भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) ने 'सस्पेक्ट रजिस्ट्री' के माध्यम से लाखों संदिग्ध पहचानकर्ताओं को चिन्हित कर अरबों रुपये के धोखाधड़ी वाले लेनदेन को रोकने में सफलता हासिल की है। यह कदम डिजिटल ठगों के बुनियादी ढांचे को ध्वस्त करने की दिशा में एक बड़ी जीत है।
- जून 2026 तक ₹25,698 करोड़ के संदिग्ध धोखाधड़ी वाले फंड को ब्लॉक किया गया।
- 30.48 लाख साइबर अपराध पहचानकर्ताओं और 32.08 लाख म्यूल खातों को चिन्हित किया गया।
- अपराधिक गतिविधियों को रोकने के लिए 15.75 लाख सिम कार्ड और 5.77 लाख IMEI ब्लॉक किए गए।
भारत में डिजिटल लेनदेन के तेजी से विस्तार के साथ, साइबर अपराध एक गंभीर चुनौती बनकर उभरा है। इस खतरे से निपटने के लिए भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) ने बैंकों और वित्तीय संस्थानों के साथ मिलकर 'सस्पेक्ट रजिस्ट्री' (Suspect Registry) को लागू किया है। 10 सितंबर, 2024 को शुरू की गई यह प्रणाली उन मोबाइल नंबरों, बैंक खातों और डिजिटल पहचानों को ट्रैक करती है, जिनका उपयोग साइबर अपराधियों द्वारा किया जा रहा है।
इस अभियान का पैमाना चौंकाने वाला है। 30 जून, 2026 तक, इस रजिस्ट्री में 30.48 लाख से अधिक संदिग्ध पहचानकर्ताओं की रिपोर्ट की गई है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि 32.08 लाख 'लेयर-1 म्यूल अकाउंट्स' की पहचान की गई है। म्यूल अकाउंट वे बैंक खाते होते हैं जिनका उपयोग अपराधी चोरी के पैसे को घुमाने (Layering) के लिए करते हैं, ताकि पुलिस और जांच एजेंसियां असली अपराधी तक न पहुंच सकें।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि पारंपरिक 'अपराध के बाद जांच' वाला तरीका विफल हो रहा था क्योंकि डिजिटल पैसा कानूनी कागजी कार्रवाई से कहीं अधिक तेजी से ट्रांसफर होता है। I4C द्वारा अपनाई गई यह 'निवारक रणनीति' (Preventive Strategy) अपराधियों की वित्तीय पाइपलाइन को ही फ्रीज कर रही है। ₹25,698 करोड़ की राशि को रोकना यह साबित करता है कि रीयल-टाइम फ्लैगिंग ही आधुनिक फिनटेक अपराधों का एकमात्र समाधान है।
प्रतिक्रियात्मक पुलिसिंग से हटकर सक्रिय डिजिटल फ्लैगिंग की ओर बढ़ना, वित्तीय अपराधों के संबंध में भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति में सबसे महत्वपूर्ण विकास है।
बैंक खातों के अलावा, सरकार अब उन उपकरणों (Hardware) पर प्रहार कर रही है जिनका उपयोग ठगी के लिए किया जाता है। 15.75 लाख सिम कार्ड और 5.77 लाख IMEI को ब्लॉक करके, I4C ने जालसाजों के प्राथमिक हथियारों को छीन लिया है। IMEI ब्लॉक होने का मतलब है कि वह विशेष मोबाइल डिवाइस अब किसी भी नेटवर्क पर काम नहीं करेगा, जिससे 'डिजिटल अरेस्ट' जैसे घोटालों में इस्तेमाल होने वाले फोन बेकार हो जाएंगे।
हालांकि, साइबर अपराधी भी नए तरीके अपना रहे हैं। अब फर्जी निवेश योजनाएं, नौकरी के फर्जी ऑफर और बिजली बिल अपडेट जैसे सोशल इंजीनियरिंग के तरीकों का उपयोग किया जा रहा है। चूंकि ये अपराधी अक्सर एक राज्य से दूसरे राज्य के पीड़ितों को निशाना बनाते हैं, इसलिए राष्ट्रीय स्तर पर समन्वय आवश्यक है। सस्पेक्ट रजिस्ट्री इसी अंतर को भरती है, जिससे विभिन्न राज्यों की एजेंसियां एक-दूसरे के साथ खुफिया जानकारी साझा कर पाती हैं।
| पैमाना/मेट्रिक | प्रभाव/संख्या |
|---|---|
| ब्लॉक किया गया फंड | ₹25,698 करोड़ |
| संदिग्ध पहचानकर्ता | 30.48 लाख |
| म्यूल अकाउंट्स | 32.08 लाख |
| सिम/IMEI ब्लॉक | 21.52 लाख (कुल) |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
साइबर अपराध में 'म्यूल अकाउंट' क्या होता है?
म्यूल अकाउंट वह बैंक खाता है जिसका उपयोग अपराधी चोरी के पैसे को प्राप्त करने और स्थानांतरित करने के लिए करते हैं ताकि पैसे का असली स्रोत छिपाया जा सके।
IMEI ब्लॉक करने से क्या मदद मिलती है?
IMEI ब्लॉक करने से वह विशिष्ट मोबाइल डिवाइस किसी भी सेलुलर नेटवर्क से नहीं जुड़ पाता, जिससे वह डिवाइस भविष्य के अपराधों के लिए बेकार हो जाता है।