केरल उच्च न्यायालय ने 2015 के विधानसभा हाथापाई मामले में पूर्व विधायक ए.टी. जॉर्ज सहित सभी चार यूडीएफ विधायकों को बरी कर दिया है। इस फैसले से एलडीएफ को बड़ा झटका लगा है, क्योंकि अब केवल उनके नेता ही सार्वजनिक संपत्ति के नुकसान के मुकदमे का सामना करेंगे।
- केरल हाई कोर्ट ने पूर्व विधायक ए.टी. जॉर्ज और तीन अन्य यूडीएफ सदस्यों को बरी किया।
- यह मामला 2015 में बजट प्रस्तुति के दौरान हुई हिंसा और हाथापाई से जुड़ा है।
- एलडीएफ नेताओं पर सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने का मुकदमा अब भी जारी है।
- सुप्रीम कोर्ट ने एलडीएफ सरकार की केस वापस लेने की याचिका को पहले ही खारिज कर दिया था।
केरल उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में 2015 के विधानसभा हाथापाई मामले में पूर्व विधायक ए.टी. जॉर्ज को बरी कर दिया है। जस्टिस सी.एस. दयास की बेंच के इस निर्णय के साथ ही, इस मामले में आरोपी सभी चार संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (UDF) विधायकों को कानूनी रूप से क्लीन चिट मिल गई है। यह घटना 13 मार्च 2015 की है, जब तत्कालीन वित्त मंत्री के.एम. मणि द्वारा बजट पेश किए जाने से रोकने के लिए लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) के विधायकों ने उग्र विरोध प्रदर्शन किया था।
इस कानूनी लड़ाई की शुरुआत तब हुई जब एलडीएफ ने आरोप लगाया कि यूडीएफ नेताओं ने विधानसभा के भीतर महिला विधायकों, जिनमें के.के. लतिका, जमीला प्रकाशम और गीता गोपी शामिल थीं, के साथ दुर्व्यवहार किया और उन्हें बाधित किया। इससे पहले 2024 में ही कोर्ट ने के. शिवदासन नायर, एम.ए. वाहिद और डोमिनिक प्रेजेंटेशन को बरी कर दिया था। ए.टी. जॉर्ज की रिहाई के साथ ही यूडीएफ के खिलाफ सभी आरोप खारिज हो गए हैं।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that this verdict strips away the LDF's primary legal shield. The ruling party had attempted to link the UDF's alleged misconduct to their own actions to create a narrative of mutual conflict. However, with the UDF now completely exonerated, the LDF leaders stand alone in facing charges of vandalism. This creates a precarious political situation for the current administration as the trial progresses.
This judgment underscores the judiciary's refusal to allow political retaliation to masquerade as legal proceedings.
दूसरी ओर, एलडीएफ नेताओं के खिलाफ सार्वजनिक संपत्ति विनाश अधिनियम के तहत मामला अभी भी लंबित है। आरोप है कि विरोध प्रदर्शन के दौरान स्पीकर के मंच पर धावा बोलकर कुर्सियों, कंप्यूटरों और इलेक्ट्रॉनिक पैनलों को तोड़ दिया गया, जिससे लगभग 2,20,093 रुपये का नुकसान हुआ। वी. शिवनकुट्टी, के.टी. जलील और ई.पी. जयराजन सहित कई नेता इस मुकदमे का सामना कर रहे हैं।
दिलचस्प बात यह है कि जब एलडीएफ सत्ता में था, तब उन्होंने इस मामले को वापस लेने के लिए तिरुवनंतपुरम मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट और हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन दोनों ने इनकार कर दिया। अंततः जुलाई 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने भी सरकार की अपील खारिज कर दी, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि राजनीतिक सत्ता कानूनी जवाबदेही से ऊपर नहीं है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: यूडीएफ विधायकों पर क्या आरोप थे?
उन पर आरोप था कि उन्होंने 2015 में बजट सत्र के दौरान महिला विधायकों के साथ दुर्व्यवहार किया और उन्हें रोकने की कोशिश की।
प्रश्न 2: एलडीएफ नेताओं पर कौन सा मामला चल रहा है?
उन पर विधानसभा में सार्वजनिक संपत्ति (लगभग 2.2 लाख रुपये) को नष्ट करने का मामला चल रहा है।