भारत सरकार ने पंजाब सरकार को रूस-यूक्रेन युद्ध में मारे गए राज्य के युवाओं के परिवारों की मदद करने का निर्देश दिया है। इसमें DNA परीक्षण, मुफ्त कानूनी सहायता और मुआवजे की प्रक्रिया को तेज करना शामिल है।
- केंद्र सरकार ने पंजाब, हरियाणा और राजस्थान को DNA मिलान और कानूनी सहायता के लिए निर्देश दिए हैं।
- पंजाब के 6 युवाओं की मौत की पुष्टि हुई है, जिनमें से कुछ के शव वापस आ चुके हैं और कुछ का इंतजार है।
- पीड़ित परिवारों को रूसी अधिकारियों से मुआवजा प्राप्त करने के लिए मुफ्त कानूनी सहायता प्रदान की जाएगी।
भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने पंजाब सरकार को एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है, जिसमें उन परिवारों की तत्काल सहायता करने को कहा गया है जिनके बेटे रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान मारे गए। ये युवा कथित तौर पर ट्रैवल एजेंटों द्वारा अच्छी नौकरी के झांसे में रूस ले जाए गए थे, लेकिन वहां उन्हें जबरन रूसी सेना में भर्ती कर दिया गया।
विदेश मंत्रालय ने पंजाब, हरियाणा और राजस्थान सरकारों से अनुरोध किया है कि वे प्रभावित परिवारों के माता-पिता के DNA टेस्ट करवाने में मदद करें। यह प्रक्रिया इसलिए आवश्यक है ताकि रूसी अधिकारियों द्वारा भेजे गए शवों का सही पहचान के साथ मिलान किया जा सके। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि जिला कानूनी सेवा प्राधिकरणों के माध्यम से इन परिवारों को मुफ्त कानूनी सहायता प्रदान की जानी चाहिए, ताकि वे मुआवजे के दावों और अन्य औपचारिकताओं को पूरा कर सकें।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that this incident highlights a dangerous trend of human trafficking under the guise of overseas employment. The lack of coordination between recruitment agents and official channels has led to Indian citizens being trapped in foreign conflicts. The Centre's move to involve state governments indicates that the scale of the tragedy requires a grassroots administrative approach to provide closure to the grieving families.
केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि रूसी सेना में भर्ती किए गए लगभग 217 भारतीयों में से 49 की मृत्यु हो चुकी है। पंजाब के संदर्भ में, अमृतसर, बटाला, तरनतारन, गुरदासपुर और लुधियाना से छह पुरुषों की सूची साझा की गई है। इनमें से साहिल सेखरी, गुरसेवक सिंह और समरजीत सिंह के शव वापस लाए जा चुके हैं, लेकिन उनके परिवार अभी भी मुआवजे की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
"जब युवाओं को नौकरी के नाम पर युद्ध क्षेत्र में धकेला जाता है, तो यह केवल एक कानूनी विफलता नहीं बल्कि एक गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन है।"
अन्य तीन व्यक्तियों—हीरा सिंह, हरविंदर सिंह और जरनैल सिंह—के मामले अभी भी लंबित हैं। हीरा सिंह की मृत्यु नवंबर 2025 में हुई थी, लेकिन युद्ध क्षेत्र सक्रिय होने के कारण शव को निकालना संभव नहीं था। जरनैल सिंह अक्टूबर 2025 से लापता हैं। इन मामलों में रूस को राजनयिक संदेश (Note Verbale) भेजे गए हैं, लेकिन अभी तक कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला है।
| स्थिति | शव की वापसी | मुआवजा स्थिति |
|---|---|---|
| समरजीत, साहिल, गुरसेवक | पूर्ण (Repatriated) | लंबित (Pending) |
| हीरा, हरविंदर, जरनैल | प्रतीक्षित (Awaiting) | प्रारंभिक चरण (Initial Stage) |
एक अन्य पीड़ित, मनदीप के भाई जगदीप सिंह ने बताया कि उन्हें DNA सैंपलिंग के लिए भारी राशि खर्च करनी पड़ी। मनदीप को इटली में नौकरी का वादा कर रूस भेजा गया था, जहाँ मार्च 2024 में एक ड्रोन हमले में उनकी मृत्यु हो गई। अब उनका परिवार 1.30 करोड़ रुपये के मुआवजे का इंतजार कर रहा है।
Frequently Asked Questions
1. पंजाब के कितने युवा रूस युद्ध में मारे गए?
विदेश मंत्रालय की सूची के अनुसार पंजाब के 6 युवाओं की मौत हुई है, जबकि कुल 49 भारतीयों की मृत्यु की जानकारी सुप्रीम कोर्ट को दी गई है।
2. परिवारों को सरकार से क्या सहायता मिलेगी?
परिवारों को DNA टेस्ट के लिए मुफ्त कानूनी सहायता, दस्तावेज़ों का अनुवाद और मुआवजे के दावों को दाखिल करने में प्रशासनिक मदद मिलेगी।