तिरुवनंतपुरम पुलिस ने एक बड़े रैकेट का खुलासा किया है जहाँ बड़े होटल मालिकों ने गरीब विक्रेताओं की आड़ में अवैध स्ट्रीट फूड स्टॉल (तट्टुकडा) का जाल बिछाया था। जांच में पाया गया कि इन स्टॉल्स से होने वाली करोड़ों की कमाई सीधे बड़े होटलों के बैंक खातों में जा रही थी।

  • बड़े होटलों ने गरीब विक्रेताओं की आड़ में अवैध स्ट्रीट फूड चेन चलाई।
  • UPI लेनदेन के विश्लेषण से करोड़ों रुपयों के हेरफेर का खुलासा हुआ।
  • सुप्रीम कोर्ट के पैदल यात्रियों के अधिकारों के आदेश के बाद पुलिस ने सख्त कार्रवाई की।
  • अब सड़क किनारे स्टॉल लगाने के लिए ट्रैफिक असिस्टेंट कमिश्नर की अनुमति अनिवार्य।

केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में पुलिस ने एक चौंकाने वाले संगठित रैकेट का पर्दाफाश किया है। शहर के विभिन्न हिस्सों में संचालित होने वाले अवैध स्ट्रीट फूड स्टॉल्स, जिन्हें स्थानीय भाषा में 'तट्टुकडा' कहा जाता है, वास्तव में बड़े होटल मालिकों द्वारा नियंत्रित किए जा रहे थे। पुलिस जांच में यह सामने आया कि इन स्टॉल्स को चलाने वाले लोग केवल मुखौटा थे, जबकि असली मुनाफा बड़े होटल समूहों की जेब में जा रहा था।

कुरावनकोनम क्षेत्र में की गई छापेमारी के दौरान पुलिस को पता चला कि दर्जनों स्टॉल्स में से केवल एक के पास वैध लाइसेंस था। जब पुलिस ने इन स्टॉल्स के UPI ट्रांजेक्शन की जांच की, तो वे दंग रह गए। विश्लेषण से पता चला कि लाखों और करोड़ों रुपये का लेनदेन सीधे शहर के प्रतिष्ठित बड़े होटलों के बैंक खातों में हो रहा था। यह एक सुनियोजित रणनीति थी जिसमें बड़े व्यवसायी कम लागत में अधिक मुनाफा कमाने के लिए सड़क किनारे अवैध साम्राज्य खड़ा कर रहे थे।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that this is not just a traffic issue, but a case of corporate predatory behavior. By using poor individuals as fronts, large hotel owners bypassed licensing laws, evaded taxes, and pushed out genuine small-scale entrepreneurs who rely on these stalls for their livelihood. This systemic encroachment disrupts the urban ecosystem and creates an unfair market monopoly.

"The transition of street food from a survivalist venture for the poor to a corporate-funded racket undermines the very essence of urban micro-entrepreneurship."

पुलिस ने वजुथक्कड, पालायम यूनिवर्सिटी कॉलेज, मेडिकल कॉलेज हॉस्टल और कार्यवट्टम कैंपस जैसे भीड़भाड़ वाले इलाकों में व्यापक अभियान चलाया है। यह पाया गया कि कई स्टॉल्स राजनीतिक संरक्षण के कारण दोबारा शुरू हो गए थे, जिससे यातायात में भारी बाधा उत्पन्न हो रही थी। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में स्पष्ट किया है कि फुटपाथों पर बिना बाधा के चलना नागरिकों का मौलिक अधिकार है, जिसके आधार पर पुलिस अब इन अतिक्रमणों को हटाने के लिए पूरी तरह सशक्त है।

प्रशासन ने अब नए नियम लागू किए हैं। अब किसी भी व्यक्ति को सड़क किनारे स्टॉल शुरू करने से पहले ट्रैफिक असिस्टेंट कमिश्नर से लिखित अनुमति लेनी होगी। पुलिस यह जांच करेगी कि स्टॉल से यातायात बाधित तो नहीं हो रहा है। मेयर वी.वी. राजेश ने आश्वासन दिया है कि कानूनी रूप से व्यापार करने के लिए जल्द ही विशेष 'फूड स्ट्रीट' निर्धारित किए जाएंगे।

इसके साथ ही, ओणम त्योहार के मद्देनजर कॉर्पोरेशन ने खाद्य सुरक्षा जांच (Food Safety Inspection) तेज कर दी है। 'ओणम स्क्वाड' के माध्यम से घी, नारियल तेल और अन्य खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता, लाइसेंस और एक्सपायरी डेट की गहन जांच की जा रही है, ताकि त्योहार के दौरान जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ न हो।

Did You Know?: केरल में 'तट्टुकडा' केवल भोजन का स्रोत नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक पहचान है, लेकिन अब यह बड़े व्यावसायिक समूहों के निशाने पर है।

Frequently Asked Questions

1. अब सड़क किनारे स्टॉल लगाने के लिए क्या प्रक्रिया है?
अब आपको ट्रैफिक असिस्टेंट कमिश्नर को आवेदन देना होगा, जिसके बाद पुलिस यातायात प्रभाव की जांच करेगी और अनुमति देगी।

2. इस रैकेट में बड़े होटलों की क्या भूमिका थी?
बड़े होटल अपने नाम पर लाइसेंस न लेकर गरीबों के माध्यम से स्टॉल चलाते थे और सारा पैसा अपने खातों में लेते थे, जिससे वे टैक्स और नियमों से बच सकें।