगलुरु और आसपास के क्षेत्रों के पारिस्थितिक संतुलन को भारी नुकसान पहुँचा है।
Frequently Asked Questions
1. एचडी कुमारस्वामी ने सीएम से मुख्य रूप से क्या मांग की है?
उन्होंने मांग की है कि निस रोड पर टोल संग्रह तुरंत बंद किया जाए और पूरी परियोजना को सरकारी नियंत्रण में लिया जाए।
2003-2009 के बीच भूमि अधिग्रहण के बावजूद कई किसानों को अभी तक उचित मुआवजा नहीं मिला है।