भारतीय रक्षा अनुसंधान एजेंसी ने दिव्यास्त्र MK3, एक स्वदेशी जेट इंजन चालित सुसाइड ड्रोन, की पहली सफल परीक्षण उड़ान की घोषणा की, जो स्वदेशी हथियार प्रणाली में एक बड़ा कदम है।
मुख्य बिंदु
- दिव्यास्त्र MK3 ने सफल परीक्षण किया
- पहले बार स्वदेशी जेट इंजन का उपयोग
- रक्षा तकनीक में स्वायत्तता बढ़ी
भारतीय रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने शुक्रवार को नई स्वदेशी सुसाइड ड्रोन, दिव्यास्त्र MK3 की पहली सफल परीक्षण उड़ान का प्रदर्शन किया। यह ड्रोन स्वदेशी जेट इंजन से सुसज्जित है और 15 किमी ऊँचाई पर 10 मिनट तक निरंतर उड़ान क्षमता दर्शाता है। परीक्षण स्थल उत्तराखंड के दुर्गा परीक्षण रेंज में आयोजित किया गया।
दिव्यास्त्र MK3 का विकास पिछले पाँच वर्षों में कई चरणों में किया गया, जिसमें पहले मॉडल दिव्यास्त्र MK1 और MK2 की सीमित क्षमताएँ शामिल थीं। यह नवीनतम संस्करण अधिक पावरफुल इंजन, बेहतर लक्ष्य निर्धारण प्रणाली और कम लागत वाली उत्पादन प्रक्रिया को जोड़ता है, जिससे भारत की रणनीतिक स्वायत्तता में वृद्धि होगी।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि स्वदेशी जेट इंजन से चलने वाला यह सुसाइड ड्रोन भारत को विदेशी आपूर्ति पर निर्भरता कम करने और त्वरित उत्तरदायित्व क्षमताओं को सुदृढ़ करने में मदद करेगा। यह तकनीकी प्रगति क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन को भी प्रभावित कर सकती है।
"दिव्यास्त्र MK3 का सफल परीक्षण भारत की रक्षा स्वायत्तता की दिशा में एक निर्णायक मोड़ है," कहते हैं रक्षा विशेषज्ञ प्रो. राघव शर्मा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: दिव्यास्त्र MK3 किस प्रकार के मिशन के लिए डिजाइन किया गया है?
उत्तर: यह मुख्यतः उच्च-प्रकाशित लक्ष्य को नष्ट करने के लिए सुसाइड (स्वयं विनाश) मिशन के लिए तैयार किया गया है।
प्रश्न 2: क्या यह ड्रोन व्यावसायिक उपयोग के लिए उपलब्ध होगा?
उत्तर: वर्तमान में यह केवल भारतीय सशस्त्र बलों के लिए ही विकसित किया गया है, भविष्य में निर्यात पर विचार किया जा सकता है।