भारत पेंशनर्स समाज (BPS) और AIDEF ने केंद्र सरकार से 8वें वेतन आयोग के 'शर्तों के संदर्भ' (ToR) में संशोधन करने का आग्रह किया है ताकि पेंशन और पारिवारिक पेंशन के पुनरीक्षण को स्पष्ट रूप से शामिल किया जा सके।

  • पेंशनर्स ने पेंशन पुनरीक्षण और पारिवारिक पेंशन को आयोग के कार्यक्षेत्र में शामिल करने की मांग की है।
  • AIDEF ने 'अनफंडेड कॉस्ट' (unfunded cost) शब्द को हटाने का आग्रह किया है।
  • 1 जनवरी 2026 से पहले सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों के लिए समानता की मांग।
  • पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली और स्वास्थ्य योजनाओं में सुधार की मांग भी शामिल है।

8वें वेतन आयोग के गठन के बाद से ही केंद्र सरकार के सेवानिवृत्त कर्मचारियों और उनके परिवारों के बीच अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाले आयोग ने अपने 18 महीने के कार्यकाल का आधा समय पूरा कर लिया है। अब, पेंशनर निकायों ने सरकार से आयोग के 'शर्तों के संदर्भ' (Terms of Reference - ToR) में महत्वपूर्ण बदलाव करने की मांग की है।

भारत पेंशनर्स समाज (BPS) और ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉइज फेडरेशन (AIDEF) ने औपचारिक रूप से मांग की है कि पेंशन पुनरीक्षण, पारिवारिक पेंशन और सेवानिवृत्त कर्मचारियों के बीच समानता को आयोग के एजेंडे में स्पष्ट रूप से शामिल किया जाए। पेंशनर्स का तर्क है कि वर्तमान ToR में पिछले पेंशनभोगियों के लिए पेंशन संशोधन और भविष्य के पेंशनभोगियों के साथ समानता का स्पष्ट उल्लेख नहीं है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मुद्दा केवल वेतन वृद्धि का नहीं है, बल्कि यह सेवानिवृत्त कर्मचारियों के सम्मान और उनकी वित्तीय सुरक्षा से जुड़ा है। यदि आयोग पेंशन संशोधन को अपने दायरे में शामिल नहीं करता है, तो लाखों बुजुर्ग पेंशनभोगी खुद को उपेक्षित महसूस कर सकते हैं, जिससे भविष्य में बड़े सामाजिक और राजनीतिक परिणाम हो सकते हैं।

पेंशन को केवल 'अनफंडेड लायबिलिटी' मानना सरकार की नैतिक जिम्मेदारी से बचने जैसा है।

AIDEF ने वित्त मंत्रालय और कैबिनेट सचिव को लिखे पत्रों में इस बात पर जोर दिया है कि पेंशन को 'गैर-अंशदायी पेंशन योजनाओं की अनफंडेड लागत' (unfunded cost of non-contributory pension schemes) के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनका कहना है कि सरकारी सेवा के माध्यम से अर्जित पेंशन एक अधिकार है, न कि केवल एक वित्तीय बोझ।

प्रमुख मांगों का विवरण

प्रमुख मांगपेंशनर्स की अपेक्षा
पेंशन पुनरीक्षणसभी मौजूदा पेंशनभोगियों को कवर किया जाए
पारिवारिक पेंशनपारिवारिक पेंशनभोगियों को स्पष्ट रूप से शामिल करें
पेंशन समानतापुराने और नए पेंशनभोगियों के बीच समानता सुनिश्चित करें
प्रभावी तिथि1 जनवरी, 2026 की पुष्टि हो
'अनफंडेड कॉस्ट'इस शब्दावली को हटाया या संशोधित किया जाए

BPS ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को लिखे पत्र में यह भी मांग की है कि 8वें वेतन आयोग के लाभ केवल कार्यरत कर्मचारियों तक सीमित न रहकर, केंद्रीय वित्त पोषित स्वायत्त निकायों और ग्राम डाक सेवकों (GDS) तक भी विस्तारित होने चाहिए। इसके अलावा, पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली और स्वास्थ्य योजनाओं में व्यापक सुधार की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई है।

आयोग की आगामी बैठकें चेन्नई, पुडुचेरी, चंडीगढ़ और जयपुर में आयोजित की जानी हैं। इन बैठकों में पेंशनर्स की इन मांगों पर क्या निर्णय लिया जाता है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।

Frequently Asked Questions

1. 8वां वेतन आयोग किसके नेतृत्व में काम कर रहा है?
8वां वेतन आयोग न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में काम कर रहा है।

2. पेंशनर्स की मुख्य मांग क्या है?
मुख्य मांग पेंशन पुनरीक्षण, पारिवारिक पेंशन का समावेश और पुराने व नए पेंशनभोगियों के बीच समानता सुनिश्चित करना है।

Did You Know?: पेंशनर्स का तर्क है कि पेंशन केवल एक खर्च नहीं, बल्कि सरकारी सेवा के बदले दिया जाने वाला एक अर्जित अधिकार है।