राजस्थान की 'पन्नाधाय बाल गोपाल योजना' में भारी आपूर्ति कमी और कथित कालाबाजारी ने लाखों बच्चों को पोषण से वंचित कर दिया है। जांच में सामने आया है कि सरकारी दूध पाउडर को व्यावसायिक मिठाई दुकानों पर बेचा जा रहा था।

  • पन्नाधाय बाल गोपाल योजना में राज्यव्यापी 58% आपूर्ति की कमी।
  • सरकारी दूध पाउडर को व्यावसायिक 'मावा' निर्माताओं को बेचने के आरोप।
  • गंभीर पोषण अंतराल: राजस्थान में पांच साल से कम उम्र के 33.3% बच्चे कम वजन के हैं।
  • 17 शैक्षिक जिलों में स्कूलों तक दूध की शून्य डिलीवरी दर्ज।

राजस्थान वर्तमान में एक गंभीर पोषण संकट का सामना कर रहा है क्योंकि राज्य की महत्वाकांक्षी स्कूली दूध योजना, पन्नाधाय बाल गोपाल योजना, पूरी तरह से चरमरा गई है। 65,000 सरकारी स्कूलों के 69 लाख से अधिक छात्रों को गर्म दूध उपलब्ध कराने के लिए बनाई गई यह योजना अब 58 प्रतिशत की भारी आपूर्ति कमी से जूझ रही है, जिससे यह स्वास्थ्य पहल केवल कागजों तक सीमित रह गई है।

शिक्षा विभाग के आंतरिक आंकड़ों से रसद (logistics) की विफलता की भयावह तस्वीर सामने आई है। हाल के तीन महीनों की अवधि के लिए आवश्यक 3,756.43 मीट्रिक टन स्किम्ड मिल्क पाउडर के मुकाबले केवल 1,573.81 टन की आपूर्ति की गई। यह लगभग 60% की विफलता दर है। अलवर, भरतपुर, उदयपुर, बीकानेर और कोटा जैसे प्रमुख जिलों में दूध का वितरण पूरी तरह से बंद हो गया है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह केवल एक प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि शासन और निगरानी की गहरी विफलता है। जब आवश्यक पोषण पूरक चोरी हो जाते हैं, तो राज्य केवल पैसा नहीं खोता, बल्कि एक पूरी पीढ़ी के संज्ञानात्मक और शारीरिक विकास से समझौता करता है। एक ऐसे राज्य में जहाँ बच्चों में 'स्टंटिंग' (नाटापन) पहले से ही एक समस्या है, इस योजना की विफलता स्थिति को और गंभीर बनाती है।

घोटाला तब और गहरा गया जब काले बाजार का खुलासा हुआ। जयपुर जिले के चिठवाड़ी गांव में पुलिस ने 3,000 किलोग्राम दूध पाउडर जब्त किया, जिस पर स्पष्ट रूप से लिखा था 'बिक्री के लिए नहीं—केवल स्कूल आपूर्ति के लिए'। आरोप है कि इस स्टॉक को व्यावसायिक मावा निर्माताओं को बेचा जा रहा था। जांचकर्ताओं ने पाया कि चोरी को छिपाने के लिए स्कूलों के उपस्थिति रिकॉर्ड में हेरफेर किया गया था।

पोषण-संवेदनशील संसाधनों का व्यावसायिक बाजार में डायवर्जन बाल अधिकारों का गंभीर उल्लंघन है और राज्य की अपने सबसे कमजोर नागरिकों के प्रति विफलता है।

इस अराजकता में खाद्य सुरक्षा का खतरा भी जुड़ गया है। नई खरीद में देरी के कारण, कुछ स्कूलों में पुराने स्टॉक का उपयोग किया जा रहा है। शिक्षा विभाग ने चेतावनी जारी की है कि दूध पाउडर का उपयोग करने से पहले एक्सपायरी डेट की जांच की जाए, क्योंकि जब्त किए गए कुछ स्टॉक की समय सीमा समाप्त हो चुकी थी।

राजनीतिक रूप से, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने वर्तमान भाजपा सरकार पर कल्याणकारी योजनाओं को जानबूझकर बाधित करने का आरोप लगाया है। वहीं, भजन लाल शर्मा सरकार के सामने यह बड़ा सवाल है कि आवंटन और वितरण के बीच इतना बड़ा अंतर कैसे आया। राजस्थान सहकारी डेयरी फेडरेशन (RCDF) इस पूरी विफलता के केंद्र में है।

पैमाना आवश्यक मात्रा वास्तविक आपूर्ति कमी %
दूध पाउडर (3-माह अवधि) 3,756.43 मीट्रिक टन 1,573.81 मीट्रिक टन ~58%
क्या आप जानते हैं?: NFHS-6 के अनुसार, राजस्थान में पांच साल के लगभग 29.6% बच्चे 'स्टंटेड' (नाटे) हैं, जिससे बाल गोपाल जैसी पोषण योजनाएं उनके विकास के लिए अनिवार्य हो जाती हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: पन्नाधाय बाल गोपाल योजना क्या है?
यह राजस्थान सरकार की एक योजना है जिसके तहत सरकारी स्कूलों के प्राथमिक और उच्च-प्राथमिक छात्रों को कुपोषण से लड़ने के लिए गर्म दूध दिया जाता है।

प्रश्न 2: दूध पाउडर को ब्लैक मार्केट में कैसे भेजा गया?
आरोप है कि अधिकारियों ने स्कूल उपस्थिति और खपत के रिकॉर्ड में हेरफेर किया ताकि कागजों पर दूध वितरण सही दिखे, जबकि वास्तव में इसे मिठाई की दुकानों को बेचा गया।