दिल्ली सरकार ने सिनेमा हॉल के लाइसेंसिंग की जटिल प्रक्रिया को खत्म करते हुए एक एकीकृत सिंगल-विंडो सिस्टम और SOP अधिसूचित किया है, जिससे अब अलग-अलग विभागों से NOC लेने की जरूरत नहीं होगी।

  • अलग-अलग विभागों से NOC लेने की पुरानी और थकाऊ प्रक्रिया समाप्त।
  • ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल के माध्यम से पूरी प्रक्रिया अब ऑनलाइन और पारदर्शी होगी।
  • समय सीमा का सख्ती से पालन: निर्धारित समय में निर्णय न होने पर ऑटो-लाइसेंस का प्रावधान।

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए सिनेमा हॉल के लाइसेंसिंग प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) को अधिसूचित किया है। इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की कमी को दूर करना और आवेदकों को एक जवाबदेह, तकनीक-संचालित तंत्र प्रदान करना है। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि यह SOP 2015 में ही तैयार कर ली गई थी, लेकिन पिछली AAP सरकार ने इसे लागू नहीं किया।

इस नए बदलाव के साथ, अब आवेदकों को अलग-अलग सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटकर अलग-अलग अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) प्राप्त करने की आवश्यकता नहीं होगी। इसके बजाय, एक एकीकृत सिंगल-विंडो सिस्टम पेश किया गया है। अब राजस्व विभाग के तहत एक 'जिला लाइसेंसिंग समिति' (DLC) का गठन किया जाएगा, जिसकी अध्यक्षता जिला मजिस्ट्रेट/उपायुक्त करेंगे। इस समिति में पुलिस, दिल्ली अग्निशमन सेवा, MCD, DDA और दिल्ली जल बोर्ड जैसे महत्वपूर्ण विभागों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह कदम न केवल 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को बढ़ावा देता है, बल्कि प्रशासनिक भ्रष्टाचार और लालफीताशाही को भी कम करता है। जब एक ही समिति अंतिम निर्णय लेती है, तो फाइलों का एक विभाग से दूसरे विभाग में भटकना बंद हो जाता है, जिससे निवेश और मनोरंजन क्षेत्र में तेजी आने की संभावना है।

प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए, एक 'जिला निरीक्षण समिति' (DIC) का गठन किया जाएगा, जिसका नेतृत्व SDM करेंगे। यह समिति संयुक्त निरीक्षण करेगी और एक ई-साइन और जियोटैग की गई सत्यापन रिपोर्ट तैयार करेगी, जिसे सीधे ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा।

"डिजिटल सत्यापन और जियोटैगिंग का एकीकरण यह सुनिश्चित करता है कि सुरक्षा मानकों के साथ कोई समझौता न हो, जबकि प्रशासनिक देरी को न्यूनतम किया जा सके।"

समय सीमा का निर्धारण इस SOP की सबसे बड़ी विशेषता है। आवेदन की प्रारंभिक जांच 7 कार्य दिवसों में, निरीक्षण 45 दिनों के भीतर और अंतिम निर्णय रिपोर्ट मिलने के 30 दिनों के भीतर लिया जाना अनिवार्य है। यदि DLC समय पर निर्णय नहीं लेता है और निरीक्षण रिपोर्ट में सभी सुरक्षा मानकों का पालन पाया जाता है, तो लाइसेंस पोर्टल पर स्वचालित रूप से (Automatically) जेनरेट हो जाएगा।

सुरक्षा के मद्देनजर, दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) और सिनेमा हॉल साल में दो मॉक ड्रिल और नियमित औचक निरीक्षण करेंगे। सार्वजनिक सुरक्षा को खतरे में डालने वाले सिनेमा हॉल के लाइसेंस को निलंबित या रद्द करने के लिए एक सख्त प्रवर्तन तंत्र भी बनाया गया है।

विशेषता पुरानी प्रणाली नई SOP प्रणाली
NOC प्रक्रिया प्रत्येक विभाग से अलग NOC एकल एकीकृत सत्यापन रिपोर्ट
आवेदन माध्यम भौतिक/ऑफलाइन कार्यालय दौरे पूर्णतः ऑनलाइन (ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल)
निर्णय समय अनिश्चित और लंबा समय-बद्ध (ऑटो-जेनरेशन सुविधा)
क्या आप जानते हैं?: यह SOP सुप्रीम कोर्ट द्वारा उपहार सिनेमा त्रासदी के संबंध में दिए गए निर्देशों के अनुपालन के हिस्से के रूप में जारी की गई है, ताकि भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन हो सके।

Frequently Asked Questions

1. क्या अब भी अग्नि और पुलिस विभाग की मंजूरी जरूरी है?
हाँ, तकनीकी और सुरक्षा जिम्मेदारियाँ पुलिस और अग्निशमन विभाग की ही रहेंगी, लेकिन अब वे अलग NOC के बजाय एक संयुक्त निरीक्षण रिपोर्ट का हिस्सा होंगे।

2. यदि DLC समय पर निर्णय नहीं लेता है तो क्या होगा?
यदि सभी वैधानिक और सुरक्षा आवश्यकताओं का पालन किया गया है, तो लाइसेंस पोर्टल पर स्वतः जेनरेट हो जाएगा।