मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर जनसांख्यिकीय असंतुलन को रोकने के लिए जनगणना से पहले NRC लागू करने की मांग की है।
- एन बीरेन सिंह ने मणिपुर में जनगणना से पहले NRC लागू करने की मांग की।
- आर्थिक नाकाबंदी और आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों पर चिंता व्यक्त की गई।
- 926 गैर-मान्यता प्राप्त गांवों को मान्यता देने का अनुरोध गृह मंत्रालय के समक्ष रखा गया।
नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण बैठक के दौरान, मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य मणिपुर में जारी आर्थिक नाकाबंदी और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति में व्यवधान जैसे गंभीर मुद्दों पर चर्चा करना था। साथ ही, सिंह ने राज्य में किसी भी जनगणना गतिविधि से पहले राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) तैयार करने की पुरजोर मांग की।
सिंह ने स्पष्ट किया कि राज्य की जनता जनगणना के खिलाफ नहीं है, लेकिन उनकी यह मांग है कि पहले NRC प्रक्रिया पूरी की जाए। उनका तर्क है कि बिना NRC के जनगणना करने से अवैध प्रवासियों की पहचान नहीं हो पाएगी, जिससे राज्य के जनसांख्यिकीय संतुलन (Demographic Balance) पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, जनगणना से पहले NRC की मांग केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि गहरी राजनीतिक और जातीय है। मई 2023 से मैतेई और कुकी-ज़ो समूहों के बीच चल रहे संघर्ष, जिसमें 260 से अधिक लोग मारे गए हैं, ने पहचान और नागरिकता के मुद्दे को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। यह मांग दर्शाती है कि स्थानीय नेतृत्व आधिकारिक गणना से पहले अवैध प्रवासियों की छंटनी चाहता है।
जनगणना से पहले NRC का कार्यान्वयन स्थानीय हितधारकों द्वारा यह सुनिश्चित करने के रूप में देखा जा रहा है कि मणिपुर का लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व अवैध प्रवासन से प्रभावित न हो।
NRC के अलावा, सिंह ने आर्थिक नाकाबंदी और जवाबी नाकाबंदी से उत्पन्न संकट पर भी चर्चा की। इन नाकाबंदी के कारण आवश्यक वस्तुओं की कीमतें आसमान छू रही हैं, जिससे आम जनता को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। गृह मंत्री अमित शाह ने आश्वासन दिया है कि आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधानों को जल्द ही दूर किया जाएगा।
इस मांग को लेकर मणिपुर में विरोध प्रदर्शन भी तेज हो गए हैं। इंफाल में जनगणना संचालन निदेशालय के बाहर छात्रों ने प्रदर्शन किया, जिसे तितर-बितर करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोलों का उपयोग करना पड़ा। इसके अलावा, इंफाल पूर्व और पश्चिम जिलों में अवैध प्रवासियों की पहचान के लिए मशाल जुलूस भी निकाले गए।
बैठक में 926 गैर-मान्यता प्राप्त गांवों की मान्यता का मुद्दा भी उठाया गया। सिंह ने कहा कि इन गांवों को सरकारी मान्यता मिलना अनिवार्य है ताकि वहां के निवासियों को बुनियादी सुविधाएं और सरकारी लाभ मिल सकें, जिससे क्षेत्रीय असंतोष को कम किया जा सके।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: एन बीरेन सिंह जनगणना से पहले NRC क्यों चाहते हैं?
उनका मानना है कि पहले अवैध प्रवासियों की पहचान करना आवश्यक है ताकि जनसांख्यिकीय असंतुलन को रोका जा सके और जनगणना केवल कानूनी नागरिकों की हो।
आर्थिक नाकाबंदी के कारण आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बाधित हुई है और कीमतें बढ़ी हैं; गृह मंत्री ने इसे जल्द सुलझाने का आश्वासन दिया है।