सीबीआई ने भोपाल की त्विषा शर्मा मौत मामले में पति समर्थ सिंह और पूर्व जज सास गिरिबाला सिंह के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर आरोप लगाया है कि निरंतर मानसिक क्रूरता के कारण त्विषा ने आत्महत्या की।

वीडियो लोड हो रहा है...
  • सीबीआई ने पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह पर मानसिक क्रूरता का आरोप लगाया है।
  • भारतीय न्याय संहिता की धारा 85 (क्रूरता), 108 (आत्महत्या के लिए उकसाना) और 3(5) के तहत मामला दर्ज।
  • जांच में खुलासा हुआ कि गर्भावस्था और पिता की बीमारी के दौरान त्विषा पर अत्यधिक मनोवैज्ञानिक दबाव बनाया गया।

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में त्विषा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए चार्जशीट दाखिल कर दी है। सीबीआई ने इस आरोप पत्र में स्पष्ट रूप से कहा है कि त्विषा के पति समर्थ सिंह और उसकी सास, पूर्व जज गिरिबाला सिंह द्वारा की गई निरंतर मानसिक प्रताड़ना के कारण त्विषा के पास अपनी जीवनलीला समाप्त करने के अलावा और कोई विकल्प नहीं बचा था।

सीबीआई ने दोनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 85, जो पति या रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता से संबंधित है, और धारा 108, जो आत्महत्या के लिए उकसाने से जुड़ी है, के तहत आरोप लगाए हैं। गौरतलब है कि शुरुआत में यह मामला दहेज मृत्यु (धारा 80(2)) के रूप में दर्ज किया गया था, लेकिन जांच के बाद धाराओं में बदलाव किया गया है।

यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, यह मामला शक्ति के असंतुलन और घरेलू हिंसा के एक भयावह पहलू को दर्शाता है, जहां एक पूर्व न्यायाधीश पर अपनी ही बहू को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप है। दहेज मृत्यु से 'आत्महत्या के लिए उकसाने' की धारा में बदलाव यह संकेत देता है कि सीबीआई ने मौत के कारणों को प्रताड़ना से जोड़ा है, न कि सीधे तौर पर दहेज की मांग से की गई हत्या से।

दहेज मृत्यु से आत्महत्या के लिए उकसाने की धाराओं में बदलाव अक्सर पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और परिस्थितियों के साक्ष्यों के बीच के अंतर को दर्शाता है।

चार्जशीट के अनुसार, त्विषा और समर्थ की मुलाकात 2025 में एक डेटिंग ऐप के जरिए हुई थी और दिसंबर 2025 में उनकी शादी हुई। शादी का पूरा खर्च त्विषा के परिवार ने वहन किया था। जांच में पाया गया कि शादी के बाद समर्थ ने कई बार त्विषा के लिए अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया, जबकि उसकी सास गिरिबाला सिंह ने अपने बेटे को इस क्रूरता के लिए उकसाया।

मामले में गर्भावस्था का पहलू भी अत्यंत संवेदनशील है। अप्रैल 2026 में जब त्विषा को अपनी प्रेग्नेंसी का पता चला, तो वह मानसिक तनाव के कारण निर्णय लेने के लिए समय चाहती थी। सीबीआई का दावा है कि इस मुद्दे पर समर्थ ने उसके साथ दुर्व्यवहार किया, जिसके बाद मानसिक रूप से टूट चुकी त्विषा ने अपना ससुराल छोड़ दिया था।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

यह मामला तब राष्ट्रीय चर्चा में आया जब एक उच्च शिक्षित परिवार और न्यायिक पृष्ठभूमि वाली सास के खिलाफ घरेलू हिंसा के आरोप लगे। इस केस में दो बार पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में गवाहों की सुरक्षा को लेकर लंबी कानूनी बहस हुई है, जिससे यह मामला कानूनी गलियारों में काफी चर्चित रहा है।

प्रारंभिक एफआईआरवर्तमान चार्जशीट
धारा 80(2) (दहेज मृत्यु)धारा 85 (क्रूरता)
दहेज की मांग पर केंद्रितधारा 108 (आत्महत्या के लिए उकसाना)
हत्या की जांचधारा 3(5) (साझा मंशा)
क्या आप जानते हैं?: भारतीय न्याय संहिता (BNS) भारत का नया आपराधिक कानून है जिसने पुराने भारतीय दंड संहिता (IPC) की जगह ली है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: सीबीआई ने दहेज मृत्यु के बजाय आत्महत्या के लिए उकसाने की धारा क्यों लगाई?
यह निर्णय पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और जांच के दौरान मिले सबूतों के आधार पर लिया गया, जिससे यह संकेत मिला कि मौत प्रताड़ना के कारण की गई आत्महत्या थी।

प्रश्न 2: आरोपियों के वकील का इस पर क्या कहना है?
बचाव पक्ष का दावा है कि त्विषा मानसिक समस्याओं से जूझ रही थी और उन्होंने आरोप लगाया कि गर्भपात को लेकर हुए विवाद के कारण तनाव पैदा हुआ था।