दिल्ली के मुख्य अग्निशमन अधिकारी ए.के. मलिक ने चेतावनी दी है कि शहर का 80% हिस्सा अनियोजित है और केवल 5% इमारतों के पास ही ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट हैं, जिससे आग लगने की स्थिति में खतरा बढ़ गया है।
- दिल्ली का 80% हिस्सा अनियोजित निर्माण का शिकार है।
- केवल 5% इमारतों के पास ही वैध ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट उपलब्ध हैं।
- अग्निशमन विभाग के पास वर्तमान में कर्मियों और स्टेशनों की भारी कमी है।
- आधुनिक घरों में आग फैलने का समय (Flashover window) घटकर मात्र 3-5 मिनट रह गया है।
नई दिल्ली के मुख्य अग्निशमन अधिकारी ए.के. मलिक ने एक चौंकाने वाले खुलासे में बताया है कि राष्ट्रीय राजधानी का लगभग 80% हिस्सा अनियोजित तरीके से विकसित हुआ है। उन्होंने चेतावनी दी कि दिल्ली की अग्नि सुरक्षा तैयारियां वर्तमान में केवल 'औसत' स्तर की हैं, जो शहर की बढ़ती जनसंख्या और जटिल शहरी बनावट के सामने अपर्याप्त साबित हो सकती हैं।
मलिक के अनुसार, दिल्ली के पास 1,000 से अधिक अनधिकृत कॉलोनियां हैं, जहाँ निर्माण कार्य अक्सर 1957 के बिल्डिंग बाय-लॉज़ का पालन नहीं करते हैं। इस अनियोजित विकास का सबसे गंभीर परिणाम यह है कि इन क्षेत्रों की इमारतों के पास अग्नि सुरक्षा मंजूरी (Fire Safety Clearance) नहीं होती है।
क्यों यह चिंता का विषय है?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि दिल्ली की बुनियादी संरचना और अग्नि सुरक्षा के बीच एक बड़ा अंतराल है। जहाँ एक ओर शहर का विस्तार तेजी से हो रहा है, वहीं दूसरी ओर सुरक्षा मानक पिछड़ रहे हैं। शहरी भीड़भाड़ और संकरी गलियां अग्निशमन वाहनों के पहुंचने में सबसे बड़ी बाधा बनी हुई हैं।
आधुनिक घरों में कम छत और सिंथेटिक सामग्री के बढ़ते उपयोग के कारण आग फैलने का समय 18 मिनट से घटकर अब केवल 3 से 5 मिनट रह गया है।
डेटा से पता चलता है कि 2024-25 के दौरान अग्निशमन विभाग द्वारा अटेंड किए गए 36,000 कॉल्स में से केवल 1% ही ऐसी इमारतों से थे जिनके पास विभाग द्वारा जारी अग्नि सुरक्षा प्रमाणपत्र था। यह दर्शाता है कि अधिकांश व्यावसायिक और आवासीय परिसर सुरक्षा मानकों को नजरअंदाज कर रहे हैं।
संसाधनों की भारी कमी
दिल्ली अग्निशमन सेवाओं की वर्तमान स्थिति और आवश्यकता के बीच का अंतर डरावना है। विभाग के पास वर्तमान में केवल 71 फायर स्टेशन हैं, जबकि 120 की आवश्यकता है। इसी तरह, 12,000 अग्निशमन कर्मियों की जरूरत के मुकाबले केवल 2,500 कर्मी ही तैनात हैं।
| विवरण | वर्तमान स्थिति | आवश्यकता |
|---|---|---|
| फायर स्टेशन | 71 | 120 |
| अग्निशमन कर्मी | ~2,500 | >12,000 |
| अनियोजित क्षेत्र | 80% | न्यूनतम |
भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए विभाग ने एक 25-वर्षीय प्रौद्योगिकी योजना का प्रस्ताव दिया है, जिसमें ड्रोन और कंप्यूटरीकृत डिस्पैच सिस्टम का उपयोग शामिल है। साथ ही, स्प्रिंकलर और फायर डिटेक्टरों को अनिवार्य बनाने से वार्षिक मौतों में 97% तक की कमी लाई जा सकती है।
Frequently Asked Questions
1. दिल्ली में आग लगने का मुख्य कारण क्या है?
अनियोजित निर्माण, संकरी गलियां, और बिल्डिंग बाय-लॉज़ का पालन न करना प्रमुख कारण हैं।
2. क्या स्प्रिंकलर लगाने से जान बचाई जा सकती है?
हाँ, विशेषज्ञों के अनुसार स्प्रिंकलर और डिटेक्टरों से आग से होने वाली मौतों में 97% तक की कमी आ सकती है।