उत्तर प्रदेश के झांसी में संपत्ति विवाद ने मानवीय संवेदनाओं को पीछे छोड़ दिया, जहां दो बेटों ने अपनी बहन से जमीन वापस न मिलने तक पिता के अंतिम संस्कार से इनकार कर दिया। करीब 35 घंटों के लंबे विवाद और प्रशासनिक बाधाओं के बाद मृतक का अंतिम संस्कार संपन्न हो सका।

  • झांसी के चिरगांव खुर्द में 2 बीघा जमीन को लेकर भाई-बहन के बीच विवाद।
  • बेटों ने जमीन की वापसी तक पिता के अंतिम संस्कार से इनकार कर दिया।
  • सर्वर डाउन और भारी बारिश के कारण अंतिम संस्कार में 35 घंटे की देरी।
  • पुलिस हस्तक्षेप के बाद समथर मुक्तिधाम में किया गया अंतिम संस्कार।

उत्तर प्रदेश के झांसी जिले से एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है जिसने रिश्तों की गरिमा और मानवीय मूल्यों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। समथर थाना क्षेत्र के चिरगांव खुर्द गांव में एक पिता का शव 35 घंटों तक घर की चौखट पर पड़ा रहा, क्योंकि उनके बेटे अपनी बहन के साथ जमीन के मालिकाना हक को लेकर उलझे हुए थे।

घटना की जड़ में 5 बीघा जमीन का बंटवारा था। मृतक ठाकुर दास कुशवाहा की तबीयत खराब होने पर उनकी दूसरी बेटी, अंगूरी, उन्हें अपने साथ ले गई और उनका इलाज कराया। इसी दौरान ठाकुर दास ने कृतज्ञता या आवश्यकतावश अपनी 2 बीघा जमीन अंगूरी के नाम कर दी थी। गुरुवार को ठाकुर दास की मृत्यु के बाद जब शव गांव पहुंचा, तो बेटों ने इसे स्वीकार करने से मना कर दिया।

विवाद और प्रशासनिक बाधाएं

बेटों का स्पष्ट कहना था कि जब तक बहन वह 2 बीघा जमीन वापस नहीं करती, वे अंतिम संस्कार नहीं करेंगे। अंततः बहन जमीन लौटाने को तैयार हुई, लेकिन किस्मत ने साथ नहीं दिया। जब पक्षकार मोठ स्थित रजिस्ट्रार कार्यालय पहुंचे, तो ओटीपी (OTP) न आने के कारण रजिस्ट्री नहीं हो सकी। अगले दिन फिर कोशिश की गई, लेकिन इस बार सरकारी सर्वर डाउन होने के कारण पूरी प्रक्रिया ठप रही।

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह मामला केवल एक पारिवारिक विवाद नहीं है, बल्कि ग्रामीण भारत में भूमि स्वामित्व के प्रति जुनून और कानूनी प्रक्रियाओं की धीमी गति का प्रतिबिंब है। जब पारिवारिक भावनाएं कानूनी कागजों के अधीन हो जाती हैं, तो ऐसे सामाजिक पतन देखने को मिलते हैं।

"संपत्ति विवादों का इस स्तर तक पहुंचना यह दर्शाता है कि समाज में नैतिक मूल्यों का स्थान अब भौतिक संपत्तियों ने ले लिया है।"

शुक्रवार देर शाम तक जब रजिस्ट्री नहीं हो पाई, तब जाकर बेटों ने अंतिम संस्कार की तैयारी की। हालांकि, तभी अचानक मूसलाधार बारिश शुरू हो गई। गांव में मुक्तिधाम की व्यवस्था न होने के कारण शव को 5 किलोमीटर दूर समथर मुक्तिधाम ले जाना पड़ा, जहां पुलिस की मौजूदगी में अंतिम संस्कार संपन्न हुआ।

क्या आप जानते हैं?: भारत में ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि विवाद नागरिक न्यायालयों में लंबित मामलों का एक बहुत बड़ा हिस्सा होते हैं, जिनमें अक्सर दशकों तक कानूनी लड़ाई चलती है।

1. अंतिम संस्कार में इतनी देरी क्यों हुई?
मुख्य कारण 2 बीघा जमीन का विवाद था, जिसे सुलझाने के लिए रजिस्ट्रार कार्यालय जाना पड़ा, लेकिन सर्वर डाउन और बारिश ने देरी बढ़ा दी।

2. पुलिस की इसमें क्या भूमिका रही?
समथर थाना प्रभारी अतुल राजपूत और उनकी टीम ने मौके पर पहुंचकर परिवार को समझाया और शांतिपूर्वक अंतिम संस्कार सुनिश्चित कराया।