CAG की हालिया रिपोर्ट ने भारतीय रेलवे स्टेशनों पर गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों और बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी का खुलासा किया है। रिपोर्ट के अनुसार, कई स्टेशनों के पानी में ई. कोलाई बैक्टीरिया पाया गया है और केवल 11% स्टेशन ही मानकों को पूरा करते हैं।
- 512 स्टेशनों के ऑडिट में पाया गया कि केवल 11% स्टेशनों पर ही सभी न्यूनतम आवश्यक सुविधाएं (MEA) उपलब्ध हैं।
- कोयंबटूर, हैदराबाद और CSMT जैसे प्रमुख स्टेशनों के वाटर कूलर के नमूनों में ई. कोलाई बैक्टीरिया की पुष्टि हुई।
- दिव्यांगजनों के लिए रैंप और विशेष पार्किंग जैसी सुविधाओं में 32% से 58% तक की कमी पाई गई।
- ग्राहक सुविधाओं के लिए आवंटित बजट का 36% से 44% हिस्सा उपयोग नहीं किया गया।
भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) द्वारा संसद में पेश की गई एक चौंकाने वाली रिपोर्ट ने भारतीय रेलवे के बुनियादी ढांचे और स्वच्छता प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 2019-20 से 2023-24 की अवधि के ऑडिट में यह पाया गया कि रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों को मिलने वाली बुनियादी सुविधाएं न केवल अपर्याप्त हैं, बल्कि कई मामलों में स्वास्थ्य के लिए खतरनाक भी हैं।
बुनियादी सुविधाओं (MEA) का संकट
रेलवे बोर्ड ने 2003 में 'न्यूनतम आवश्यक सुविधाएं' (Minimum Essential Amenities - MEA) पेश की थीं, जिसे 2018 में संशोधित किया गया था। इनमें पीने के पानी के नल, बैठने की व्यवस्था, शौचालय, प्रतीक्षालय और इलेक्ट्रॉनिक संकेतक बोर्ड शामिल हैं। हालांकि, CAG ने पाया कि 20 साल बाद भी, केवल 11% स्टेशन ही इन मानकों को पूरा कर पाए हैं।
हैरानी की बात यह है कि नई दिल्ली, हावड़ा, छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT) और बेंगलुरु जैसे बड़े स्टेशनों पर, जहाँ करोड़ों की कमाई होती है और लाखों यात्री आते हैं, वहां भी बुनियादी सुविधाओं की कमी पाई गई। ऑडिट किए गए 512 स्टेशनों में से केवल 54 स्टेशन ही पूरी तरह मानक के अनुरूप थे।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि रेलवे का ध्यान आधुनिक ट्रेनों (जैसे वंदे भारत) पर अधिक है, जबकि स्टेशनों के बुनियादी रखरखाव (Ground-level maintenance) की अनदेखी की गई है। जब करोड़ों यात्री इन स्टेशनों का उपयोग करते हैं, तो बुनियादी सुविधाओं का अभाव सीधे तौर पर सार्वजनिक स्वास्थ्य और सुरक्षा को प्रभावित करता है।
"पेयजल में ई. कोलाई की उपस्थिति यह दर्शाती है कि जल शोधन प्रणालियों और भंडारण टैंकों के रखरखाव में गंभीर लापरवाही बरती गई है, जो महामारी का कारण बन सकती है।"
स्वास्थ्य जोखिम: पानी में बैक्टीरिया
रिपोर्ट का सबसे डरावना हिस्सा पेयजल की गुणवत्ता से जुड़ा है। कोयंबटूर, पलक्कड़, हैदराबाद, CSMT, लोनावला और मधुपुर जैसे स्टेशनों के वाटर कूलरों में ई. कोलाई बैक्टीरिया पाया गया। यह बैक्टीरिया गंभीर पेट संक्रमण और डायरिया का कारण बन सकता है। ऑडिट में यह भी पाया गया कि 179 स्टेशनों पर स्वास्थ्य निरीक्षकों ने पानी का रासायनिक विश्लेषण तक नहीं किया था।
| सुविधा/मानक | कमी वाले स्टेशनों की संख्या/प्रतिशत |
|---|---|
| सभी MEA मानक पूरा करना | केवल 11% सफल |
| पेयजल नल की कमी | 188 स्टेशन |
| दिव्यांगजन रैंप की कमी | 44% कमी |
| बजट का कम उपयोग | 36% - 44% |
रेलवे मंत्रालय ने इस रिपोर्ट के बाद तत्काल कार्रवाई करते हुए लगभग 20,000 स्थानों पर 'टैंक टू टैप' वाटर फिल्ट्रेशन सिस्टम लगाने का निर्देश दिया है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने आश्वासन दिया है कि अब पानी की गुणवत्ता की निगरानी बोर्ड स्तर पर की जाएगी।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: ई. कोलाई बैक्टीरिया का स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर: यह गंभीर दस्त, पेट में ऐंठन और कुछ मामलों में किडनी फेलियर (HUS) का कारण बन सकता है।
प्रश्न 2: CAG रिपोर्ट के बाद रेलवे ने क्या कदम उठाए हैं?
उत्तर: मंत्रालय ने 20,000 स्थानों पर नए फिल्ट्रेशन सिस्टम लगाने और पानी की गुणवत्ता की बोर्ड-स्तरीय निगरानी का आदेश दिया है।