UGC-NET परीक्षा में त्रुटियों के कारण दोबारा परीक्षा के फैसले ने विवाद खड़ा कर दिया है। CPI(M), CPI और CPI(ML) ने NTA की अक्षमता पर सवाल उठाते हुए राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) को पूरी तरह रद्द करने की मांग की है।

  • वामदलों ने NTA और NEP 2020 को शिक्षा प्रणाली की गिरावट का मुख्य कारण बताया।
  • UGC-NET के अंग्रेजी, वाणिज्य और समाजशास्त्र के पेपरों में त्रुटियां पाई गईं।
  • शिक्षा पर जीडीपी का 6% खर्च करने और राज्यों को अधिक नियंत्रण देने की मांग की गई।

नई दिल्ली में CPI(M), CPI और CPI(ML) ने एक संयुक्त मोर्चा बनाते हुए केंद्र सरकार की परीक्षा प्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। यह विवाद तब गहराया जब राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) ने जून 2026 की UGC-NET परीक्षा के तीन पेपरों में त्रुटियों के कारण पुनः परीक्षा (retest) की घोषणा की। वामदलों का तर्क है कि यह केवल एक तकनीकी गलती नहीं, बल्कि पूरी प्रणाली के भीतर मौजूद 'गहरे सड़न' का प्रमाण है।

CPI(M) के पोलित ब्यूरो ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि अंग्रेजी, वाणिज्य और समाजशास्त्र के प्रश्नपत्रों में गलतियां NTA की "घोर अक्षमता" को दर्शाती हैं। पार्टी ने स्पष्ट किया कि जब तक राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 लागू है, तब तक शिक्षा प्रणाली में सुधार संभव नहीं है, क्योंकि यह नीति शिक्षा के व्यवसायीकरण को बढ़ावा दे रही है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मुद्दा केवल एक परीक्षा की त्रुटि तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत के भविष्य के बौद्धिक नेतृत्व और शैक्षणिक विश्वसनीयता का संकट है। जब देश की सबसे बड़ी भर्ती और पात्रता परीक्षाएं विवादों में घिरती हैं, तो लाखों छात्रों का मानसिक तनाव बढ़ता है और सरकारी संस्थानों पर से भरोसा कम होता है। यह स्थिति 'विकसित भारत' के लक्ष्य के विपरीत खड़ी नजर आती है।

शिक्षा का केंद्रीकरण और निजीकरण छात्रों को केवल एक 'उत्पाद' बना रहा है, जिससे वास्तविक ज्ञान की जगह कोचिंग माफिया का बोलबाला हो गया है।

CPI महासचिव डी. राजा ने सरकार की 'विकसित भारत' की कल्पना पर प्रहार करते हुए कहा कि जिस देश के युवाओं का भविष्य अंधकारमय हो, वहां विकास की बात करना बेमानी है। उन्होंने कोठारी आयोग की सिफारिशों को याद दिलाते हुए मांग की कि सार्वजनिक शिक्षा पर खर्च को जीडीपी के 6% तक बढ़ाया जाना चाहिए और शिक्षा का प्रबंधन राज्य सरकारों को सौंपा जाना चाहिए।

वहीं, CPI (ML) लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने इसे एक व्यापक प्रणालीगत विफलता करार दिया। उन्होंने कहा कि केवल शिक्षा मंत्री का इस्तीफा पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि पूरे ढांचे का ओवरहॉल आवश्यक है। उन्होंने मांग की कि NTA को तुरंत भंग किया जाए क्योंकि यह अपनी बुनियादी जिम्मेदारियों को निभाने में विफल रहा है।

क्या आप जानते हैं?: कोठारी आयोग (1964-66) ने दशकों पहले सुझाव दिया था कि भारत को अपनी जीडीपी का 6% शिक्षा पर खर्च करना चाहिए, जिसे आज भी कई शिक्षाविद अनिवार्य मानते हैं।

Frequently Asked Questions

1. वामदल NTA को क्यों खत्म करना चाहते हैं?
वामदलों का मानना है कि NTA बार-बार परीक्षाओं में त्रुटियां कर रहा है और उसकी कार्यप्रणाली में पारदर्शिता की भारी कमी है।

2. NEP 2020 के खिलाफ मुख्य आपत्ति क्या है?
आरोप है कि NEP शिक्षा के केंद्रीकरण, व्यवसायीकरण और सांप्रदायीकरण को बढ़ावा देती है, जिससे कोचिंग माफिया का प्रभाव बढ़ा है।