स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) ने विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा अनुमति देने से इनकार करने के बावजूद पलयाड कैंपस में 'मजदूरी शी फेस्ट' का आयोजन कर राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है।
- SFI ने प्रशासन के इनकार के बावजूद कन्नूर विश्वविद्यालय के पलयाड कैंपस में 'मजदूरी शी फेस्ट' आयोजित किया।
- विश्वविद्यालय ने अपर्याप्त विवरण और बाहरी अतिथियों की जानकारी न होने का हवाला देते हुए अनुमति देने से मना किया था।
- SFI ने इसे राजनीतिक साजिश बताया, जबकि KSU ने SFI पर कैंपस संसाधनों पर कब्जा करने का आरोप लगाया।
एक साहसी कदम उठाते हुए, स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) ने सोमवार, 17 अगस्त को कन्नूर विश्वविद्यालय के पलयाड कैंपस के सेमिनार हॉल में 'मजदूरी शी फेस्ट' का आयोजन किया। यह कार्यक्रम विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा औपचारिक रूप से अनुमति देने से इनकार करने के बाद आयोजित किया गया।
रिपोर्टों के अनुसार, SFI कार्यकर्ताओं ने कथित तौर पर बिना किसी अनुमति के सेमिनार हॉल का ताला खोलकर कार्यक्रम शुरू किया। इस कार्यक्रम का उद्घाटन SFI की अखिल भारतीय संयुक्त सचिव आयशा घोष ने किया, जिनके आने की जानकारी विश्वविद्यालय अधिकारियों को आवेदन में नहीं दी गई थी।
विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से पलयाड कैंपस निदेशक सूरज एम. बशीर ने स्पष्ट किया कि अनुमति केवल प्रक्रियात्मक कारणों से नहीं दी गई थी। श्री बशीर के अनुसार, आवेदन में केवल "शी फेस्ट" का जिक्र था और कोई ब्रोशर या विस्तृत एजेंडा नहीं दिया गया था। उन्होंने जोर देकर कहा कि सेमिनार हॉल के उपयोग के लिए कुलपति या रजिस्ट्रार की पूर्व स्वीकृति अनिवार्य है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह घटना केवल एक प्रशासनिक चूक नहीं है, बल्कि केरल के शैक्षणिक संस्थानों में गहरी राजनीतिक ध्रुवीकरण को दर्शाती है। छात्र संगठनों और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच का यह टकराव अक्सर राज्य स्तर की राजनीतिक लड़ाई का प्रतिबिंब होता है।
"छात्र सक्रियता और प्रशासनिक कठोरता का मिलन अक्सर कैंपस गवर्नेंस को विफल कर देता है, जिससे शिक्षण संस्थान राजनीतिक अखाड़े में बदल जाते हैं।"
दूसरी ओर, SFI राज्य सचिवालय सदस्य टी.पी. अखिला ने प्रशासन के फैसले को "राजनीतिक रूप से प्रेरित" बताया है। उन्होंने दावा किया कि कुलपति का सीधा हस्तक्षेप असामान्य था और यह संकेत दिया कि आयशा घोष के जंतर-मंतर विरोध प्रदर्शनों में शामिल होने के कारण भाजपा और आरएसएस के दबाव में यह निर्णय लिया गया।
इस विवाद में केरल स्टूडेंट्स यूनियन (KSU) ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। KSU के जिला अध्यक्ष एम.सी. अतुल ने SFI पर "विक्टिम कार्ड" खेलने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि SFI अक्सर अन्य संगठनों के कार्यक्रमों को रोकने के लिए हॉल को पहले से बुक कर लेता है, जिससे KSU जैसे संगठनों को जगह नहीं मिल पाती।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कन्नूर विश्वविद्यालय ने कार्यक्रम की अनुमति क्यों नहीं दी?
विश्वविद्यालय ने कहा कि आवेदन में पर्याप्त विवरण नहीं थे और बाहरी प्रतिभागियों की उपस्थिति के बारे में सूचित नहीं किया गया था।
KSU ने SFI पर पाखंड का आरोप लगाया और कहा कि SFI खुद अन्य छात्र संगठनों के लिए कैंपस सुविधाओं का उपयोग कठिन बना देता है।