रांची के सदर अस्पताल में 15 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने जूस पीकर अपना अनशन समाप्त किया। स्वास्थ्य बिगड़ने और गंभीर चिकित्सकीय स्थिति के कारण यह निर्णय लिया गया।

  • देवेंद्र नाथ महतो ने रांची सदर अस्पताल में 15 दिवसीय भूख हड़ताल समाप्त की।
  • बीपी कम होने और दवाओं का असर न होने के कारण स्वास्थ्य गंभीर हो गया था।
  • छात्र नेता ने स्पष्ट किया कि केवल परीक्षा रद्द होना उनकी मंजिल नहीं है।

झारखंड की छात्र राजनीति में एक बड़ा मोड़ आया है, जहाँ प्रमुख छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने अपनी लंबी भूख हड़ताल समाप्त करने का ऐलान किया है। रांची के सदर अस्पताल में भर्ती महतो ने चिकित्सकों की देखरेख में जूस पीकर अपना अनशन तोड़ा। पिछले 15 दिनों से चल रहे इस विरोध प्रदर्शन ने पूरे राज्य के छात्र समुदाय और राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी थी।

यह अनशन मुख्य रूप से शिक्षा व्यवस्था में सुधार और छात्रों के अधिकारों की रक्षा के लिए किया गया था। जैसे-जैसे दिन बीतते गए, महतो की शारीरिक स्थिति चिंताजनक होती गई। अस्पताल की रिपोर्ट के अनुसार, उनका रक्तचाप (Blood Pressure) काफी गिर गया था और शरीर में कमजोरी इतनी बढ़ गई थी कि नियमित दवाएं भी असर करना बंद कर चुकी थीं, जिससे उनके जीवन पर खतरा मंडराने लगा था।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह आंदोलन केवल एक परीक्षा के परिणाम तक सीमित नहीं है, बल्कि यह झारखंड की जर्जर शिक्षा प्रणाली के खिलाफ एक व्यापक आक्रोश है। सोनम वांगचुक जैसे व्यक्तित्वों से संपर्क साधकर महतो ने इस स्थानीय मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा की गुणवत्ता और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य से जोड़ने का प्रयास किया है।

जब छात्र आंदोलन स्वास्थ्य संकट में बदल जाते हैं, तो प्रशासन दबाव में आता है, लेकिन वास्तविक समाधान केवल नीतिगत बदलावों से ही संभव है।

अनशन के दौरान देवेंद्र नाथ महतो ने पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि पुलिस ने उनके साथ धक्का-मुक्की की और उन्हें 'तिरंगा यात्रा' में शामिल होने से जबरन रोका गया। पुलिस की इस कथित बर्बरता ने इस मुद्दे को मानवाधिकारों के उल्लंघन की दिशा में मोड़ दिया है, जिससे स्थानीय नागरिक समाज में आक्रोश है।

अस्पताल के बिस्तर से अपने समर्थकों और छात्रों को संबोधित करते हुए महतो ने कहा कि 'परीक्षा का रद्द होना मंजिल नहीं है'। उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे केवल तात्कालिक राहत के बजाय एक पारदर्शी और योग्यता-आधारित शिक्षा प्रणाली की मांग करना जारी रखें, ताकि भविष्य की पीढ़ियों को इस संघर्ष से न गुजरना पड़े।

क्या आप जानते हैं?: भारत में भूख हड़ताल का उपयोग राजनीतिक दबाव बनाने के लिए महात्मा गांधी के सत्याग्रह काल से ही एक शक्तिशाली हथियार के रूप में किया जाता रहा है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: देवेंद्र नाथ महतो ने अपना अनशन क्यों खत्म किया?
स्वास्थ्य में अत्यधिक गिरावट, विशेष रूप से बीपी कम होने और दवाओं के निष्प्रभावी होने के कारण उन्होंने चिकित्सकीय सलाह पर अनशन समाप्त किया।

प्रश्न 2: इस विरोध प्रदर्शन की मुख्य मांगें क्या थीं?
मुख्य मांगों में शिक्षा प्रणाली में सुधार, परीक्षाओं की निष्पक्षता और प्रशासनिक लापरवाही को समाप्त करना शामिल था।