दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल ने पाकिस्तान की ISI और अंडरवर्ल्ड से जुड़े आठ लोगों को गिरफ्तार किया है, जिन्होंने दिल्ली और मुंबई में सरकारी इमारतों और सुरक्षा प्रतिष्ठानों पर हमले की योजना बनाई थी।
- दिल्ली, मुंबई, पंजाब और चंडीगढ़ में आतंकी हमलों की साजिश रचने के आरोप में 8 गिरफ्तार।
- मॉड्यूल का संबंध पाकिस्तान की ISI, मुन्ना झिंगाड़ा और शहजाद भट्टी से था।
- ग्लॉक पिस्टल, हैंड ग्रेनेड और सरकारी इमारतों के सटीक कोऑर्डिनेट्स बरामद।
- हथियारों की सप्लाई के लिए ड्रोन के इस्तेमाल का संदेह।
दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल ने पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) और आपराधिक अंडरवर्ल्ड से जुड़े एक खतरनाक आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने देश के विभिन्न हिस्सों, विशेष रूप से दिल्ली और मुंबई में रणनीतिक स्थानों पर हमले करने की योजना बनाने वाले आठ व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है।
स्पेशल सेल के पुलिस कमिश्नर अनिल शुक्ला ने बताया कि इन गिरफ्तारियों से बड़े हमलों को टाला गया है। पुलिस ने ऐसे सबूत जुटाए हैं जिनमें विशिष्ट सरकारी और गैर-सरकारी इमारतों तथा सुरक्षा प्रतिष्ठानों की तस्वीरें, वीडियो और सटीक भौगोलिक निर्देशांक (coordinates) शामिल हैं। यह पूरा नेटवर्क पाकिस्तान और दुबई से संचालित हो रहा था।
इस साजिश में दाऊद इब्राहिम के सहयोगी मुन्ना झिंगाड़ा और पाकिस्तान स्थित गैंगस्टर शहजाद भट्टी की मुख्य भूमिका थी। झिंगाड़ा, जो बैंकॉक की जेल में 17 साल बिताने के बाद पाकिस्तान लाया गया, ने जेल के संपर्कों का उपयोग करके एजेंट भर्ती किए। इसी कड़ी में 66 वर्षीय नेपाली नागरिक अंग कामी लामा को रसद (logistics) और वित्त प्रबंधन के लिए दिल्ली भेजा गया था।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, आतंकी भर्ती के लिए इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग करना एक खतरनाक बदलाव है। तीसरे देश के नागरिकों (नेपाली नागरिकों) को लॉजिस्टिक्स प्रदाता के रूप में इस्तेमाल करना ISI की एक सोची-समझी रणनीति है ताकि साजिश के मूल स्रोत को छिपाया जा सके और भारतीय खुफिया एजेंसियों को गुमराह किया जा सके।
ड्रोन के माध्यम से हथियारों की डिलीवरी और एन्क्रिप्टेड सोशल मीडिया का समन्वय भारत में ISI समर्थित मॉड्यूल की कार्यप्रणाली में एक गंभीर बदलाव को दर्शाता है।
इस मॉड्यूल का खुलासा तब हुआ जब इस महीने की शुरुआत में पुणे से विजय और झारखंड के साहिबगंज से नीतीश पासवान को गिरफ्तार किया गया। तकनीकी निगरानी के बाद मुंबई से तौकीर रिज़वान और अरबाज़ खान को पकड़ा गया। शनिवार तड़के 1 बजे मेहरौली-बदरपुर रोड पर पुलिस ने पंजाब के रहने वाले मनजीत सिंह, गगनदीप सिंह और हरविंदर सिंह को दबोचा, जिनके पास से चार हैंड ग्रेनेड, दो ग्लॉक पिस्टल और 25 जिंदा कारतूस बरामद हुए।
जांच एजेंसियां अब अन्य नेपाली नागरिकों और इस मॉड्यूल से जुड़े नेटवर्क की जांच कर रही हैं। यह ऑपरेशन इस बात की पुष्टि करता है कि राज्य-प्रायोजित खुफिया एजेंसियां और वैश्विक आपराधिक सिंडिकेट मिलकर भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए निरंतर खतरा बने हुए हैं।
| संस्था/व्यक्ति | भूमिका/संबंध | स्थान/आधार |
|---|---|---|
| मुन्ना झिंगाड़ा | मास्टरमाइंड/दाऊद इब्राहिम सहयोगी | पाकिस्तान |
| शहजाद भट्टी | गैंगस्टर/हैंडलर | पाकिस्तान |
| अंग कामी लामा | लॉजिस्टिक्स और फाइनेंस | नेपाल/दिल्ली |
| स्पेशल सेल | आतंकवाद विरोधी अभियान | नई दिल्ली |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: संदिग्धों तक हथियार कैसे पहुँचाए गए?
प्रारंभिक जांच से पता चलता है कि चेकपॉइंट्स से बचने के लिए ड्रोन के जरिए हथियारों की डिलीवरी की गई थी।
इस मॉड्यूल के प्राथमिक लक्ष्य दिल्ली, मुंबई, पंजाब और चंडीगढ़ के रणनीतिक स्थान थे।