भारतीय सेना ने जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ एक वर्ष के भीतर 34 बड़े सैन्य ऑपरेशन चलाए हैं, जिसमें 'ऑपरेशन महादेव' से लेकर 'शाहजाद भट्टी नेटवर्क' के खात्मे तक शामिल है। चिनार और व्हाइट नाइट कोर ने घुसपैठ रोकने और आतंकियों के लॉजिस्टिक्स को नष्ट करने में बड़ी सफलता हासिल की है।

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  • पिछले एक साल में भारतीय सेना ने जम्मू-कश्मीर में 34 महत्वपूर्ण काउंटर-टेरर ऑपरेशन चलाए।
  • 'ऑपरेशन महादेव' के तहत पहलगाम हमले के तीन आतंकियों को ढेर किया गया।
  • 'ऑपरेशन त्राशी-I' में जैश-ए-मोहम्मद के कमांडर सैफुल्लाह सहित 7 आतंकी मारे गए।
  • शाहजाद भट्टी नेटवर्क के खिलाफ देशव्यापी कार्रवाई में 253 संदिग्ध गिरफ्तार किए गए।

भारतीय सुरक्षा बलों ने जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ अपनी रणनीति में एक बड़ा बदलाव किया है। अब सुरक्षा बल केवल हमलों का जवाब नहीं दे रहे, बल्कि आतंकियों के नेटवर्क, उनके ठिकानों और घुसपैठ के रास्तों को व्यवस्थित रूप से नष्ट कर रहे हैं। ऑपरेशन महादेव की सफलता के बाद से सेना ने एक आक्रामक रुख अपनाया है, जिससे घाटी में आतंकी गतिविधियों पर गहरा प्रहार हुआ है।

चिनार कोर: कश्मीर घाटी में खुफिया शिकार

चिनार कोर ने उत्तर और दक्षिण कश्मीर के विभिन्न जिलों जैसे कुपवाड़ा, बारामुला, बांदीपोरा और शोपियां में व्यापक अभियान चलाए। अगस्त 2025 में ऑपरेशन नागनी टॉप के दौरान एक प्रमुख आतंकी ठिकाना ध्वस्त किया गया, जहां से भारी मात्रा में गोला-बारूद बरामद हुआ। इसी तरह, ऑपरेशन अमर और ऑपरेशन पिंपल जैसे अभियानों ने घुसपैठ की कोशिशों को नाकाम करते हुए कई आतंकियों को मार गिराया।

सेना के इन ऑपरेशनों का मुख्य उद्देश्य केवल आतंकियों को मारना नहीं, बल्कि उनके लॉजिस्टिक्स और मददगारों के नेटवर्क को तोड़ना है। उदाहरण के तौर पर, ऑपरेशन चित्रगाम में 14.5 किलो का आईईडी बेअसर किया गया, जो एक बड़ी तबाही को रोकने में सफल रहा।

व्हाइट नाइट कोर: एलओसी पर अभेद्य दीवार

जम्मू क्षेत्र में तैनात व्हाइट नाइट कोर ने घुसपैठ रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ऑपरेशन त्राशी-I इस वर्ष का सबसे महत्वपूर्ण मिशन रहा, जो किश्तवाड़ के कठिन पहाड़ी इलाकों में 326 दिनों तक चला। इस अभियान में आधुनिक तकनीक जैसे एफपीवी ड्रोन और सैटेलाइट इमेजरी का उपयोग करते हुए जैश-ए-मोहम्मद के कमांडर सैफुल्लाह सहित 7 आतंकियों को खत्म किया गया।

सुरक्षा बलों की नई रणनीति अब 'रिएक्टिव' से 'प्रोएक्टिव' हो गई है, जहाँ घुसपैठ होने से पहले ही उसे रोक दिया जाता है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारतीय सेना की यह दोहरी रणनीति—एक तरफ एलओसी पर घुसपैठ रोकना और दूसरी तरफ घाटी के भीतर नेटवर्क को ध्वस्त करना—आतंकवाद की रीढ़ तोड़ रही है। शाहजाद भट्टी नेटवर्क जैसे समूहों के खिलाफ राष्ट्रव्यापी कार्रवाई यह दर्शाती है कि सुरक्षा एजेंसियां अब सीमा के भीतर और बाहर, दोनों मोर्चों पर एक साथ काम कर रही हैं।

Did You Know?: भारतीय सेना अब कठिन इलाकों में आतंकियों का पता लगाने के लिए अत्याधुनिक एफपीवी (First Person View) ड्रोन्स का बड़े पैमाने पर उपयोग कर रही है।

Frequently Asked Questions

1. ऑपरेशन महादेव क्या था?
यह एक संयुक्त सैन्य अभियान था जिसमें पहलगाम हमले के दोषियों को खत्म करने के लिए 4 पारा, सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने मिलकर काम किया था।

2. शाहजाद भट्टी नेटवर्क क्या है?
यह एक संदिग्ध नेटवर्क है जिसके खिलाफ गृह मंत्रालय ने 14 राज्यों में कार्रवाई करते हुए सैकड़ों गिरफ्तारियां की हैं।