सुप्रीम कोर्ट में SHANTI एक्ट को चुनौती देते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने तर्क दिया कि एक नियामक संस्था और संचालक की भूमिका एक साथ निभाना हितों का टकराव है।
- प्रशांत भूषण ने तर्क दिया कि नियामक संस्थाएं अपने द्वारा नियंत्रित संस्थानों का संचालन नहीं कर सकतीं।
- मामला SHANTI एक्ट की वैधता और परमाणु दुर्घटनाओं में मुआवजे से संबंधित है।
- परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (AERB) की स्वतंत्रता पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
- बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) द्वारा लॉ यूनिवर्सिटी चलाने को भी गलत बताया गया है।
भारत के सर्वोच्च न्यायालय में सोमवार को एक महत्वपूर्ण कानूनी बहस छिड़ गई जब वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने नियामक संस्थाओं की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। मुख्य न्यायाधीश सूर्या कांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान, भूषण ने स्पष्ट रूप से कहा कि कोई भी नियामक (Regulator) उस संस्थान का संचालन नहीं कर सकता जिसकी निगरानी की जिम्मेदारी उस पर है।
यह मामला पूर्व नौकरशाह ई.ए.एस. शर्मा द्वारा दायर एक याचिका से जुड़ा है, जिसमें 'सस्टेनेबल हारनेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया' (SHANTI) एक्ट की वैधता को चुनौती दी गई है। इस याचिका का मुख्य केंद्र परमाणु दुर्घटनाओं की स्थिति में मुआवजे की व्यवस्था और सुरक्षा मानकों की निगरानी है।
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह मामला केवल परमाणु ऊर्जा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत के प्रशासनिक ढांचे में 'हितों के टकराव' (Conflict of Interest) के व्यापक सिद्धांत को चुनौती देता है। यदि एक ही संस्था नियम बनाती है और उन्हीं नियमों के तहत संचालित संस्थान को चलाती है, तो जवाबदेही पूरी तरह समाप्त हो जाती है।
भूषण ने अदालत को बताया कि परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (AERB) की स्वतंत्रता खतरे में है क्योंकि इसके सदस्यों की नियुक्ति उस चयन पैनल की सिफारिश पर होती है, जिसका गठन परमाणु ऊर्जा आयोग द्वारा किया जाता है। गौरतलब है कि परमाणु ऊर्जा आयोग स्वयं परमाणु ऊर्जा संयंत्रों का संचालन करता है।
नियामक की स्वतंत्रता लोकतंत्र की आधारशिला है; जब निरीक्षक ही संचालक बन जाता है, तो निगरानी केवल एक औपचारिकता रह जाती है।
अपनी दलील को पुख्ता करने के लिए, भूषण ने कानूनी शिक्षा के क्षेत्र का उदाहरण दिया। उन्होंने उल्लेख किया कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) कानूनी शिक्षा का नियामक होने के बावजूद एक लॉ यूनिवर्सिटी (गोवा में इंडिया इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ लीगल एजुकेशन एंड रिसर्च) चला रही है। उन्होंने अदालत को सूचित किया कि वे इस संबंध में एक अलग याचिका दायर करने की प्रक्रिया में हैं।
1. SHANTI एक्ट क्या है?
यह अधिनियम भारत में परमाणु ऊर्जा के टिकाऊ उपयोग और विकास से संबंधित है, जिसमें सुरक्षा और मुआवजे के प्रावधान शामिल हैं।
2. प्रशांत भूषण ने BCI का उदाहरण क्यों दिया?
यह दिखाने के लिए कि जब एक नियामक (BCI) खुद एक संस्थान (लॉ यूनिवर्सिटी) चलाता है, तो यह नियमों के निष्पक्ष कार्यान्वयन में बाधा डालता है।