भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की एक हालिया ऑडिट रिपोर्ट ने भारतीय रेलवे की बदहाल स्थिति को उजागर किया है, जिसमें 89% स्टेशनों पर पानी, पंखे और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी पाई गई है।
- ऑडिट किए गए 512 स्टेशनों में से 458 (89%) बुनियादी सुविधाओं में विफल रहे।
- पंखे (42%), वॉटर कूलर (40%) और पीने के पानी के नल (27%) की सबसे अधिक कमी देखी गई।
- बजट उपलब्ध होने के बावजूद 2019-24 के बीच फंड का भारी अंडर-यूटिलाइजेशन हुआ।
- नई दिल्ली, मुंबई सेंट्रल और हावड़ा जैसे बड़े स्टेशनों पर भी सुविधाओं की कमी पाई गई।
भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) द्वारा यात्री सुविधाओं और स्वच्छता पर किए गए एक विस्तृत ऑडिट ने भारतीय रेलवे के बुनियादी ढांचे में गंभीर खामियों को उजागर किया है। रिपोर्ट के अनुसार, ऑडिट किए गए 512 स्टेशनों में से 458 स्टेशनों पर न्यूनतम आवश्यक सुविधाओं का अभाव था, जो यह दर्शाता है कि देश के रेल नेटवर्क का एक बड़ा हिस्सा अभी भी बुनियादी मानकों को पूरा करने में संघर्ष कर रहा है।
ऑडिट में पाया गया कि 42% स्टेशनों पर पंखे, 40% पर वॉटर कूलर, 27% पर पीने के पानी के नल और 22% पर मूत्रालयों की कमी थी। यहाँ तक कि 12% स्टेशनों पर घड़ियाँ और शौचालय तक उपलब्ध नहीं थे। चौंकाने वाली बात यह है कि केवल 11% स्टेशन ही ऐसे थे जहाँ किसी भी प्रकार की कमी नहीं पाई गई। इस ऑडिट में अमृत भारत स्टेशन योजना के बाहर के स्टेशनों पर विशेष ध्यान दिया गया था, जो लंबी दूरी की यात्रा के लिए महत्वपूर्ण हैं।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह रिपोर्ट केवल सुविधाओं की कमी के बारे में नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक विफलता और जवाबदेही के अभाव को दर्शाती है। जब नई दिल्ली और मुंबई सेंट्रल जैसे NSG-1 श्रेणी के स्टेशनों (जहाँ वार्षिक कमाई 500 करोड़ रुपये से अधिक है) पर भी कमियाँ मिलती हैं, तो यह स्पष्ट होता है कि समस्या फंड की कमी नहीं, बल्कि प्रबंधन की है।
"बुनियादी सुविधाओं का अभाव यह संकेत देता है कि रेलवे का ध्यान केवल हाई-प्रोफाइल पुनर्विकास परियोजनाओं पर है, जबकि आम यात्री की बुनियादी जरूरतें नजरअंदाज की जा रही हैं।"
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि यह समस्या नई नहीं है; CAG ने 2007, 2013 और 2016 के ऑडिट में भी इन्हीं कमियों की ओर इशारा किया था। रेलवे बोर्ड के 2012 के निर्देशों के बावजूद, 379 स्टेशनों पर प्लेटफॉर्म शेल्टर पर्याप्त नहीं थे, जिससे यात्री धूप और बारिश के बीच असुरक्षित रहते हैं। इसके अलावा, 395 यात्री सुविधा कार्यों में से 59% में देरी पाई गई।
वित्तीय विश्लेषण से पता चलता है कि 2019-20 से 2023-24 के बीच बजट अनुदान का उपयोग केवल 36% से 44% के बीच रहा। उदाहरण के लिए, 2023-24 में बजट बढ़कर 14,072 करोड़ रुपये हो गया, लेकिन फिर भी 5,956 करोड़ रुपये खर्च नहीं किए जा सके। यह योजना और कार्यान्वयन के स्तर पर एक व्यवस्थित विफलता (Systemic Failure) को दर्शाता है।
| सुविधा (Amenity) | कमी का प्रतिशत (%) |
|---|---|
| पंखे (Fans) | 42% |
| वॉटर कूलर (Water Coolers) | 40% |
| पीने के पानी के नल (Drinking Water Taps) | 27% |
| मूत्रालय (Urinals) | 22% |
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: CAG रिपोर्ट में किन प्रमुख स्टेशनों पर कमियाँ पाई गईं?
उत्तर: नई दिल्ली, मुंबई सेंट्रल, हावड़ा, सीलदाह, भोपाल और राजकोट जैसे प्रमुख स्टेशनों पर सुविधाओं की कमी देखी गई।
प्रश्न 2: बजट उपलब्ध होने के बाद भी सुविधाएं क्यों नहीं सुधरीं?
उत्तर: रिपोर्ट के अनुसार, निगरानी की कमी, समयबद्ध कार्य योजनाओं का अभाव और जोनल स्तर पर कार्यों के प्राथमिकता निर्धारण में विसंगतियां इसका मुख्य कारण हैं।