तिरुनेलवेली के कुनथंकुलम पक्षी अभयारण्य के पास संचालित एक पत्थर खदान के खिलाफ ग्रामीणों ने मोर्चा खोल दिया है। विस्फोटों और धूल के कारण इस रामसर साइट के पारिस्थितिकी तंत्र को गंभीर खतरा पैदा हो गया है।
- कुनथंकुलम पक्षी अभयारण्य के 2 किमी के दायरे में पत्थर उत्खनन और विस्फोट जारी।
- उच्च तीव्रता वाले धमाकों और धूल से प्रवासी पक्षियों के आवास और भोजन (मछलियों) पर असर।
- सुप्रीम कोर्ट के 'इको सेंसिटिव ज़ोन' (ESZ) नियमों के उल्लंघन का आरोप।
तिरुनेलवेली के नानगुनेरी पंचायत संघ के अंतर्गत आने वाले पप्पूंकुलम के ग्रामीणों ने सोमवार को जिला कलेक्टर आनंद मोहन को एक याचिका सौंपी। ग्रामीणों का आरोप है कि कुनथंकुलम और कडांकुलम टैंकों के पास स्थित एक पत्थर खदान में किए जा रहे उच्च-तीव्रता वाले विस्फोटों ने इस अंतरराष्ट्रीय महत्व के पक्षी अभयारण्य के अस्तित्व को खतरे में डाल दिया है।
यह अभयारण्य हर साल भारत और विदेशों से आने वाले हजारों प्रवासी पक्षियों का घर होता है। ग्रामीणों के अनुसार, खदान में होने वाले धमाकों की गूंज 7 किलोमीटर दूर तक सुनाई देती है, जिससे पक्षी आतंकित होकर पलायन कर रहे हैं। इसके अलावा, विस्फोटों के बाद उड़ने वाली धूल हवा के जरिए टैंकों में जमा हो रही है, जिससे पानी प्रदूषित हो रहा है और मछलियां मर रही हैं, जो इन पक्षियों का मुख्य आहार हैं।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that the conflict between industrial mining and ecological conservation is reaching a breaking point in Tamil Nadu. The Koonthankulam sanctuary is a recognized Ramsar site, meaning it has global significance. Allowing quarrying within such proximity not only violates environmental norms but also threatens the local agrarian economy and biodiversity.
"The systemic failure to implement Eco-Sensitive Zone guidelines around Ramsar sites leads to irreversible loss of biodiversity and disrupts global migratory patterns."
ग्रामीणों ने तर्क दिया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, किसी भी अभयारण्य के 10 किमी के दायरे को 'इको सेंसिटिव ज़ोन' घोषित किया जाना चाहिए, जहाँ किसी भी प्रकार का उत्खनन प्रतिबंधित है। उन्होंने बताया कि ग्राम सभा की बैठकों में प्रस्ताव पारित करने और 2,000 से अधिक हस्ताक्षरों के अभियान के बावजूद प्रशासन ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।
इस विरोध प्रदर्शन के साथ-साथ, तमिलनाडु के सभी किसान संघों के समन्वय समिति के जिला सचिव डी. अब्राहम के नेतृत्व में किसानों ने रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों की बढ़ती कीमतों पर चिंता जताई और सरकार से कीमतों में कटौती या वैकल्पिक आजीविका की मांग की।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: कुनथंकुलम पक्षी अभयारण्य क्यों महत्वपूर्ण है?
यह एक रामसर साइट है जहाँ दुनिया भर से हजारों प्रवासी पक्षी आते हैं, जो इसे जैव विविधता का केंद्र बनाता है।
प्रश्न 2: ग्रामीणों की मुख्य मांग क्या है?
उनकी मुख्य मांग अभयारण्य के पास स्थित पत्थर खदान को पूरी तरह बंद करना है ताकि पर्यावरण और पक्षियों की रक्षा हो सके।