बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर स्वीकार किया है कि छात्र प्रदर्शनों के दौरान सीवान में AK-47 से फायरिंग हुई थी। सरकार ने बल प्रयोग के आरोपों को खारिज करते हुए प्रदर्शनों को हिंसक बताया है।

  • सीवान में एक कांस्टेबल द्वारा AK-47 से हवा में 4 राउंड फायरिंग की बात स्वीकार।
  • 22 से 25 जुलाई के बीच 69 FIR दर्ज और लगभग 500 प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी।
  • छपरा में हिंसा के दौरान कई प्रशासनिक अधिकारी और पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल।
  • दिल्ली पुलिस ने भी अत्यधिक बल प्रयोग के आरोपों से इनकार किया।

बिहार में NEET पेपर लीक के विरोध में हुए छात्र प्रदर्शनों और उसके बाद हुई पुलिसिया कार्रवाई का मामला अब सुप्रीम कोर्ट की दहलीज पर है। राज्य सरकार ने अदालत में एक विस्तृत हलफनामा दाखिल कर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। हालांकि सरकार ने व्यापक स्तर पर 'अत्यधिक बल प्रयोग' के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है, लेकिन कुछ गंभीर घटनाओं को स्वीकार किया है।

सरकार के अनुसार, 22 जुलाई से 25 जुलाई के बीच राज्य के विभिन्न हिस्सों में प्रदर्शन हिंसक हो गए थे। इस दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस को कड़े कदम उठाने पड़े, जिसके परिणामस्वरूप कुल 69 एफआईआर दर्ज की गईं और लगभग 500 लोगों को हिरासत में लिया गया। सरकार ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए उन 222 छात्रों को जमानत पर रिहा कर दिया जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था, जबकि नाबालिगों को बॉन्ड भरवाकर छोड़ा गया।

सीवान और छपरा की हिंसक घटनाएं

हलफनामे का सबसे चौंकाने वाला हिस्सा सीवान की घटना है। सरकार ने स्वीकार किया कि भीड़ में फंसने के बाद एक पुलिस कांस्टेबल ने अपनी AK-47 से हवा में चार राउंड फायरिंग की। हालांकि, सरकार का दावा है कि इसमें कोई घायल नहीं हुआ, लेकिन अनुशासनहीनता के चलते संबंधित जवान को निलंबित कर दिया गया है। इसी तरह, हाथी चौक पर एक ASI द्वारा 9 एमएम पिस्टल से दो राउंड फायरिंग की बात कही गई, जिसमें तीन प्रदर्शनकारियों को मामूली चोटें आईं।

छपरा की स्थिति और भी गंभीर थी, जहां प्रदर्शनकारियों के हमले में दो BDO, तीन इंस्पेक्टर और कई कांस्टेबल घायल हुए। एक BDO की आंख चली गई और दूसरे के सिर में गंभीर चोट आई, जो प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह मामला केवल कानून-व्यवस्था का नहीं बल्कि लोकतांत्रिक विरोध और पुलिसिया प्रतिक्रिया के बीच के संतुलन का है। जब राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट में AK-47 जैसी घातक हथियारों के उपयोग को स्वीकार करती है, तो यह पुलिस प्रशिक्षण और भीड़ नियंत्रण प्रोटोकॉल की विफलता को दर्शाता है। यह घटना भविष्य में छात्र आंदोलनों के प्रति पुलिस के दृष्टिकोण को प्रभावित कर सकती है।

"भीड़ नियंत्रण के लिए सैन्य-ग्रेड हथियारों का उपयोग, चाहे वह हवा में ही क्यों न हो, नागरिक अधिकारों और सुरक्षा मानकों का गंभीर उल्लंघन है।"

इस मामले में दिल्ली पुलिस ने भी अपना जवाब दाखिल किया है। दिल्ली पुलिस का दावा है कि 30 हजार प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए 5 हजार जवानों की तैनाती की गई थी। पुलिस के मुताबिक, बैरिकेड टूटने के बाद हालात बेकाबू हो गए थे और असामाजिक तत्वों की मौजूदगी के कारण 'ग्रेडेड फोर्स' का उपयोग करना अनिवार्य हो गया था।

strong{क्या आप जानते हैं?:} भारत में भीड़ नियंत्रण के लिए आमतौर पर लाठीचार्ज और आंसू गैस का उपयोग किया जाता है, लेकिन AK-47 जैसे हथियारों का उपयोग अत्यंत दुर्लभ और विशेष परिस्थितियों के लिए आरक्षित होता है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: क्या सीवान फायरिंग में कोई हताहत हुआ?
नहीं, सरकार के अनुसार AK-47 से हवा में फायरिंग की गई थी और कोई घायल नहीं हुआ।

प्रश्न 2: कितने छात्रों को गिरफ्तार किया गया था?
कुल 500 के करीब गिरफ्तारियां हुईं, जिनमें से 222 बिना आपराधिक रिकॉर्ड वाले छात्रों को जमानत पर रिहा कर दिया गया।