डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का ज़िक्र करते हुए अमेरिका में 'सेव अमेरिका एक्ट' के ज़रिए अनिवार्य फोटो आईडी और नागरिकता प्रमाण की मांग की है।

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  • डोनाल्ड ट्रंप ने अनिवार्य फोटो आईडी के लिए भारत की चुनाव प्रणाली की सराहना की।
  • 'सेव अमेरिका एक्ट' के माध्यम से अमेरिकी मतदाताओं के लिए नागरिकता प्रमाण अनिवार्य करने का प्रस्ताव है।
  • यह विवाद 2026 के अमेरिकी मिडटर्म चुनावों से पहले गहरा गया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अमेरिका की वोटिंग प्रणाली में आमूल-चूल बदलाव की वकालत की है। अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर ट्रंप ने भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ हुई बातचीत का ज़िक्र करते हुए कहा कि अमेरिका को भी भारत की तर्ज पर सख्त चुनाव नियम अपनाने चाहिए।

ट्रंप ने विशेष रूप से भारत में मतदान के लिए वैध फोटो पहचान पत्र (Photo ID) की अनिवार्यता का उल्लेख किया। उन्होंने 2024 के भारतीय लोकसभा चुनावों का उदाहरण देते हुए बताया कि 64.6 करोड़ मतदाताओं वाले इस विशाल लोकतंत्र में 1% से भी कम लोगों ने डाक मतपत्र का उपयोग किया और हर मतदाता के लिए फोटो आईडी अनिवार्य थी। ट्रंप का तर्क है कि यदि भारत जैसे विशाल देश में यह संभव है, तो अमेरिका में क्यों नहीं?

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, ट्रंप का यह बयान केवल एक प्रशंसा नहीं, बल्कि 'सेव अमेरिका एक्ट' (सेफ़गार्ड अमेरिकन वोटर एलिजिबिलिटी एक्ट) को पारित कराने की एक सोची-समझी राजनीतिक रणनीति है। भारत जैसे सफल लोकतांत्रिक मॉडल का उदाहरण देकर वह अमेरिकी जनता और कांग्रेस पर दबाव बनाना चाहते हैं कि मतदाता पहचान की सख्त जांच से चुनाव अधिक सुरक्षित होंगे।

भारतीय चुनाव प्रणाली का वैश्विक संदर्भ में उपयोग यह दर्शाता है कि अब अमेरिकी राजनीति में 'चुनावी शुचिता' के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।

प्रस्तावित 'सेव अमेरिका एक्ट' के तहत, मतदाताओं को अपना पंजीकरण कराते समय अमेरिकी नागरिकता का प्रमाण देना होगा और मतदान केंद्र पर वैध फोटो आईडी दिखाना अनिवार्य होगा। ट्रंप इस कानून को पारित करना एक "राष्ट्रीय आपातकाल" जैसा महत्वपूर्ण मुद्दा मानते हैं। हालांकि, अमेरिकी सीनेट में इसे अभी तक पर्याप्त समर्थन नहीं मिला है।

दूसरी ओर, डेमोक्रेटिक पार्टी और नागरिक अधिकार संगठनों का मानना है कि इस तरह के नियम योग्य मतदाताओं को उनके अधिकार से वंचित कर सकते हैं। उनका तर्क है कि लाखों अमेरिकी नागरिक ऐसे हैं जिनके पास सरकारी फोटो आईडी या नागरिकता के दस्तावेज़ आसानी से उपलब्ध नहीं हैं, जिससे मतदान प्रतिशत गिर सकता है।

वर्तमान में, अमेरिका में भारत की तरह कोई केंद्रीकृत वोटर आईडी प्रणाली नहीं है। वहां चुनाव राज्यों के स्तर पर संचालित होते हैं, इसलिए नियम अलग-अलग हैं। जहाँ 36 राज्यों में किसी न किसी प्रकार की पहचान अनिवार्य है, वहीं 14 राज्यों और वॉशिंगटन डीसी में अन्य तरीकों से सत्यापन किया जाता है।

क्या आप जानते हैं?: ब्रेनन सेंटर फॉर जस्टिस के अनुसार, लगभग 2 करोड़ 10 लाख अमेरिकियों के पास अपनी नागरिकता साबित करने वाले दस्तावेज़ उपलब्ध नहीं हैं।
विशेषता भारतीय प्रणाली (ट्रंप द्वारा उद्धृत) वर्तमान अमेरिकी प्रणाली (सामान्य)
फोटो आईडी अनिवार्यता सभी मतदाताओं के लिए अनिवार्य राज्यों के अनुसार अलग-अलग
नागरिकता प्रमाण वोटर आईडी/पंजीकरण में एकीकृत कानूनी आवश्यकता, लेकिन प्रमाण अलग-अलग
प्रबंधन केंद्रीकृत (भारत निर्वाचन आयोग) विकेंद्रीकृत (राज्य स्तरीय)

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सेव अमेरिका एक्ट क्या है?
यह एक प्रस्तावित कानून है जिसके तहत अमेरिकी नागरिकों को वोट देने के लिए नागरिकता का प्रमाण और वैध फोटो आईडी दिखाना अनिवार्य होगा।

अगले अमेरिकी मिडटर्म चुनाव कब हैं?
अगले मिडटर्म चुनाव 3 नवंबर, 2026 को निर्धारित हैं।